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Janmashtami 2026: ब्रज में खुशी छाई, कान्हा के जन्म की बधाई... कृष्ण जन्माष्टमी का अद्भुत उल्लास

By Avadhesh MaheshwariEdited By: Abhishek Saxena
Published: Sat, 05 Sep 2026 08:25 AM (IST)

Janmashtami 2026: ब्रज में कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है, जहां हर घर मंदिर बना है ...और पढ़ें

मथुरा में शुक्रवार को कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर पूजा-अर्चना करने के लिए श्रद्धालु रोशनी से जगमगाते श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में जुटे। प्रेट्र।

मथुरा में शुक्रवार को कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर पूजा-अर्चना करने के लिए श्रद्धालु रोशनी से जगमगाते श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में जुटे। प्रेट्र।

HighLights

  1. ब्रज में कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव धूमधाम से मनाया गया

  2. आधी रात को कान्हा के जन्म से खुशियां छा गईं

  3. मथुरा में हर घर मंदिर बना, भक्तिमय माहौल

अवधेश माहेश्वरी, मथुरा। Janmashtami 2026: कृष्ण वह चेतना हैं, जिससे हर पात्र जन्म लेता है। सांवरे होकर भी वह प्रकाश से पहले की छाया हैं। ग्वालवालों के साथ शोर मचाने वाले नंदलाल होकर भी नाद से पहले का मौन हैं। वही पूतना का वध करने वाली महामाया हैं। उनके आगमन पर जगभर में खुशियों की छाया है।

कृष्ण तुम्हारे आगमन को इतने बरस तो बीत गए। फिर भी मन कहां भरता है। यह ब्रज तो तुमको ही जीता है। तुमने ही इसका मन जीता है। इसीलिए हर साल भादों में तुम्हारे आगमन की तैयारी होती हैं। ये मतवारे गोपाल, तुम्हारी यादों में खोई राधा।

हर मैया यहां तुम्हें अपने लल्ला की तरह याद करती है। लो, अष्टमी की आधी रात गहरा गई। यमुना उफन रही है। अरे, रात के 12 बज गए। लो, कन्हैया फिर आ गए। कंस के कारागार में पहरेदारों सो गए। देवकी की कोख से अजन्मे ने जन्म ले लिया। इसके साथ ही शंख बजने लगे। सजे-धजे ब्रज की छटा शुक्रवार को अद्भुत है। ऐसा लग रहा कि सारा सौंदर्य यहीं समा गया है। भादों की हरियाली इसके सिंगार को और बढ़ा रही है। माटी की सौंधी-सौंधी सुगंध इत्र को भी पीछे छोड़ रही है।

कान्हा का जन्मोत्सव मनाने के लिए सजे-धजे ब्रज की छटा अद्भुत

कान्हा का जन्मोत्सव है, हर कोई तो जैसे ब्रज की ओर खिंचा चला आ रहा है। मैं शुक्रवार दोपहर से ब्रज की गलियों में घूम रहा हूं। हर घर मंदिर बना है, रोशनी से सजा है। जिससे भी मिलो, बस कन्हैया की बातें हैं। यहां के कण-कण में तो उनकी महक है। यहां की हवा जो सन-सन करती बह रही है। उसकी आवाज ध्यान से सुनो, उसमें बांसुरी की धुन बह रही है।

यह सब देख लगता है कि कभी तो किसी रूप में गोपाल से मुलाकात होगी। एक बच्चा कान्हा स्वरूप में सजा दिखाई देता है। वह मां के साथ हरियाणा से आया है। कान्हा की तरह बांसुरी पसंद है।

जन्मभूमि पर पूरा भारत समाया 

जन्मभूमि के द्वार पर तो, क्या पूरब और क्या पश्चिम पूरा भारत यहां समाया है। क्यों न हो, कृष्ण इस देश की संस्कृति के नायक हैं। यही वह नाम है जिस पर उत्तर से दक्षिण तक समान रूप से सिर नभते हैं। देश में नजर डालो निधिवन में राधिका संग रास रचाते, गोकुल में माखन चोरी से खाते। कहीं सखा, कहीं सारथी, कहीं गोविंदा, कहीं गोपाला, कहीं द्वारकाधीश बन भक्तों को देते आशीष।

मथुरा में हर घर बना मंदिर, लोगों की जुबां पर बस कन्हैया की बातें

मथुरा के विश्राम घाट पर ब्रज बांकुरे के इंतजार में कृष्णप्रिया एक फाट से दूसरे तक आंखें लगाए बैठी हैं। शायद सोच रही हैं कि वो आएं तो, पैर पखारूं। यहां गुजरात के श्रवण भाई स्नान कर रहे हैं। कहते हैं कि ब्रज में आकर जीवन धन्य हो गया। यमुना दर्शन और आचमन का अवसर मिल गया। कृष्ण तो द्वारिका पहुंच गए थे, परंतु पटरानी यमुना तो यहीं रह गईं। इनके दर्शन बिना एक अधूरापन लगता था।

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