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    किडनी ट्रांसप्लांट के काले कारोबार में लिप्त दो और आरोपी गिरफ्तार, विदेश भागने की थी तैयारी

    Updated: Thu, 02 Apr 2026 06:58 PM (IST)

    कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट में दो और आरोपी गाजियाबाद से गिरफ्तार किए गए हैं। ये दोनों ओटी इंचार्ज हैं और विदेश भागने की तैयारी में थे। ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, कानपुर। टेलीग्राम ग्रुप के जरिए अवैध तरीके से किडनी की खरीद-बिक्री और ट्रांसप्लांट के काले कारोबार में लिप्त दो और आरोपितों को पुलिस ने गाजियाबाद से पकड़ा है। इसमें एक हापुड का कुलदीप सिंह राघव और दूसरा गाजियाबाद का राजेश कुमार है। दोनों अलग-अलग अस्पतालों में ओटी इंचार्ज हैं, जबकि इनका तीसरा साथी डॉक्टर है, जिसे ट्रेस किया जा रहा है।

    इन लोगों को किडनी खरीद-बिक्री का रैकेट को चलाने वाला डॉ. रोहित हर ट्रांसप्लांट के लिए 40-40 हजार रुपये व फ्लाइट की टिकट मुहैया कराता था। ट्रांसप्लांट वाले दिन आठ लोग केशवपुरम स्थित आहूजा अस्पताल पहुंचे थे, जिसमें तीन गाजियाबाद से व पांच लखनऊ से आए थे। लखनऊ से आए आरोपितों की तलाश में टीमें लगी हैं। पकड़े गए आरोपित विदेश भागने की तैयारी में थे।

    रावतपुर के केशवपुरम स्थित आहूजा अस्पताल में रविवार रात मुजफ्फर नगर निवासी पारुल का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था, जिसे लखनऊ के डा. रोहित ने अपनी टीम के सात अन्य सदस्यों के साथ किया था। इसके लिए बिहार के बेगूसराय निवासी आयुष ने किडनी बेची थी। इस अवैध किडनी ट्रांसप्लांट की सूचना इस रैकेट से जुड़े किसी सदस्य ने पुलिस को उसी रात दे दी थी। हालांकि, पुलिस ने ट्रांसप्लांट के बाद सोमवार को आहूजा अस्पताल के संचालक डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, उनकी पत्नी व इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) कानपुर की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा व दलाल कल्याणपुर के देवी सहाय नगर निवासी शिवम अग्रवाल, राम प्रकाश, राजेश व नरेंद्र सिंह को पकड़ा था।

    डॉ. रोहित, मेरठ के डॉ. अफजल, डॉ. अनुराग उर्फ अमित, डॉ. वैभव मुद्गल की तलाश की जा रही है। इस रैकेट ने काले कारोबार के लिए किडनी डोनर नाम से टेलीग्राम ग्रुप बना रखा था। डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट करने के लिए आठ लोगों की टीम आई थी। ये सभी फ्लाइट से शहर पहुंचे थे और यहां से अलग-अलग दो कारों से आहूजा अस्पताल पहुंचे थे। इसमें पांच एक कार और तीन दूसरी कार से थे।

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    ट्रांसप्लांट करने के बाद रात दो बजे के बाद बुक कराई किआ कार से पांच लोग लखनऊ निकले और अर्टिगा कार से तीन लोग गाजियाबाद गए थे। इसकी जानकारी अस्पताल के आसपास लगे कैमरों की जांच में हुई थी। अर्टिगा कार का नंबर ट्रेस करने पर उसके चालक से संपर्क किया गया। उसने बताया कि रात दो बजे कार बुक हुई थी। आहूजा अस्पताल के पास तीन लोग मास्क पहने हुए बैठे थे। उन्होंने कार का आनलाइन भुगतान किया था। जिस यूपीआइ से रुपये भेजे गए थे, उसकी जांच करते हुए कुलदीप के खाते और उसमें दर्ज मोबाइल नंबर को ट्रेस कर उसे और राजेश को दबोचा गया।

    कुलदीप गाजियाबाद के शांति गोपाल हास्पिटल में और राजेश नोएडा के सर्वोदय हास्पिटल में ओटी इंचार्ज है। तीसरा आरोपित डॉक्टर है। वहीं, दूसरी कार में बैठे पांच आरोपितों को रेलबाजार के अजय यादव लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर चौराहे पर ले गए थे।

    चालक अजय के अनुसार, वे लोग बातचीत के दौरान दमन दीव के ट्रिप की बात कर रहे थे। वहीं, जांच में आया कि आरोपितों ने फ्लाइट की भी बुकिंग की थी। उधर, आहूजा व प्रिया हास्पिटल का लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। बताया गया कि आरोपितों ने आयुष को अमिताभ बच्चन की एक किडनी न होने और प्रेमानंद महाराज की किडनी खराब होने की जानकारी देते हुए कई वीडियो दिखा ब्रेनवाश किया था।

    कहा था कि किसी तरह की समस्या नहीं होगी। हालांकि, डीसीपी पश्चिम इसकी पुष्टि नहीं कर रहे हैं। डीसीपी ने बताया कि अन्य आरोपितों की तलाश की जा रही है। उधर, आयुष ने पुलिस को बताया था कि वह देहरादून के ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय से एमबीए कर रहा है, लेकिन विश्वविद्यालय के डॉ. सुभाष गुप्ता ने बताया कि बिहार के आयुष नाम का कोई छात्र ग्राफिक एरा डीम्ड विश्वविद्यालय या ग्राफिक एरा हिल विश्वविद्यालय से एमबीए नहीं कर रहा है। पुलिस अब इसकी भी जांच कर रही है।

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