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    चित्रकूट के भरतकूप राम जानकी मंदिर में बड़ी चोरी, भगवान राम परिवार के आठ चांदी के मुकुट गायब

    Updated: Fri, 20 Feb 2026 09:40 PM (IST)

    चित्रकूट के भरतकूप स्थित प्राचीन राम जानकी मंदिर में गुरुवार रात चोरों ने धावा बोलकर गर्भगृह से भगवान राम परिवार के आठ चांदी के मुकुट चुरा लिए। केवल ह ...और पढ़ें

    चोरी की घटना के बाद मंदिर में बिना मुकुट के भगवान की मूर्तियां।  जागरण

    चोरी की घटना के बाद मंदिर में बिना मुकुट के भगवान की मूर्तियां।  जागरण 

    HighLights

    1. ताला तोड़कर गर्भगृह में घुसे चोर, हनुमान जी का मुकुट ही बचा

    2. 45 साल पहले भी हो चुकी है चोरी, पुलिस ने शुरू की जांच 

    जागरण संवाददाता, चित्रकूट। भरतकूप स्थित प्राचीन राम जानकी मंदिर में गुरुवार रात चोरों ने बड़ी वारदात को अंजाम दिया। मुख्य द्वार का ताला तोड़कर और कुंडी कटर से काटकर बदमाश गर्भगृह तक पहुंच गए और भगवान राम परिवार के आठ कीमती चांदी के मुकुट समेट ले गए। सुबह घटना का राजफाश होते ही मंदिर परिसर में सनसनी फैल गई और श्रद्धालुओं में आक्रोश व्याप्त हो गया।


    मंदिर के महंत लवकुश दास ने बताया कि वे मंदिर से सटे कक्ष में सो रहे थे। रात में किसी तरह की आहट नहीं हुई। सुबह पुजारी पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे तो टूटा ताला और बिखरा सामान देखकर उनके होश उड़ गए। गर्भगृह से भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के कुल आठ चांदी के मुकुट गायब मिले। केवल हनुमान जी का मुकुट सुरक्षित बचा है। चोरी गए मुकुटों का कुल वजन करीब एक किलो 700 ग्राम बताया जा रहा है।

    सूचना मिलते ही भरतकूप थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है तथा संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपितों की तलाश में टीमें गठित कर दी हैं। महंत ने बताया कि वर्ष 1980 में भी मंदिर में चोरी की घटना हो चुकी है। वर्तमान में आसपास आबादी और दुकानों की संख्या बढ़ने तथा नियमित गश्त के बावजूद हुई इस वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। थाना प्रभारी उपेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि तहरीर के आधार पर जांच जारी है और जल्द राजफाश करने का प्रयास किया जा रहा है।

    भरतकूप का धार्मिक महत्व

    भरतकूप धाम आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि त्रेता युग में भरत जी भगवान राम के राज्याभिषेक के लिए चारों तीर्थों का जल लेकर यहां पहुंचे थे। भगवान राम के अयोध्या लौटने से इंकार करने पर भरत जी ने वह पवित्र जल यहीं स्थित कूप में समर्पित कर दिया था। तभी से यह स्थल श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है।

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