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67 साल की उम्र में भी पढ़ाई का जुनून बरकरार... शिक्षक दिवस पर डॉक्टर जहीर अहमद की प्रेरणा देने वाली कहानी

Published: Sat, 05 Sep 2026 12:45 PM (IST)

मौलाना डॉ. जहीर अहमद, 67 वर्ष की उम्र में भी शिक्षा के प्रति अपने जुनून को कायम रखे हुए हैं। ...और पढ़ें

HighLights

  1. 67 साल की उम्र में भी पढ़ाई का जुनून बरकरार

  2. अब तक 16 डिग्रियां हासिल कर चुके हैं डॉ. जहीर

  3. वर्तमान में इस्लामिक स्टडीज में एमए कर रहे हैं।

संतोष शर्मा, अलीगढ़। उम्र बढ़ने के साथ आमतौर पर लोग पढ़ाई और किताबों से दूरी बना लेते हैं, लेकिन मौलाना डॉ. जहीर अहमद के लिए सीखने की कोई उम्र नहीं है। 67 वर्ष की उम्र में भी उनका पढ़ाई के प्रति जुनून कायम है। अब तक वह 16 डिग्रियां हासिल कर चुके हैं, लेकिन शिक्षा का सफर अभी थमा नहीं है। वर्तमान में वह इस्लामिक स्टडीज में एमए कर रहे हैं। शिक्षक दिवस के मौके पर शिक्षा के प्रति उनका यह समर्पण विद्यार्थियों और समाज के लिए प्रेरणादायक है।

मूल रूप से बुलंदशहर के दरियापुर के रहने वाले मौलाना डॉ. जहीर अहमद वर्तमान में अलीगढ़ के सिविल लाइंस क्षेत्र स्थित दोदपुर की गोश्त वाली गली में रहते हैं।

बुलंदशहर से हाईस्कूल करने के बाद अलीगढ़ आ गए। यहां 1976 अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में प्री यूनिवर्सिटी काेर्स (पीयूसी) में दाखिला लिया। पीयूसी करने के बाद 1980 में बीकॉम और 1982 में एमकॉम किया। एमकॉम करने के बाद डाक तार विभाग, बुलंदशहर में नौकरी लग गई। साढ़े चार साल नौकरी करने बाद एक जुलाई 1989 को मुस्लिम इंटर कॉलेज, बुलंदशहर में वाणिज्य प्रवक्ता के रूप में नियुक्त हुए।

जहां पढ़े वहीं प्रधानाचार्य बने

डॉक्टर जहीर वर्ष 2019 में इसी कॉलेज के प्रधानाचार्य बने। 31 मार्च 2022 को सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनका पढ़ाई से रिश्ता खत्म नहीं हुआ। कॉलेज में पढ़ाने के साथ खुद भी पढ़े और एक के बाद डिग्री हासिल करते चले गए। उन्होंने अरबी में सर्टिफिकेट और डिप्लोमा, सांख्यिकी में डिप्लोमा, ग्रामीण विकास में परास्नातक डिप्लोमा, मौलवी, अदीब-ए-कामिल, मोअल्लिम-ए-उर्दू और फाजिल (आलिम) की शिक्षा भी हासिल की है। घर में उन्होंने किताबों की एक मिनी लाइब्रेरी भी बना रखी है।

शिक्षक दिवस पर डॉ. जहीर अहमद की कहानी इस संदेश को मजबूत करती है कि शिक्षक केवल दूसरों को पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि खुद जीवनभर सीखने वाला भी होता है।

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डॉक्टर जहीर।

एलएलबी, बीएड, पीएचडी भी की

डॉ. जहीर अहमद ने वाणिज्य, अर्थशास्त्र, अंग्रेजी, उर्दू, हिंदी, संस्कृत, शिक्षा शास्त्र, इतिहास, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, दर्शनशास्त्र और लोक प्रशासन समेत विभिन्न विषयों में उच्च शिक्षा हासिल की है। उनके पास 16 डिग्रियां हैं। इसके अलावा उन्होंने पीएचडी (वाणिज्य), एमबीए (फाइनेंस एंड मार्केटिंग), एम.लिब., एलएलबी, एलएलएम, बीएड और एमएड सहित कई पाठ्यक्रम पूरे किए हैं।

परिवार में भी शिक्षा को प्राथमिकता

डॉ. जहीर अहमद ने अपने परिवार में भी शिक्षा को महत्व दिया है। उनके बड़े बेटा मोहम्मद तलहा ने एएमयू से एमटेक करने के बाद आईआईटी, दिल्ली से पीएचडी कर रहे है। छोटे बेटा फराज अहमद ने जेएन मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया है। वहीं इंटरनशिप कर रहे हैं।

शिक्षा से मानवता और राष्ट्रसेवा

मौलाना डॉ. जहीर अहमद का मानना है कि शिक्षा सबसे बड़ी ताकत है और इसे हर किसी को ग्रहण करना चाहिए। उनका कहना है कि शिक्षा के माध्यम से मानवता और राष्ट्र सेवा बेहतर तरीके से की जा सकती है। उन्होंने कहा, “शिक्षा सबसे बड़ी ताकत है। हर व्यक्ति को इसे ग्रहण करना चाहिए। शिक्षा से न केवल व्यक्ति का विकास होता है, बल्कि मानवता और राष्ट्र की सेवा भी बहुत अच्छी तरह से की जा सकती है। जब से पढ़ाई शुरू की है, इसे बंद नहीं किया।

मौलाना डॉक्टर जहीर अहमद कहते है कि आज भी पढ़ रहा हूं और आगे भी सीखने का सिलसिला जारी रहेगा।” परिस्थितियां कैसी भी हों, व्यक्ति को पढ़ाई नहीं छोड़नी चाहिए। उम्र केवल एक संख्या है; सीखने की इच्छा हो तो इंसान जीवन के किसी भी पड़ाव पर विद्यार्थी बना रह सकता है।

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