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बाढ़ के बाद दरकने लगीं 114 साल पुराने निर्मोही अखाड़े की दीवारें, रोजाना 1000 लोगों को भोजन कराने वाली अन्न सेवा बंद

Published: Fri, 04 Sep 2026 04:40 PM (IST)Updated: Fri, 04 Sep 2026 06:19 PM (IST)

चित्रकूट के रामघाट स्थित 114 साल पुराना निर्मोही अखाड़ा बाढ़ से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे प्रसादालय की ...और पढ़ें

बाढ़ की वजह से निर्मोही अखाड़े की दीवारों में आईं दरारें।

बाढ़ की वजह से निर्मोही अखाड़े की दीवारों में आईं दरारें।

HighLights

  1. निर्मोही अखाड़े का प्रसादालय बाढ़ से बुरी तरह क्षतिग्रस्त।

  2. 114 साल पुरानी निशुल्क अन्न सेवा हुई बंद।

  3. खाद्य सामग्री बर्बाद, संत हुए विस्थापित।

जागरण संवाददाता, चित्रकूट। धर्मनगरी के रामघाट में स्थित ऐतिहासिक निर्मोही अखाड़े के लिए इस बार की बाढ़ केवल पानी का संकट बनकर नहीं आई, बल्कि वर्षों से अनदेखी किए जा रहे खतरे को सामने ले आई। बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रसादालय भवन की दीवारों में जगह-जगह पड़ी दरारों ने अखाड़े के अस्तित्व और यहां रहने वाले संतों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

संतों का कहना है कि नदी की ओर लगातार हो रहे कटान की जानकारी पिछले करीब चार वर्षों से प्रशासन और संबंधित विभागों को दी जाती रही, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ। नवंबर 2025 में भी अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर खतरे से अवगत कराया गया था।

इसके साथ ही भवन निर्माण के लिए भी लगातार पत्र दे रहे है। लेकिन कोई कुछ नहीं हुआ है। जिसे अब बाढ़ ने भवन की हालत और खराब कर दी है। प्रसादालय की दीवारों में आई दरारें इतनी गंभीर हैं कि संतों को भवन के किसी हिस्से के गिरने का डर सता रहा है।

अखाड़े से जुड़े महंत प्रमुख दीन दयाल जी महाराज ने बताया कि बताया कि पत्र में कटान रोकने और अखाड़े की सुरक्षा के लिए प्रभावी इंतजाम करने की मांग की गई थी। आरोप है कि कई बार जानकारी देने के बावजूद स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। संतों का यह भी कहना है कि अधिकारियों की ओर से मौके का समुचित निरीक्षण नहीं किया गया। अब बाढ़ के बाद भवन की दीवारों में आई दरारों ने पुराने खतरे को गंभीर रूप दे दिया है।

114 साल से चली आ रही एक हजार लोगों की अन्न सेवा पर लगा विराम

निर्मोही अखाड़े के प्रसादालय में 114 वर्षों से संतों और श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क भोजन एवं प्रसाद की सेवा चलती आ रही है। यहां प्रतिदिन करीब एक हजार लोगों के भोजन की व्यवस्था की जाती थी। सेवा को सुचारु रखने के लिए करीब चार माह की खाद्य सामग्री परिसर में एकत्र कर रखी गई थी।

महंत ने बताया कि बाढ़ का पानी परिसर में घुसने से करीब 50 क्विंटल आटा, 10 क्विंटल चावल, 100 लीटर तेल और घी समेत अन्य खाद्य सामग्री खराब हो गई। भोजन बनाने के बर्तन और अन्य जरूरी सामान को भी नुकसान पहुंचा है। खाद्य सामग्री खराब होने से निशुल्क अन्न सेवा फिलहाल बंद हो गई है।

बिस्तर भी गीले और बहे, दूसरे स्थान पर रात गुजार रहे महांत

महांत मुन्ना शास्त्री ने बताया कि बाढ़ का असर केवल अन्न भंडार तक सीमित नहीं रहा। संतों के सोने के लिए रखे बिस्तर और अन्य सामान भी पानी में खराब हो गए। पानी कम होने के बाद संत दिनभर परिसर की सफाई और सामान को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में जुटे हैं। रात में रहने के लिए उन्हें दूसरे स्थानों का सहारा लेना पड़ रहा है।

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अन्न सेवा बंद होने के बाद फिलहाल संतों और यहां मौजूद लोगों को प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे लंच पैकेट से भोजन करना पड़ रहा है। वर्षों से दूसरों को भोजन कराने वाले प्रसादालय में अब स्वयं राहत पैकेट के सहारे दिन काटने की स्थिति बन गई है।

बाढ़ के बाद भी नहीं रुका 114 वर्षों का अखंड राम नाम

निर्मोही अखाड़े की सबसे बड़ी धार्मिक पहचान यहां चलने वाला अखंड राम नाम है। अखाड़े के एक परिसर में पिछले 114 वर्षों से अखंड राम नाम का पाठ जारी है। बाढ़ का पानी परिसर में पहुंचा, भवन क्षतिग्रस्त हुआ, खाद्य सामग्री खराब हुई और संतों की रहने की व्यवस्था प्रभावित हुई, लेकिन अखंड राम नाम की साधना नहीं रुकी।

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महांत विपरीत परिस्थितियों में भी राम नाम का पाठ जारी रखे हुए हैं। एक ओर ऐतिहासिक भवन के संरक्षण और अस्तित्व का संकट है, तो दूसरी ओर 114 वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपरा को बचाए रखने का संकल्प।