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    गाजीपुर CHC के गेट पर तड़पती मासूम को डॉक्टर ने बिना उपचार के किया रेफर, एंबुलेंस के इंतजार में थम गई सांसें

    Updated: Tue, 21 Apr 2026 11:28 PM (IST)

    गाजीपुर के मुहम्मदाबाद सीएचसी में डॉक्टरों की लापरवाही से 5 वर्षीय आयुषी की मौत हो गई। चिकनपॉक्स से पीड़ित बच्ची को बिना इलाज रेफर कर दिया गया और एंबु ...और पढ़ें

    एंबुलेंस के इंतजार में मरीज की मौत।

    एंबुलेंस के इंतजार में मरीज की मौत।

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    जागरण संवाददाता, भांवरकोल (गाजीपुर)। मुहम्मदाबाद सीएचसी पर चिकित्सकों की लापरवाही के चलते एक मासूम असमय काल कवलित हो गई। भांवरकोल के लोहारपुर पलिया निवासी जुड़वा बहनों की चिकन पाक्स से तबीयत बिगड़ी तो स्वजन सीएचसी लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टर ने उपचार किए बिना ही हालत गंभीर बताते हुए राजकीय मेडिकल कॉलेज के अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।

    स्वजन अभी अस्पताल गेट पर ही एंबुलेंस की प्रतीक्षा कर रहे थे कि पांच वर्षीय आयुषी ने दम तोड़ दिया। दूसरी बिटिया अदिति का मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में उपचार कराकर घर ले गए। स्वजन का आरोप है कि अगर एंबुलेंस आने तक डॉक्टर उपचार करते तो शायद उसकी जान नहीं जाती।

    लोहारपुर निवासी दिनेश यादव की जुड़वा बेटियों अदिति और आयुषी की एक सप्ताह पूर्व तबीयत खराब हुई । बुखार के साथ शरीर पर कुछ दाने देख स्वजन चेचक की आशंका से शुरू में दवा नहीं कराए। शनिवार को परंपरा के अनुसार पूजा (सिरनी) संपन्न किया। रविवार को अचानक दोनों जुड़वा बहनों की तबीयत खराब होने लगी।

    स्वजन और आसपास के लोग उन दोनों को बाइक से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुहम्मदाबाद पहुंंचे। स्वजन के अनुसार वहां पहुंचते ही चिकित्सकों ने बिना उपचार किए ही राजकीय मेडिकल कॉलेज के जिला चिकित्सालय के लिए रेफर कर दिया लेकिन वहां तत्काल एंबुलेंस उपलब्ध नहीं थी। स्वजन के अनुसार लगभग एक घंटा बाद एंबुलेंस पहुंची। इतने में एक बेटी आयुषी की सांस थम गई।

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    बावजूद इसके दोनों बच्चियों को एंबुलेंस से लेकर जिला मेडिकल अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने आयुषी को मृत घोषित कर दिया। बीमार अदिति का उपचार शुरू किया। स्वजन और पट्टीदारों ने आयुषी का अंतिम संस्कार गाजीपुर गंगा घाट पर कर दिया। सोमवार की देर रात अदिति की स्थिति में सुधार होने के बाद उसे लेकर अपने पैतृक आवास लोहरपुर में चले आए।

    स्वजन का आरोप है कि एंबुलेंस की प्रतीक्षा करने के दौरान लगभग एक घंटा समय में बीमार बच्चियों का कोई भी उपचार नहीं हो सका। यदि एंबुलेंस शीघ्र मिल गई होती और समय रहते उपचार शुरू हुआ होता तो आयुषी की भी जान बच सकती थी। दिनेश यादव की पांच बेटियों में आयुषी सबसे छोटी थी। उन्हें कोई बेटा नहीं है।

    102 को आने में लग गया एक घंटा

    सोमवार को हालत गंभीर होने पर दोनों मासूमों को लेकर स्वजन मुहम्मदाबाद सीएचसी पहुंचे, जहां मौजूद इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर इरशाद ने देखते ही हालत गंभीर बताया। डॉक्टर ने स्वजन के उन्हें राजकीय मेडिकल कॉलेज के अस्पताल ले जाने की सलाह दी।

    गंभीर हालत में दोनों बच्चियों को बाइक से 25 किमी मुख्यालय ले जाने की बजाय स्वजन ने एंबुलेंस का सहारा लेना चाहा। इस दौरान बताया गया कि एंबुलेंस 108 घायल मरीज को लेकर गई है।

    बार-बार तबीयत खराब होने की बात बताने पर अस्पतालकर्मियों ने एंबुलेंस 102 की वैकल्पिक व्यवस्था की, जिसे आने में करीब एक घंटा लग गया। अस्पताल के गेट पर ही एंबुलेंस के इंतजार करते समय पांच वर्षीय आयुषी ने दम तोड़ दिया। डॉ. दिलशाद की ड्यूटी पीएचसी राजापुर में है, लेकिन शनिवार से मंगलवार तक उनकी नियमित इमरजेंसी ड्यूटी सीएचसी मुहम्मदाबाद पर रहती है।

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