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'शिक्षा में राजनीति नहीं, बच्चों के भविष्य पर ध्यान दें', UP के शिक्षकों को सम्मानित कर सीएम योगी का आह्वान

Published: Sat, 05 Sep 2026 01:52 PM (IST)Updated: Sat, 05 Sep 2026 06:02 PM (IST)

सीएम योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस पर कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में राजनीति नहीं होनी चाहिए, शिक्षकों को बच्चों ...और पढ़ें

HighLights

  1. शिक्षा में राजनीति से दूर रहने की अपील।

  2. शिक्षकों को बच्चों के भविष्य निर्माण पर ध्यान देने का निर्देश।

  3. गोरखपुर में 81 उत्कृष्ट शिक्षकों को किया सम्मानित।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कि शिक्षा में राजनीति नहीं होनी चाहिए। राजनीति के चश्मे से देखने वालों को 2017 के बाद प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आया आमूलचूल परिवर्तन दिखाई नहीं देगा।

उन्होंने प्रदेशभर के शिक्षकों का आह्वान किया कि वे शिक्षा व्यवस्था में उत्कृष्टता और नवाचार को लेकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा आगे बढ़ाएं। यही स्वस्थ प्रतिस्पर्धा प्रदेश और देश का भविष्य बनाएगी।

सीएम योगी शनिवार को शिक्षक दिवस पर बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार एवं मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार वितरित करने के बाद उपस्थित शिक्षकों व अन्य जन को संबोधित कर रहे थे।

योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में बेसिक शिक्षा विभाग के 61 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 20 शिक्षकों (कुल 81) को पुरस्कृत किया गया। सभी शिक्षकों को मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से पुरस्कृत किया। शिक्षकों को पुरस्कार देते समय सीएम योगी ने उनसे आत्मीय संवाद कर बधाई दी और उन्हें खूब प्रोत्साहित भी किया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने विगत साढ़े नौ साल में शिक्षा व्यवस्था में आए सकारात्मक परिवर्तन की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि बेसिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था में सुदृढ़ता लाने के काम वर्ष 2017 से पहले भी हो सकते थे। पर, तबकी सरकारों ने ध्यान नहीं दिया।

उन्होंने किसी का नाम लिए बिना तंज कसा, ‘जितना पैसा आप सैफई महोत्सव में खर्च करते थे, उसी पैसे में से थोड़ा सा पैसा शिक्षा की तरफ डाइवर्ट करते तो लाखों बच्चों का भविष्य बन चुका होता। जितना पैसा वर्किंघम की बग्गी मंगा कर अपना जन्मदिन मनाते थे, उतना पैसा शिक्षा पर खर्च करते, तो बच्चों का भविष्य बनता, पहचान का संकट नहीं आता।’

मुख्यमंत्री ने शिक्षा पर राजनीति करने वालों पर प्रहार करते हुए कहा कि चुनावी घोषणा अलग विषय है। पर स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी बनाना कठिन कार्य होता है और यह प्रदेश के अंदर आज दिखाई दे रहा है।

उन्होंने कहा कि बयान देना आसान है, लेकिन एक करोड़ 60 लाख बच्चों के अकाउंट में डीबीटी के माध्यम से पैसा पहुंचा देना कठिन कार्य है और वह कार्य हुआ है। संस्कृत के छठी क्लास से लेकर के आचार्य तक बच्चों को स्कॉलरशिप के साथ जोड़ देना कठिन कार्य था लेकिन सरकार ने वह भी किया।

प्रोजेक्ट अलंकार जैसे इनोवेशन के माध्यम से, ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से, बेसिक हो या माध्यमिक इन विद्यालयों में परिवर्तन का निर्णय करना कठिन था और इसे भी किया गया। उन्होंने कहा कि टिप्पणी करना आसान काम है लेकिन करके दिखाना मुश्किल। सीएम योगी ने यूपी को बदनाम करने के लिए दुष्प्रचार की तरफ भी ध्यान आकृष्ट कराया।

कहा कि दूसरे राज्य के एक जर्जर विद्यालय भवन का वीडियो झांसी का बताकर चलाया जा रहा था। यूपी के शिक्षा जगत को अपमानित करने का प्रयास करने वालों को स्मार्ट क्लास, ऑपरेशन कायाकल्प जैसे व्यापक परिवर्तन दिखाई नहीं देता।

मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से अपील की कि हमारी प्रतिस्पर्धा चुनावी घोषणाबाजों से नहीं है। चुनावी उड़ानों पर बैठे लोगों की बजाय हमारी प्रतिस्पर्धा समय से है। उन्होंने कहा कि जिस बच्चे को आज आप पढ़ा रहे हैं, अगर आज आप चूक गए तो उसका बचपन दोबारा नहीं आने वाला है। इसलिए समय के साथ सही दिशा में, सही समय पर निर्णय लेने की आदत होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि शिक्षा के प्रति विश्वास को बनाए रखना सरकार और शिक्षकों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बदलती टेक्नोलॉजी पर हम मौन नहीं बने रह सकते। हमें एआई, रोबोटिक और ड्रोन टेक्नोलॉजी के अनुरूप खुद को तैयार करने की जरूरत है।

सपा का नाम लिए बगैर मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों को प्रदेश में चार बार शासन करने का अवसर मिला वह और जिस कांग्रेस को लगभग छह दशक तक यूपी में शासन करने का अवसर प्राप्त हुआ था, वह दोनों प्रदेश की बदलती व्यवस्था पर प्रश्न खड़ा करने का फिर से प्रयास कर रहे हैं। उनके स्वयं के स्मारक बने जर्जर भवन जिनको हम रिप्लेस कर चुके हैं, वे शिक्षा व्यवस्था पर प्रश्न खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं।

यूपी में आए परिवर्तन के वाहक हैं शिक्षक

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी के प्रति धारणा बदली और आमूलचूल परिवर्तन आया है। इस परिवर्तन के महत्वपूर्ण वाहक शिक्षक हैं। इस परिवर्तन की सबसे प्रारंभिक कड़ी शिक्षा है और शिक्षा की मजबूत नींव शिक्षक हैं।

2017 के पहले नकल के अड्डे बन गए थे विद्यालय

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 के पहले विद्यालय, नकल के अड्डे बन गए थे। ठेके चलते थे। दूर-दराज के, दूसरे राज्यों के छात्र यहां पर परीक्षा देने के लिए आते थे। परीक्षा देने के नाम पर ठेका होता था। 2017 के बाद ऐसे विद्यालय को परीक्षा केंद्र नहीं बनने दिया जाता है।

पूरा देश देख रहा है यूपी का शिक्षा मॉडल

मुख्यमंत्री ने बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में आए बदलाव की विस्तार से चर्चा की। बताया कि अकेले माध्यमिक शिक्षा में 1500 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि पुराने और जर्जर विद्यालय भवनों की जगह नए भवन बनाने के लिए उपलब्ध करवाए गए। इससे 2100 से अधिक माध्यमिक विद्यालयों के अच्छे भवन आज सामने दिखाई दे रहे हैं।

इसी तरह पहले चरण में हर जनपद में दो-दो सीएम कंपोजिट विद्यालय बनवाए जा रहे हैं। प्रयास है कि यह स्कीम हर तहसील स्तर पर जाए। इसका मॉडल अटल आवासीय विद्यालय की तर्ज पर ये डे स्कूल के रूप में होगा जहां पहली से लेकर 12वीं तक के बच्चे एक इंटीग्रेटेड कैंपस में पढ़ पाएंगे। यह शिक्षा की गुणवत्ता का एक अद्भुत मॉडल होगा।

उन्होंने कहा कि यूपी के स्कूलों में आज स्मार्ट क्लास है, डिजिटल लाइब्रेरी है, बालक-बालिकाओं के लिए सेपरेट टॉयलेट हैं, पेयजल की व्यवस्था है, भरपूर बिजली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 32000 से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, 15000 से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब, 1129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी और 261000 से अधिक शिक्षकों को टैबलेट उपलब्ध करवाए गए हैं।

सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश का मॉडल आज पूरा देश देख रहा है। उत्तर प्रदेश का परिवर्तन पूरा देश महसूस कर रहा है। इसीलिए, हम लोगों ने तय किया है, शिक्षा का यह मॉडल मजबूती के साथ आगे बढ़ेगा।

सीएम ने बताया कि क्लीन एंड ग्रीन स्कूल बनाने की दिशा में हुए प्रयास से वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश के 12 विद्यालयों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है।

उन्होंने बाल वाटिका के स्तर से ही शिक्षा को मजबूत बनाने के प्रयास का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस देश का बचपन स्वस्थ है, उस देश का भविष्य अपने आप सशक्त और समर्थ बनता है।

अब समय पर परीक्षा और समय पर परिणाम

सीएम ने माध्यमिक शिक्षा में हुए परिवर्तन की चर्चा भी की। कहा कि 56 लाख बच्चे माध्यमिक शिक्षा में दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा में बैठते हैं। 2017 के पहले 3 महीने परीक्षा चलती थी और 3 महीना लगता था परिणाम आने में भी।इस देरी से यूपी के बच्चे यूपी के बाहर कहीं प्रवेश नहीं ले पाते थे। आज समय पर परीक्षा होती है और समय पर ही परिणाम भी आता है।

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