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    पिगटेल कैथेटर तकनीक से एंजियोग्राफी होगी सुरक्षित, नसों की सुरक्षा और बाकी जटिलताएं होंगी कम

    By Sanjay Kumar Dwivedi Edited By: Dharmendra Pandey
    Updated: Sun, 10 May 2026 06:54 PM (IST)

    SGPGI Doctors Research: एंजियोग्राफी-एंजियोप्लास्टी के दौरान नसों में जटिलताओं में कमी विषय पर शोध को इंडियन हार्ट जर्नल ने मान्यता दी है। ...और पढ़ें

    संजय गांधी परास्नातक आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ

    संजय गांधी परास्नातक आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ

    HighLights

    1. संजय गांधी परास्नातक आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के विशेषज्ञों ने किया शोध

    2. समस्याओं को आधे से भी ज्यादा कम कर देती है पिगटेल असिस्टेड ट्रैकिंग

    3. शोध को इंडियन हार्ट जर्नल ने भी दे दी मान्यता

    कुमार संजय, लखनऊ। दिल की बीमारियों में एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी आम प्रक्रियाएं हैं, लेकिन इस दौरान हाथ की नसों का चोटिल होने में चोट (इंजरी) होना आम समस्या रही है। अक्सर गाइड कैथेटर की नुकीली टिप से नसों में रेजर ब्लेड इफेक्ट बनता है, जिससे नस में ऐंठन, चोट, सूजन और ब्लाकेज जैसी जटिलताएं हो सकती हैं।

    संजय गांधी परास्नातक आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआईएमएस) के कार्डियोलाजी विभाग के विशेषज्ञों ने शोध में पाया गया कि पिगटेल असिस्टेड ट्रैकिंग (पीएटी) तकनीक इन समस्याओं को आधे से भी ज्यादा कम कर देती है।

    विशेषज्ञों ने 260 मरीजों पर अध्ययन किया। मरीजों को दो समूहों में बांटा गया। एक समूह में पीएटी तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जबकि दूसरे में पारंपरिक गाइड कैथेटर। परिणाम बताते हैं कि पीएटी तकनीक वाले समूह में हाथ की नसों में जटिलताएं केवल 11.5 प्रतिशत थीं, जबकि पारंपरिक कैथेटर में यह 25.4 प्रतिशत थी।

    क्या होता है पिगटेल

    मुख्य शोधार्थी प्रो. नवीन गर्ग के मुताबिक पिगटेल कैथेटर एक पतली और लचीली नली होती है, जिसका सिरा गोल और घुमावदार (पिगटेल) होता है। इसे गाइड कैथेटर के अंदर डाला जाता है। इसका गोल सिरा नस के अंदर सुरक्षित रहता है, घर्षण और चोट का जोखिम कम करता है और ब्लाकेज हटाने में मदद करता है। पारंपरिक कैथेटर की तुलना में यह मरीजों के लिए अधिक आरामदायक होता है। तकनीकी अंतर की बात करें तो पिगटेल कैथेटर की गोल टिप नसों को सुरक्षित रखती है, जबकि साधारण कैथेटर की नुकीली सीधी टिप नसों में चोट का खतरा बढ़ा देती है। लागत की दृष्टि से पिगटेल कैथेटर का खर्च डेढ़ से तीन हजार तक अतिरिक्त खर्च आता है, जबकि साधारण कैथेटर दो से पांच हजार के बीच उपलब्ध है।

    इन्होंने किया शोध

    संजय गांधी परास्नातक आयुर्विज्ञान संस्थान के प्रो. नवीन गर्ग, डॉ. मुकेश कुमार यादव, प्रो. आदित्य कपूर, प्रो. सतेंद्र तिवारी, प्रो. रूपाली खन्ना, प्रो. अंकित साहू, डा. हर्षित खरे, डॉ. अर्पिता कथेरिया, डॉ. अरशद नजीर ने पीएटी तकनीक की सुरक्षा और प्रभावशीलता का मूल्यांकन और एंजियोग्राफी-एंजियोप्लास्टी के दौरान नसों में जटिलताओं में कमी विषय पर शोध किया, जिसे इंडियन हार्ट जर्नल ने मान्यता दी है।

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