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    SGPGI Lucknow ने किडनी प्रत्यारोपण में बनाया रिकार्ड, प्रदेश के दूसरे मेडिकल कालेजों में भी मिली सुविधा

    By Sanjay Kumar Dwivedi Edited By: Dharmendra Pandey
    Updated: Sat, 16 May 2026 07:53 PM (IST)

    SGPGI Lucknow: संस्थान के स्थापना दिवस समारोह में प्रोफेसर नारायण प्रसाद ने बताया कि संस्थान लगातार अंगदान को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान चला र ...और पढ़ें

    संजय गांधी पीजीआई

    संजय गांधी पीजीआई

    HighLights

    1. एसजीपीजीआई के नेफ्रोलाजी विभाग का स्थापना दिवस समारोह

    2. वर्ष 2026 में अब तक 178 का किडनी प्रत्यारोपण

    3. कुछ मेडिकल कालेजों में शुरू होगी किडनी प्रत्यारोपण सेवा

    4. यूपी के मेडिकल कई कालेजों में प्रत्यारोपण को मिल चुकी है मंजूरी

    जागरण संवाददाता, लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई के नेफ्रोलाजी विभाग ने किडनी प्रत्यारोपण के क्षेत्र में यूरोलाजी विभाग के साथ मिलकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। संस्थान में इस वर्ष अब तक 178 मरीजों का सफल किडनी प्रत्यारोपण किया जा चुका है, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है।

    विभाग ने इस वर्ष 250 प्रत्यारोपण का लक्ष्य रखा है। संस्थान के स्थापना दिवस समारोह में शनिवार को विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नारायण प्रसाद, प्रोफेसर अनुपम कौल और प्रोफेसर रविशंकर कुशवाहा ने बताया कि संस्थान अब केवल लखनऊ तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में किडनी प्रत्यारोपण सेवाओं का नेटवर्क तैयार करने में जुटा है। संस्थान अन्य मेडिकल कॉलेजों और सरकारी संस्थानों को तकनीकी व चिकित्सकीय सहयोग देकर वहां किडनी प्रत्यारोपण सुविधा शुरू कराने में मदद कर रहा है।

    बचाई जा सकती है किडनी

    विशेषज्ञों ने बताया कि किडनी की कई बीमारियां ऐसी होती हैं जिन्हें शुरुआती अवस्था में पहचानकर नियंत्रित किया जा सकता है। यदि किसी मरीज में माइक्रो एल्ब्यूमिन यूरिया 30 से 300 मिलीग्राम तक पाया जाता है तो “फोर्थ पिलर थेरेपी” के जरिए किडनी को खराब होने से काफी हद तक बचाया जा सकता है। डॉक्टरों के अनुसार समय रहते इलाज शुरू होने पर मरीज को लंबे समय तक डायलिसिस और किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत से बचाया जा सकता है।

    मेडिकल कालेजों तक पहुंच रही विशेषज्ञता

    विशेषज्ञों ने बताया कि संस्थान की टीम ने किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में किडनी प्रत्यारोपण सेवाएं शुरू कराने में अहम भूमिका निभाई है। इसके अलावा मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज प्रयागराज में भी प्रत्यारोपण सेवाओं की शुरुआत कराई गई है वहीं महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज झांसी, सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज आगरा और गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कालेज कानपुर को भी प्रत्यारोपण की अनुमति मिल चुकी है। उपयुक्त दाता और मरीज मिलने के बाद इन संस्थानों में भी प्रत्यारोपण सेवाएं शुरू हो जाएंगी। प्रोफेसर रविशंकर कुशवाहा ने बताया कि केवल केजीएमयू में ही संस्थान की टीम के सहयोग से 19 किडनी प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में यह सुविधा उपलब्ध होने से मरीजों को लंबे इंतजार से राहत मिलेगी और इलाज के लिए बड़े शहरों की दौड़ भी कम होगी।

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    अंगदान बढ़ने से कैडेवर प्रत्यारोपण को मिली रफ्तार

    प्रोफेसर नारायण प्रसाद ने बताया कि संस्थान लगातार अंगदान को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है। इसी प्रयास का परिणाम है कि इस वर्ष चार मृत देहदाता किडनी प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं उन्होंने कहा कि संस्थान के विभिन्न विभागों के बेहतर समन्वय के कारण हृदय प्रत्यारोपण भी संभव हो पाया है। अंगदान की प्रक्रिया मजबूत होने से भविष्य में किडनी, हृदय और अन्य अंग प्रत्यारोपण सेवाओं को और गति मिलने की उम्मीद है।

    डायलिसिस सेवाओं का भी बड़ा विस्तार

    संस्थान में किडनी मरीजों के लिए डायलिसिस सेवाओं का तेजी से विस्तार किया गया है। पहले प्रतिदिन 120 से 125 मरीजों की डायलिसिस होती थी, जो अब बढ़कर लगभग 250 मरीज प्रतिदिन पहुंच गई है। इसके लिए रीनल ट्रांसप्लांट सेंटर में चार समर्पित डायलिसिस वार्ड स्थापित किए गए हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुविधाओं और मानव संसाधनों दोनों का विस्तार किया जा रहा है, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।

    इमरजेंसी के लिए विशेष व्यवस्था

    संस्थान में फॉलोअप पर चल रहे किडनी मरीजों के लिए विशेष आपातकालीन व्यवस्था बनाई गई है। यदि किसी मरीज की हालत गंभीर होती है तो पहले उसे इमरजेंसी में बेड देने की कोशिश की जाती है यदि इमरजेंसी में बेड उपलब्ध नहीं होता तो मरीज या उसके परिजनों को हर सुबह रीनल ट्रांसप्लांट सेंटर की तीसरी मंजिल पर बुलाया जाता है। यहां सभी यूनिट के विशेषज्ञ चिकित्सक राउंड के बाद खाली हुए बेड और मरीज की गंभीरता का आकलन करते हैं। जिन मरीजों की स्थिति अधिक गंभीर होती है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर भर्ती किया जाता है। वहीं जिन मरीजों की स्थिति दवाओं और सलाह से नियंत्रित हो सकती है, उन्हें जरूरी दवाएं और चिकित्सकीय सलाह देकर घर भेज दिया जाता है।

    प्रदेश में जरूरत ज्यादा, प्रत्यारोपण कम

    प्रोफेसर अनुपम कौल ने बताया कि उत्तर प्रदेश में हर वर्ष लगभग 50 हजार मरीजों को किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है, लेकिन पूरे प्रदेश में केवल 500 से 700 प्रत्यारोपण ही हो पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बड़े अंतर को कम करने के लिए अंगदान को जनआंदोलन बनाना होगा। साथ ही प्रदेश में अधिक से अधिक किडनी प्रत्यारोपण केंद्र स्थापित करने की जरूरत है, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।

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    स्थापित हो एडवांस रीनल डिजीज इंस्टीट्यूट

    प्रोफेसर एसएन शंखवार ने कहा कि 30 वर्ष पहले बने गुजरात के इंस्टिट्यूट ऑफ़ किडनी डिजीज एंड रिसर्च सेंटर की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी उन्नत वृक्क रोग एवं अनुसंधान केंद्र स्थापित किया जाना चाहिए उन्होंने सुझाव दिया कि संस्थान के इमरजेंसी मेडिसिन एंड रीनल ट्रांसप्लांट सेंटर से इमरजेंसी सेवाओं को अन्य स्थान पर शिफ्ट कर इसे पूर्ण विकसित रीनल इंस्टीट्यूट के रूप में विकसित किया जा सकता है।

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    उन्होंने कहा कि नेफ्रोलॉजी विभाग प्रदेश का अग्रणी विभाग बन चुका है और इसके प्रमुख प्रोफेसर नारायण प्रसाद पूरे प्रदेश में किडनी मरीजों के लिए महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं उनका कहना था कि यदि यह इंस्टीट्यूट स्थापित होता है तो प्रदेश के लाखों किडनी मरीजों को एक ही स्थान पर आधुनिक उपचार, प्रत्यारोपण और शोध सुविधाएं मिल सकेंगी।

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    वर्ष 2026 की प्रमुख उपलब्धियां

    178 सफल किडनी प्रत्यारोपण
    250 प्रत्यारोपण का लक्ष्य
    चार मृत देहदाता की किडनी का प्रत्यारोपण
    प्रतिदिन 250 मरीजों की डायलिसिस
    चार समर्पित डायलिसिस वार्ड