बांदा कोर्ट का कड़ा फैसला: चित्रकूट यौन शोषण केस में जेई दंपती को फांसी, 33 नाबालिगों का शोषण कर बेचते थे पोर्न वीडियो
बांदा की विशेष पॉक्सो अदालत ने बच्चों के यौन शोषण और पोर्न वीडियो प्रसारित करने के मामले में जेई रामभवन और उनकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई ...और पढ़ें

निलंबित जेई रामभवन।
HighLights
न्यायाधीश का आदेश-आखिरी सांस तक लटकाओ, दोनों दोषियों पर लगाया 11 लाख रुपये जुर्माना
बांदा में छह माह में सुनाई तीसरी बार फांसी की सजा, अब तक पांच को दे चुके मृत्युदंड की सजा
सोनभद्र से मिला था लिंक, डेढ़ माह जाल बुन सीबीआइ ने जेई को नवंबर, 2020 में दबोचा था
चित्रकूट के सिंचाई में विभाग में कार्यरत जेई एसडीएम कालोनी में रहता था, दंपती बांदा जेल में
जागरण संवाददाता, बांदा। चित्रकूट में 33 नाबालिग बच्चों का यौन शोषण कर उनकी अश्लील तस्वीरें व पोर्न वीडियो इंटरनेट मीडिया के माध्यम से बेचकर कमाई करने के मामले में कड़ा फैसला आया। बांदा में विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट प्रदीप कुमार मिश्रा की अदालत ने शुक्रवार को चित्रकूट में सिंचाई विभाग के निलंबित जेई रामभवन व उसकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों दोषियों को तब तक फांसी पर लटकाने का आदेश दिया, जब तक उनकी मृत्यु न हो जाए। पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों, सीबीआइ के अधिवक्ता अभियोजन धारा सिंह मीना व बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने गुरुवार को 163 पृष्ठीय फैसले को सुरक्षित कर लिया था।
अदालत ने रामभवन पर 6.45 लाख व दुर्गावती पर 5.40 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। अदालत ने जुर्माने व सरकार से मिलने वाली सहायता राशि से साक्ष्य व गवाह बने पीड़ित बच्चों को 10-10 लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने, रामभवन के पास से जब्त आठ लाख रुपये, उस पर मिले ब्याज सहित संपूर्ण धनराशि को पीड़ित बच्चों में बराबर बांटने का आदेश दिया है। जेई की काली करतूत का लिंक सोनभद्र के अनपरा से मिला था। डेढ़ माह जाल बुनकर सीबीआइ ने जेई को नवंबर, 2020 में कर्वी की एसडीएम कालोनी स्थित किराये के घर से दबोचा था। बांदा में विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट ने बीते छह माह में तीसरी बार फांसी की सजा सुनाई है। अब तक पांच अभियुक्तों को मृत्युदंड की सजा दे चुके हैं।
निलंबित जेई रामभवन व पत्नी दु्र्गावती को सीबीआइ ने 17 नवंबर, 2020 को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। दुर्गावती की जमानत उच्च न्यायालय से हो गई थी। उसे दोबारा 18 फरवरी,2026 को इसी मामले में दोषी पाकर उसको जेल भेजा गया था, तभी से दोनों बांदा जेल में बंद हैं व निर्णय के बाद फिर दोनों को जेल भेज दिया गया। सीबीआइ ने 31 अक्टूबर,2020 को नई दिल्ली में मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
इस तरह खुला मामला
इसमें बताया था कि मूलरूप से बांदा के नरैनी के जवाहर नगर निवासी चुन्ना प्रसाद कुशवाहा का पुत्र सिंचाई विभाग का जेई रामभवन अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़कर बच्चों के यौन शोषण का गिरोह चलाता है। सितंबर में सोनभद्र के अनपरा निवासी इंजीनियर नीरज यादव को गिरफ्तार कर पूछताछ में उसके घर से आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई थी। दिल्ली में रहकर नौकरी कर रहा नीरज आनलाइन आपत्तिजनक लिंक साझा करता था। उसके एक लिंक से विशेष आनलाइन चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज एंड एक्स्प्लाइटेशन (ओसीएसएई) यूनिट ने रामभवन को पकड़ा।
34 अश्लील वीडियो और 779 तस्वीरें मिलीं
सीबीआइ टीम उसके यहां से पेन ड्राइव में 34 अश्लील वीडियो व 779 तस्वीरें मिलीं। वो डार्क वेब व अन्य इंटरनेट मीडिया साइटों पर बाल यौन शोषण से संबंधित तस्वीरें व वीडियो बेचने के लिए तीन मोबाइल नंबर व तीन ईमेल आइडी का उपयोग कर रहा। मामले के विवेचक सीबीआइ के एएसपी अमित कुमार (अब सेवानिवृत) 22 मई,2023 को आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया था। अदालत में पांच जून, 2023 से 74 गवाह पेश किए गए, जिसमें पीड़ित 25 बच्चे व अन्य हैं।
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हाई कोर्ट से भी रियायत की उम्मीद नहीं : अधिवक्ता
बांदा के वरिष्ठ अधिवक्ता विशंभर सिंह ने बताया कि जेई व उसकी पत्नी हाई कोर्ट में अपील कर सकते हैं। वहां से सजा मिलने पर सुप्रीम कोर्ट व फिर बाद में राष्ट्रपति से दया याचिका कर सकते हैं। हालांकि ऐसे जघन्य कृत्य में उन्हें कहीं भी रियायत मिलने की उम्मीद नहीं है।