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    यूपी में मत्स्य विकास निधि से बनेंगे सामुदायिक भवन और मछली मार्केट, विभाग ने जारी की गाइडलाइन

    Updated: Tue, 21 Apr 2026 10:23 PM (IST)

    उत्तर प्रदेश में मत्स्य विकास निधि का उपयोग अब मत्स्य पालकों के लिए सुविधाएं बनाने पर किया जाएगा। इसके तहत सामुदायिक भवन, मछली बाजार और अन्य अवसंरचनात ...और पढ़ें

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    राज्य ब्यूरो, लखनऊ। मत्स्य विकास निधि को अब मत्स्य पालकों के लिए सुविधाओं के निर्माण पर खर्च किया जाएगा। सामुदायिक भवन, मत्स्य बाजार आदि बनाए जाएंगे। मत्स्य विभाग ने निधि के उपयोग के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं और जिला स्तर पर प्रस्ताव तैयार कराने के लिए कहा है।

    नदियों में मत्स्य आखेट पट्टा और नीलामी से मिलने वाली धनराशि को मत्स्य विकास निधि के खाते में जमा किया जाता है। अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार मत्स्य विकास कार्यक्रमों में निधि का उपयोग डीएम की अध्यक्ष में गठित जिला स्तरीय समिति के अनुमोदन से किया जाएगा।

    समिति में सीडीओ, मुख्य कोषाधिकारी-वरिष्ठ कोषाधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा विभाग के जिला स्तरीय अभियंता, जिला स्तरीय मत्स्य अधिकारी सदस्य होंगे। समिति द्वारा वार्षिक कार्य योजना का अनुमोदन किया जाएगा। अवसंरचना संबंधी कार्याें के लिए स्थल चयन, कार्यदायी संस्था का चयन, लाभार्थियों का चयन और निगरानी का जिम्मा समिति का होगा।

    समिति की बैठक के लिए अध्यक्ष को छोड़कर कम से कम तीन सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होगी और हर छह माह में एक बार अनिवार्य रूप से बैठक की जाएगी।

    निधि से सामुदायिक भवन का निर्माण, मत्स्य विभाग के प्रक्षेत्रों एवं जलाशयों का पुनर्विकास, मत्स्य विपणन के लिए बाजार एवं दुकान की अवस्थापना, मत्स्य बाजार में मूलभूत सुविधाओं का विकास, फिश लैंडिंग सेंटर की स्थापना, मत्स्य पालकों के लिए नवीन तकनीकों से संबंधित प्रशिक्षण-भ्रमण कार्यक्रम के लिए व्यवस्था की जाएगी

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    इसके साथ ही, प्रचार-प्रसार एवं प्रशासनिक व्यय, मत्स्य बीज उत्पादन के लिए बीज हैचरी, ब्रूड बैंक की स्थापना आदि कार्य कराए जा सकेंगे। मत्स्य आखेट के पर्यवेक्षण, निरीक्षण व सुरक्षा के लिए मोटर बोट, लाइफ जैकेट आदि की व्यवस्था भी निधि से की जा सकेगी।

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