किडनी ट्रांसप्लांट के 'खेल' में चार और डॉक्टरों की तलाश, लखनऊ से दिल्ली तक फैला नेटवर्क; रडार पर 50 अस्पताल
कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट मामले में पुलिस चार वांछित डॉक्टरों की तलाश कर रही है, जिनमें डॉ. अफजल और डॉ. रोहित शामिल हैं। ...और पढ़ें

ये तस्वीर AI द्वारा जनरेट की गई है।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, कानपुर। किडनी खरीदने-बेचने और अवैध ट्रांसप्लांट के मामले में वांछित लखनऊ और मेरठ के चार डाक्टरों की तलाश में पुलिस जुटी है। पुलिस टीम मेरठ, नोएडा और दिल्ली पहुंच गई है।
आरोपित देश से बाहर न जा सकें, इसके लिए लुकआउट नोटिस जारी कराने की तैयारी है। बुधवार को सामने आया है कि किडनी बेचने वाले आयुष का संपर्क सबसे पहले साइबर ठग बताए जा रहे अली नाम के व्यक्ति से हुआ था। उसने ही आयुष को टेलीग्राम ग्रुप से जोड़ा था।
उसके बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। यह भी पता चला है कि मामले का प्रमुख सूत्रधार मेरठ का डा. अफजल लखनऊ के डा. रोहित के जरिये कानपुर, मेरठ, लखनऊ, नोएडा और दिल्ली में अब तक सैकड़ों किडनी ट्रांसप्लांट करवा चुका है।
शहर के 50 अस्पताल जांच के घेरे में हैं और पुलिस व स्वास्थ्य विभाग की टीम छानबीन कर रही है। आरोपितों की काल डिटेल रिपोर्ट (सीडीआर) निकलवाई जा रही है।
लखनऊ की क्राइम ब्रांच ने गुरुवार को जीएसवीएस पीजीआइ में भर्ती आयुष से पूछताछ की। आयुष की महिला मित्र भी बिहार से उससे मिलने पहुंची। डाक्टरों के अनुसार आयुष और किडनी प्राप्त करने वाली महिला दोनों स्वस्थ हैं।
यह भी पढ़ें- टेलीग्राम ग्रुप पर डोनर-मरीज ढूंढ डॉक्टर चला रहे किडनी का काला कारोबार, 5 लाख में खरीदकर एक करोड़ में करते थे सौदा
शहर में सिर्फ एक अस्पताल के पास किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति है, लेकिन कल्याणपुर के आहूजा अस्पताल में अवैध तरीके से ट्रांसप्लांट का मामला सामने आया। रविवार रात यहां मुजफ्फरनगर निवासी पारुल का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था।
इसके लिए बिहार के बेगूसराय निवासी और देहरादून के ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय से एमबीए अंतिम वर्ष के छात्र आयुष ने किडनी बेची थी। मामले में कल्याणपुर के ही प्रिया हास्पिटल, मेड लाइफ और बंद हो चुके आरोही अस्पताल की भूमिका भी सामने आई।
पुलिस ने सोमवार को छापेमारी कर आहूजा अस्पताल के संचालक डा. सुरजीत सिंह आहूजा, उनकी पत्नी व इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) कानपुर की उपाध्यक्ष डा. प्रीति आहूजा, दलाल शिवम अग्रवाल, मेड लाइफ हास्पिटल के संचालक राम प्रकाश व साझेदार राजेश कुमार, प्रिया हास्पिटल के संचालक नरेन्द्र सिंह को गिरफ्तार किया था। जबकि लखनऊ के डा. रोहित उर्फ राहुल, मेरठ के डा. अफजल, डा. अनुराग उर्फ अमित, डा. वैभव मुद्गल की तलाश की जा रही है।
खबरें और भी
जांच में सामने आया था कि टेलीग्राम ग्रुप बनाकर किडनी खरीदने-बेचने का काला कारोबार चल रहा था। बेचने वाले को चार से पांच लाख रुपये दिए जाते थे, जबकि खरीदने वाले से 60 लाख से एक करोड़ रुपये तक लिए जाते थे।
इस मामले में पुलिस का दावा है कि टेलीग्राम ग्रुप के जरिये ही दलाल शिवम और किडनी बेचने वाले आयुष के बीच संपर्क हुआ और नौ लाख रुपये में सौदा हुआ था। मेरठ के अल्फा अस्पताल से जुड़े डा. अफजल ने भी आयुष से संपर्क किया और सौदा तय होने पर पारुल को कानपुर लाया गया। आयुष के खाते में सिर्फ साढ़े तीन लाख रुपये पहुंचे तो विवाद पुलिस तक पहुंचा।
यह भी पढ़ें- कानपुर किडनी कांड: आयुष और पारुल को उच्च इलाज के लिए लखनऊ रेफर, होगी बेहतर देखभाल
हालांकि आयुष को देने के नाम पर मरीज से 15 लाख रुपये लिए गए थे। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि वांछित डाक्टरों की तलाश में टीमें लगी हैं। इस पूरे घटनाक्रम में अभी कई सवाल अनसुलझे हैं।
पुलिस का दावा है कि उसे पहले से जानकारी थी, लेकिन आयुष अस्पताल में था तो उसे किसने बताया? पुलिस यह भी स्पष्ट नहीं कर रही कि दिल्ली के किस अस्पताल से डाक्टर आते थे? किडनी के एवज में मरीज से कुल कितने रुपये लिए थे?आयुष के किडनी बेचने का वास्तविक कारण भी अब तक स्पष्ट नहीं है।