यूपी के पहले सफल हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को अस्पताल से मिली छुट्टी, डिप्टी सीएम ने डॉक्टरों को सराहा
संजय गांधी पीजीआई में उत्तर प्रदेश के पहले सफल हृदय प्रत्यारोपण के बाद मरीज रचना को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। ...और पढ़ें
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हृदय प्रत्यारोपित महिला के साथ विभाग के विशेषज्ञ एवं स्टाफ की टीम

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई में उत्तर प्रदेश के पहले सफल हृदय प्रत्यारोपण के बाद मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ होकर नई जिंदगी की ओर बढ़ रही है।
शनिवार को 43 वर्षीय रचना को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। यह वही मरीज हैं, जिनका 12 अप्रैल को दिल्ली से लाए गए दाता हृदय से सफल ट्रांसप्लांट किया गया था। सीतापुर निवासी रचना लंबे समय से डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी के कारण गंभीर हार्ट फेल्योर से जूझ रही थीं।
उनकी हालत इतनी गंभीर हो गई थी कि प्रत्यारोपण ही अंतिम विकल्प बचा था। अब सर्जरी के बाद वह न केवल सामान्य बातचीत कर पा रही हैं, बल्कि बिना सहारे चलने में भी सक्षम हैं।
एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. आरके धीमान के मुताबिक, समयबद्ध समन्वय ही इस प्रत्यारोपण की सबसे बड़ी सफलता रही। दिल्ली से एयर एम्बुलेंस के जरिए हृदय लाया गया और लखनऊ में ग्रीन कारिडोर बनाकर उसे समय पर संस्थान पहुंचाया गया।
सम्मान समारोह में गूंजा सेवा का संदेश
मरीज को अस्पताल से छुट्टी के दौरान डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने एसजीपीजीआई पहुंचकर डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल चिकित्सा क्षेत्र की सफलता नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का श्रेष्ठ उदाहरण है।
मरीज के पति अजय अग्निहोत्री ने भावुक होकर कहा कि डॉक्टरों ने उनकी पत्नी को 'दूसरा जन्म' दिया है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान जब डिप्टी सीएम ने मरीज से बातचीत की तो वह भावुक होकर केवल हाथ जोड़कर आभार व्यक्त कर सकीं। इस ट्रांसप्लांट की एक खास बात यह भी रही कि मरीज का परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर था।
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पति मात्र चार हजार रुपये लेकर अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन संस्थान ने मानवता का परिचय देते हुए पूरा इलाज अपने स्तर पर कराया। सीवीटीएस विभागाध्यक्ष प्रो. एसके अग्रवाल के अनुसार, पूरे ट्रांसप्लांट में करीब 15 लाख रुपये खर्च हुए, जिसमें लगभग नौ लाख रुपये एयर एम्बुलेंस और छह लाख रुपये सर्जरी पर खर्च हुए। निदेशक प्रो. आरके धीमान की पहल पर महिला को नया जीवन मिला।
अब अगला लक्ष्य लंग ट्रांसप्लांट
प्रो. आरके धीमान ने बताया कि संस्थान अब लंग ट्रांसप्लांट की दिशा में भी तेजी से काम कर रहा है। हार्ट ट्रांसप्लांट की सफलता ने प्रदेश में बहु-अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम को नई गति दी है और भविष्य में और मरीजों को इसका लाभ मिलेगा। यह उपलब्धि न केवल एक मरीज को नई जिंदगी देने की कहानी है, बल्कि उत्तर प्रदेश को उन्नत चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने वाला मील का पत्थर भी है।
इन्हें किया सम्मानित
- सीवीटीएस (कार्डियोवैस्कुलर एंड थोरैसिक सर्जरी)
- प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, लीड सर्जन – प्रो. एसके अग्रवाल
- प्रोफेसर- प्रो. शांतनु पांडे
- पूर्व प्रोफेसर (एम्स नई दिल्ली)- प्रो. मिलिंद होते
- कार्डियक सर्जन- डॉ. विजय अग्रवाल
- असिस्टेंट प्रोफेसर- डॉ. अब्दुल मुनज़िल मुंशी
- असिस्टेंट प्रोफेसर- डॉ. सिद्धार्थ वी. सिंह सोम
- पीडीएफ- डॉ. अरीब अहमद खान
- सीनियर रेजिडेंट- डॉ. अवनिंद्र एम. त्रिपाठी
- सीनियर रेजिडेंट- डॉ. सौरभ त्रिपाठी
- सीनियर रेजिडेंट- डॉ. विवेक कृष्णा
- सीनियर रेजिडेंट- डॉ. हर्ष बी. वैद्य
कार्डियोलॉजी
प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, लीड कार्डियोलाजिस्ट- प्रो. आदित्य कपूर
प्रो. प्रो. सत्येंद्र तिवारी, प्रो. रूपाली खन्ना व एडिशनल प्रो. डॉ. अंकित साहू
एनेस्थीसिया
प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष- प्रो. संजय धीरज
प्रोफेसर, लीड एनेस्थीसियोलाजिस्ट एवं इंटेंसिविस्ट- प्रो. पुनीत गोयल व अन्य
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