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रायबरेली नामांतरण मामले में 8 साल की देरी, हाई कोर्ट ने बार एसोसिएशन और नायब तहसीलदार को फटकारा

Published: Wed, 09 Sep 2026 10:00 AM (IST)

लखनऊ हाई कोर्ट ने रायबरेली के सलोन तहसील में आठ साल से अधिक समय से लंबित नामांतरण वाद पर कड़ा ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

सांकेतिक तस्वीर।

HighLights

  1. रायबरेली नामांतरण वाद 8 साल से अधिक लंबित

  2. हाई कोर्ट ने बार एसोसिएशन को पक्षकार बनाया

  3. नायब तहसीलदार से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा गया

विधि संवाददाता, जागरण, लखनऊ। रायबरेली की तहसील सलोन में नामांतरण का एक वाद आठ वर्ष से अधिक समय से लंबित रहने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। 18 जुलाई 2018 को शुरू हुआ यह वाद 24 अगस्त 2026 तक करीब 190 तारीखों पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुआ, लेकिन अंतिम आदेश नहीं हो सका।

कोर्ट ने बार एसोसिएशन, तहसील सलोन को आवश्यक पक्षकार बनाकर अगली सुनवाई पर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।

मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने रेशमा व अन्य की याचिका पर यह आदेश दिया।

190 तारीखों के बाद भी नामांतरण वाद लंबित

याचिकाकर्ताओं ने वर्ष 2018 से लंबित नामांतरण वाद का शीघ्र निस्तारण कराने की मांग की थी। उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 34 के तहत दाखिल वाद में अब तक अंतिम आदेश नहीं हुआ। कोर्ट ने ऑर्डरशीट का अवलोकन किया तो पाया कि 18 जुलाई 2018 से 24 अगस्त 2026 के बीच करीब 190 बार सुनवाई के लिए तारीख लगी। इनमें 26 अवसरों पर पीठासीन अधिकारी के प्रशासनिक कार्य, 16 अवसरों पर कोविड-19 महामारी और 127 अवसरों पर बार एसोसिएशन के अनुरोध पर स्थगन हुआ।

हाई कोर्ट ने बार एसोसिएशन से पक्ष रखने को कहा

राज्य सरकार की ओर से स्टैंडिंग काउंसिल अनुराग कुमार मौर्य ने बताया कि राजस्व संहिता नियमावली के नियम 34(7) के अनुसार निर्विवाद नामांतरण वाद सामान्यतः 45 दिन और विवादित वाद 90 दिन में निस्तारित किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि आठ वर्ष से अधिक समय तक वाद लंबित रहना और 127 बार स्थगन होना अनावश्यक देरी का कारण बना। राजस्व वादों का इस तरह लंबे समय तक लंबित रहना राजस्व संहिता के उद्देश्यों के अनुरूप नहीं है।

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नायब तहसीलदार से व्यक्तिगत हलफनामा देने के निर्देश

कोर्ट ने नायब तहसीलदार से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि बार एसोसिएशन के अनुरोध पर बार-बार स्थगन क्यों दिया गया और आर्डरशीट में उसके कारण दर्ज क्यों नहीं किए गए। साथ ही निर्धारित समयसीमा में वाद का निस्तारण न होने की वजह भी बताने का निर्देश दिया है।