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गोरखपुर में 13 साल का इलाज, फिर एक रात में 'दिमाग' दिखा गए 4 युवक; आश्रय गृह से गायब होने की पूरी इनसाइड स्टोरी

Published: Wed, 02 Sep 2026 09:27 AM (IST)

गोरखपुर के राजकीय मानसिक मंदित आश्रय गृह से चार युवक लापता हो गए हैं, जिसमें रवि नामक युवक की बौद्धिक ...और पढ़ें

चार बच्चों के भागने का मामला। नार्मल स्कूल कैंपस में स्थित राजकीय मानसिक मंदित आश्रय गृह एवं सह प्रशिक्षण केन्द्र के अंदर जाती पुलिस।-जागरण

चार बच्चों के भागने का मामला। नार्मल स्कूल कैंपस में स्थित राजकीय मानसिक मंदित आश्रय गृह एवं सह प्रशिक्षण केन्द्र के अंदर जाती पुलिस।-जागरण

HighLights

  1. गोरखपुर आश्रय गृह से चार युवक रहस्यमय ढंग से लापता।

  2. लापता रवि की बौद्धिक क्षमता में सुधार जांच का केंद्र।

  3. घटना वाली रात आठों सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग बंद।

अरुण चन्द, गोरखपुर। राजकीय मानसिक मंदित आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्र से चार युवकों के एक साथ लापता होने की घटना अब केवल सुरक्षा में चूक का मामला नहीं रह गई है। प्रारंभिक विभागीय पड़ताल में सामने आए तथ्य इस आशंका को मजबूत कर रहे हैं कि परिसर से बाहर निकलने की पूरी योजना पहले से बनाई गई हो सकती है।

जांच का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु बना है केंद्र में लगे आठ सीसी कैमरों का सिस्टम। कैमरों में रिकार्डिंग की सुविधा मौजूद है, पुरानी रिकार्डिंग भी मिली है, लेकिन जिस रात चार युवक गायब हुए, उसकी रिकार्डिंग उपलब्ध नहीं है। एक साथ सभी कैमरे घटना वाली रात बंद रहे।

यही वह तथ्य है जिसने अधिकारियों की जांच को रवि की भूमिका की ओर केंद्रित कर दिया है। करीब 22 वर्षीय रवि उन चार युवकों में शामिल है, जो आश्रय गृह से लापता हुए हैं। विभागीय अधिकारियों, केंद्र के कर्मचारियों और मनोविज्ञानी की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार रवि की मानसिक स्थिति में पिछले कुछ महीनों के दौरान पहले की तुलना में उल्लेखनीय सुधार हुआ था। वह अन्य युवकों की अपेक्षा अधिक तेजी से बातों और परिस्थितियों को समझता था तथा व्यवहार में भी काफी सक्रिय दिखाई देता था।

अधिकारियों का मानना है कि यदि चार युवकों के परिसर से निकलने की कोई योजना बनी होगी तो उसके पीछे रवि की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, यह अभी जांच का विषय है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन जांचकर्ता इस संभावना को गंभीरता से देख रहे हैं कि रवि ने परिसर की व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था और कैमरों की स्थिति को समझने के बाद बाहर निकलने की योजना बनाई हो।

आश्रय गृह परिसर में कुल आठ सीसी कैमरे लगे हैं और इनमें रिकार्डिंग की सुविधा भी है। जांच के दौरान अधिकारियों को घटना से पहले की रिकार्डिंग तो मिली, लेकिन रात के समय की रिकार्डिंग नहीं मिली। इससे दो संभावनाएं सामने आई हैं-पहली, किसी तकनीकी खराबी के कारण कैमरों या रिकार्डिंग सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया हो। दूसरी और अधिक गंभीर संभावना यह है कि रिकार्डिंग सिस्टम के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई हो।

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विभागीय अधिकारी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कैमरे वास्तव में किस समय बंद हुए, क्या केवल रिकार्डिंग प्रभावित हुई या कैमरे भी काम नहीं कर रहे थे और सिस्टम तक किसकी पहुंच थी। जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि यदि चार युवक परिसर के भीतर सामान्य गतिविधियों पर नजर रखते थे तो क्या किसी ने सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को पहले से पहचान लिया था।

रवि के संबंध में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों का कहना है कि वह पहले की तुलना में अधिक सजग और सक्रिय हो गया था। वह जानकारी को तेजी से समझता था और अच्छी पेंटिंग भी करता था। मनोविज्ञानी और युवकों की देखरेख करने वाले वार्डन भी उसकी बौद्धिक क्षमता में सुधार की बात स्वीकार करते हैं। ऐसे में जांचकर्ता इस पहलू को भी खंगाल रहे हैं कि क्या रवि ने अपने व्यवहार में आए सुधार और बेहतर समझ का इस्तेमाल अन्य तीन युवकों को साथ लेकर बाहर निकलने की योजना बनाने में किया।

लापता युवकों में रवि के अलावा आजम, सोमारू और बबलू शामिल हैं। सभी की उम्र 19 से 23 वर्ष के बीच बताई जा रही है। इन्हें करीब 13 वर्ष पहले आश्रय गृह में लाया गया था। लंबे समय तक प्रशिक्षण, देखभाल और उपचार के बाद इनमें धीरे-धीरे सुधार आया था।

48 युवकों की जिम्मेदारी, लेकिन सीमित स्टाफ के भरोसे सुरक्षा
राजकीय मानसिक मंदित आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्र में वर्तमान में कुल 48 युवक रह रहे हैं। यहां उनकी देखभाल, प्रशिक्षण और व्यावहारिक विकास के लिए व्यवस्था की गई है। केंद्र में अधीक्षक रविकांत पांडेय के अलावा एक नर्स, वार्डन और तीन अनुचर हैं। अनुचर आठ-आठ घंटे की शिफ्ट में ड्यूटी करते हैं।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के चार स्वीकृत पद हैं, लेकिन वर्तमान में केवल दो पर तैनाती है। भोजन की व्यवस्था के लिए दो रसोइये हैं।

युवकों के मानसिक और व्यावहारिक विकास के लिए प्रशिक्षण केंद्र में मनोविज्ञानी की व्यवस्था है। समय-समय पर मानसिक स्वास्थ्य की जांच और चिकित्सकीय परामर्श के लिए मानसिक रोग विशेषज्ञ डा. अमित कुमार शाही भी जुड़े हैं।

केंद्र की नियमित व्यवस्था के अनुसार युवकों की गिनती रोजाना रात में भोजन के बाद और सुबह नाश्ते के समय की जाती है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि रात में भोजन के बाद सभी युवक मौजूद थे तो चार युवक कब और किस रास्ते से परिसर से बाहर निकले? सुबह नाश्ते के समय गिनती में उनके गायब होने का पता चला या उससे पहले किसी कर्मचारी को इसकी जानकारी हुई-यह भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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रात की ड्यूटी पर कौन था, अब तय होगी जवाबदेही
दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी तनुज त्रिपाठी का कहना है कि उन्होंने मामले की जानकारी निदेशालय को दे दी है। साथ ही आश्रय गृह के अधीक्षक रविकांत पांडेय को मामले की जांच कर विस्तृत आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

जांच में विशेष रूप से यह पता लगाया जाएगा कि घटना वाली रात किस अनुचर और किस होमगार्ड की ड्यूटी थी। ड्यूटी के दौरान उन्होंने युवकों की निगरानी किस तरह की और क्या परिसर की नियमित जांच की गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया है कि लापरवाही जिस स्तर पर सामने आएगी, उसकी जवाबदेही तय की जाएगी। उप निदेशक दिव्यांगजन अनूप कुमार सिंह और दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी तनुज त्रिपाठी ने मौके पर पहुंचकर अपनी स्तर से भी पड़ताल की है। पुलिस भी लापता युवकों की तलाश और घटना के हर पहलू की जांच कर रही है।

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