PM मत्स्य संपदा योजना: कुशीनगर में पांच सालों में बढ़ा 7000 टन मछली का उत्पादन, 30 हजार लोगों को रोजगार
कुशीनगर में पीएम मत्स्य संपदा योजना और अन्य सरकारी योजनाओं से मत्स्य पालन कारोबार को नई ऊँचाई मिली है। पिछले ...और पढ़ें

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HighLights
कुशीनगर में पांच वर्षों में 7000 टन मछली उत्पादन बढ़ा।
मत्स्य पालन से 30 हजार लोगों को मिला स्थायी रोजगार।
पीएम मत्स्य संपदा योजना ने कारोबार को दी नई दिशा।
मुन्ना सिंह, पडरौना, (कुशीनगर)। वर्ष 2015 से 2020 तक चलाई गई नीली क्रांति योजना ने कुशीनगर में मत्स्य पालन कारोबार को ठांव दिया तो उसके बाद शुरू हुई प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना व मुख्यमंत्री मत्स्य पालन योजना कारोबार को ऊंचाई दे रही है। शासन की योजना का लाभ लेकर जनपद के 3100 मत्स्य पालकों ने रोजगार का बाजार खड़ा किया है और अपने परिवार के लिए समृद्धि के द्वार खोले हैं। पिछले पांच वर्षों में जनपद में 7000 टन मछली का उत्पादन बढ़ा है तो लगभग 30 हजार लोगों को रोजगार भी मिला है। इससे स्वावलंबन व रोजगार की राह मजबूत हो रही है।
कुशीनगर में 2625 तालाबों में मत्स्य पालन कारोबार संचालित किया जा रहा है, इससे 3100 मत्स्य पालक जुड़े हुए हैं। जनपद की मांग को पूरा करने के साथ ही यहां की मछलियां गोरखपुर व बिहार की मंडियों में भी भेजी जा रही हैं। जनपद में 2021 में 24568 टन, 2022 में 26785 टन, 2023 में 28800 टन, 2024 में 30100 टन और 2025 में 31500 टन मछली का उत्पादन हुआ है।
यहां की रोहू व कतला प्रजाति की मछलियों की मांग बाहर की मंडियों में अधिक है। मुख्यमंत्री मत्स्य पालन योजना में तालाब की खोदाई, मछली के बीज और दाना पर सरकार की ओर से अनुदान दिया जाता है।
भूमि मत्स्य पालक की निजी हो या सात से 10 वर्षों तक का रजिस्टर्ड पट्टा होना चाहिए। अनुसूचित जाति, जनजाति व महिला मत्स्य पालकों को 60 और अन्य श्रेणी के पालकों को 40 प्रतिशत अनुदान मिलता है। इसके अलावा सघन मत्स्य पालन के लिए एरेशन सिस्टम स्थापित करने, उत्तर प्रदेश मत्स्य पालक कल्याण कोष से मोपेड विद आइस बाक्स, विशिष्ट प्रजाति की मत्स्य हेचरी स्थापना के लिए भी सरकार अनुदान देती है।
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इसका लाभ लेकर जनपद के मत्स्य पालक रोजगार का सृजन कर रहे हैं। एक तालाब की बात की जाए तो मत्स्य पालक के परिवार के सदस्यों के अलावा तीन-चार दैनिक मजदूर व छह-सात मछली बेचने वालों को रोजगार मिल रहा है। जनपद में 2625 तालाबों के हिसाब से लगभग 30 हजार लोगों को इस कारोबार से रोजगार मिल रहा है। यहां रोहू, कतला, नैनी, कामन कार्प, सिल्वर, सिल्वर, बिगगेड, ग्रास, पंगेसियस (बैकर), रूप चंदा समेत अन्य प्रजाति की मछलियों का पालन हो रहा है।
