गोरखपुर में एंबुलेंस के इंतजार में चली गई अधिवक्ता की जान, जिला अस्पताल में 45 मिनट तक मची रही अफरातफरी
गोरखपुर में दाह संस्कार के दौरान घायल हुए दो अधिवक्ताओं में से एक की मौत एंबुलेंस के 45 मिनट तक ...और पढ़ें

रोते बिलखते परिजन। जागरण
HighLights
गोरखपुर में एंबुलेंस की देरी से अधिवक्ता की मौत।
जिला अस्पताल में 45 मिनट तक नहीं मिली एंबुलेंस।
अधिवक्ताओं ने लापरवाही के खिलाफ किया जोरदार प्रदर्शन।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। राजघाट स्थित गुरु गोरखनाथ घाट पर दाह संस्कार में गए दो अधिवक्ताओं के घायल होने के बाद जिला अस्पताल की एंबुलेंस व्यवस्था की गंभीर स्थिति सामने आई। गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाए गए घायलों को दूसरी जगह ले जाने के लिए करीब 45 मिनट तक एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी।
इस दौरान उपचार में देरी को लेकर अधिवक्ताओं और स्वजन में आक्रोश फैल गया। हंगामा और नारेबाजी शुरू होने के बाद जिलाधिकारी दीपक मीणा, एसपी सिटी और कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची।
अधिवक्ताओं के अनुसार, घायल होने के बाद उन्हें जिला अस्पताल लाया गया। हालत गंभीर होने पर उन्हें निजी अस्पताल अथवा बीआरडी मेडिकल कालेज ले जाने की जरूरत थी। इसके लिए पहले अधिवक्ताओं ने एंबुलेंस सेवा को फोन किया। इमरजेंसी में तैनात चिकित्सकों ने भी एंबुलेंस के लिए लगातार फोन किया, लेकिन काफी देर तक कोई व्यवस्था नहीं हो सकी।

मृतक आलोक अस्थाना की फाइल फोटो।
आरोप है कि इसके बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को भी फोन किया गया, लेकिन कई बार फोन करने के बावजूद संपर्क नहीं हो सका। वरिष्ठ चिकित्सक डा. बीके सुमन को इसकी जानकारी हुई तो वह टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने भी एंबुलेंस उपलब्ध कराने के लिए काफी प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली।
करीब 45 मिनट तक एंबुलेंस नहीं पहुंचने पर अधिवक्ताओं का आक्रोश बढ़ गया और उन्होंने अस्पताल परिसर में नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामे की जानकारी होने पर जिलाधिकारी दीपक मीणा मौके पर पहुंचे। एसपी सिटी और कोतवाली पुलिस भी फोर्स के साथ पहुंची और स्थिति को संभाला।
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रोते बिलखते परिजन। जागरण
अधिवक्ताओं का कहना था कि यदि एंबुलेंस की व्यवस्था समय से उपलब्ध हो जाती तो घायलों को निजी अस्पताल अथवा बीआरडी मेडिकल कालेज ले जाने में काफी राहत मिलती। आरोप है कि जिस अधिकारी या कर्मचारी को फोन किया गया, वहां से दूसरे को जिम्मेदारी बताकर मामला टाल दिया गया। इस तरह एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने के बीच घायल रोगियों को जिला अस्पताल से दूसरी जगह ले जाने में काफी विलंब हुआ।
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अधिवक्ताओं के अनुसार, इस देरी का गंभीर परिणाम सामने आया और आलोक अस्थाना की मृत्यु हो गई। उन्हें जब निजी अस्पताल ले जाया गया तो वहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद एंबुलेंस लेकर चालक जिला अस्पताल आ गया। घटना के बाद अधिवक्ताओं ने एंबुलेंस व्यवस्था की जांच और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। शव लेकर एंबुलेंस जिला अस्पताल में खड़ा है।
