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मृत्यु के बाद आत्मा प्रेत योनि में क्यों भटकती है? अभी जान लें मुक्ति का मार्ग

Published: Mon, 07 Sep 2026 11:30 AM (IST)

गरुड़ पुराण के अनुसार, आत्मा अकाल मृत्यु या अधूरे अंतिम संस्कार के कारण प्रेत योनि में भटकती है। मुक्ति के ...और पढ़ें

क्या है प्रेत योनि (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि मृत्यु के बाद आत्मा जीवन में किए गए कर्मों के अनुसार आगे की यात्रा तय करती है। प्रेत योनि के दौरान आत्मा को बहुत तीव्र भूख और प्यास लगती है, लेकिन आत्मा के पास शरीर न होने के कारण वह कुछ भी खा-पी नहीं सकती। यह स्तिथि आत्मा के लिए अधिक दुखदायी होती है। क्या आप जानते हैं कि आत्मा प्रेत योनि में क्यों भटकती है। अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं इसके पीछे की वजह के बारे में।

प्रेत योनि में क्यों भटकती है आत्मा?

गरुड़ पुराण के अनुसार, जब किसी की अकाल मृत्यु होती है (जैसे गंभीर बीमारी, दुर्घटना या आत्महत्या) तब वह अपनी स्वाभाविक आयु पूरी नहीं कर पाता। इस अधूरी आयु के कारण ही आत्मा को प्रेत योनि में भटकना पड़ता है।

इसके अलावा अगर मृत्यु के बद मृतक का विधिपूर्वक से अंतिम संस्कार न किया गया हो या उसमें कोई कमी रह गई हो, तो भी आत्मा को प्रेत योनि में भटकना पड़ता है। इसी वजह से शास्त्रों में अंतिम संस्कार को विधिपूर्वक करने का निर्देश दिया गया है।

मान्यता है कि जिस व्यक्ति का श्राद्ध और तर्पण नहीं किया जाता, उसकी आत्मा प्रेत बनकर भटकती है। पिंडदान और श्राद्ध कर्म करने से ही आत्मा को परलोक जाने का सही मार्ग प्राप्त होता है। इसी वजह से हिंदू धर्म में मृत्यु के उपरांत पिंडदान और श्राद्ध का विशेष महत्व है। गरुड़ पुराण के प्रेत खंड में इसका विस्तृत वर्णन मिलता है।

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प्रेत आत्मा को मुक्ति दिलाने के उपाय

गरुड़ पुराण का पाठ- मृत्यु के बाद घर में लगातार 13 दिनों तक गरुड़ पुराण का पाठ करवाना चाहिए। माना जाता है कि इससे आत्मा को मोह और प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है।

नारायण बलि और पिंडदान- प्रेत योनि से मुक्ति के लिए नारायण बलि पूजा और पिंडदान अवश्य करना चाहिए। हरिद्वार या काशी जैसे पवित्र तीर्थ स्थलों पर ये कार्य कराना अत्यंत शुभ माना गया है।

दान-पुण्य- मृतक के निमित्त ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, जूते, छाता और जल का दान करने से आत्मा को उसकी परलोक यात्रा में कष्ट नहीं भोगना पड़ता।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।