मृत्यु के समय मनुष्य के साथ क्या होता है? सौ बिच्छुओं के डंक जैसी पीड़ा और कर्मों का पूरा हिसाब
गरुड़ पुराण और हिंदू मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के समय व्यक्ति अपने कर्मों को देखता है और प्राण त्यागते समय ...और पढ़ें

गरुड़ पुराण में मौत और उसके बाद का सफर

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। मृत्यु एक ऐसा कड़वा सच है जिसके बारे में जानने के बाद भी मनुष्य अंजान बना रहता है। धरती लोक पर जन्म लेने वाले प्रत्येक जीव को एक न एक दिन जरूर मरना है। व्यक्ति जब तक जीवित रहता है लगातार कोई न कोई कार्य करता ही रहता है। यही काम व्यक्ति के कर्मों का निर्धारण करती हैं।
हिंदू मान्यताओं और गरुड़ पुराण के अनुसार जो व्यक्ति जीवित रहते हुए अच्छे कार्य करता है, उसे मृत्यु के बाद स्वर्ग की प्राप्ति होती है। वहीं जिसने संपूर्ण जीवन बुरे कर्म ही किए हो, उसे नरक जाना पड़ता है।
यह बात हममें से अधिकतर लोगों को पता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि, जब व्यक्ति की मृत्यु का समय आता है, तो उसके साथ क्या-क्या होता है? आइए जानते हैं इसके पीछे का सच।
मृत्यु के समय सबसे पहले क्या होता है?
कोई भी व्यक्ति मृत्यु के पास आने पर अपने परिवार के स्नेह और मोह के कारण काफी दुखी होते हुए देह का त्याग करता है। उस दौरान उसका चेतन शरीर जड़ के समान यानी बेजान हो जाता है।
जब धीरे-धीरे मृतक के प्राण कंठ में आकर अटक जाते हैं, तो उसे एक खास दिव्य दृष्टि दिखाई देती है। इस दृष्टि से वह अपने द्वारा किए गए समस्त अच्छे और बुरे कार्यों को एक साथ देख सकता है, लेकिन इस दौरान वह बोलने में असमर्थ हो जाता है।
यमदूतों के डर से प्राण-वायु अपने स्थान से चलने लगती है। उस समय एक पल भी उसे कई वर्षों के समान प्रतीत होता है। गरुड़ पुराण में प्राण निकलते समय होने वाली पीड़ा की तुलना सौ बिच्छुओं के डंक की पीड़ा से की गई है।
गरुड़ पुराण के अनुसार, जब व्यक्ति मृत्यु को प्राप्त होता है, तब पापी मनुष्य के प्राण गुदा मार्ग से और पुण्य करने वाले व्यक्ति के प्राण मुख मार्ग से निकलती है। प्राण निकलने के बाद जीवात्मा आगे की यात्रा के लिए दूसरे शरीर को धारण करती है।

प्राण निकलने के बाद जीव मोह के कारण अपने घर की ओर देखता है और फिर वह अंगूठे के समान आकार का शरीर धारण करता है। यमदूत उसके गले में रस्सी बांधकर उसे उसी तरह ले जाते हैं, जैसे राजा के सिपाही किसी अपराधी को पकड़कर ले जाते हैं।
यमदूत जीव को उसके पाप और नरक की यातनाओं का स्मरण कराते हुए धमकाते हैं। वे कहते हैं कि, उसे यमराज के घर जाना है और नरक की यातनाएं भी भोगनी हैं। जहां पापी जीव यमदूतों द्वारा दंडित करके ले जाया जाता है, वहीं पुण्यकारी आत्मा को स्वर्ग के पार्षदों द्वारा सुखपूर्वक ले जाया जाता है।
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