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घर में किसी की मृत्यु के बाद खाने में तड़का क्यों नहीं लगता?

Published: Thu, 27 Aug 2026 07:36 PM (IST)

हिंदू धर्म में किसी की मृत्यु के बाद घर में तड़के वाला भोजन नहीं बनाया जाता है। गरुड़ पुराण के ...और पढ़ें

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद घर में कैसा भोजान बनना चाहिए।  (Picture Credit- AI Generated)

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद घर में कैसा भोजान बनना चाहिए। (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में जन्म और मृत्यु से जुड़े कई संस्कार और नियम बताए गए हैं। परिवार में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर कुछ दिनों तक घर में व्‍यक्ति के चले जाने का शोक मनाया जाता है। इस दौरान कई तरह की परंपराएं जैसे सूतक या अशौच काल को माना जाता हैं। इसमें खान-पान और रोजमर्रा के कामों को लेकर भी कुछ नियम माने जाते हैं। इस परंपरा का वर्णन आपको गरुड़ पुराण में मिल जाएगा।

इन्हीं परंपराओं में एक मान्यता यह है कि किसी की मृत्यु के बाद घर की रसोई में घी या तेल का तड़का लगाकर स्वादिष्ट और मसालेदार भोजन नहीं बनाया जाता। इसके पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ शोक भी एक कारण बताया गया है। चलिए इसे विषय पर विस्‍तार से बात करते हैं। 

शोक के कारण सादा भोजन

परिवार में किसी अपने की मृत्यु होने पर सभी लोग दुख और मानसिक तनाव में होते हैं। ऐसे समय में उत्सव जैसा माहौल बनाना उचित नहीं माना जाता। मान्‍यता यह भी है कि तड़का लगाते वक्‍त, जो चटक आवाज आती है, उससे मृतक की आत्‍मा को कष्‍ट पहुंचता है।

इसलिए 13 दिनों तक जब तक मृतक से जुड़े सभी कर्म कांडों को पूरा न कर लिया जाए, तब तक सादा भोजन ही करना चाहिए। वहीं घर में 13वें दिन मृतक की पसंद का भोजन तैयार करके उसके प्रियजनों को खिलाया जाता है। उसके बाद से ही घर की रसोई में भोजन में तड़का लगाकर भोजन बनाया जा सकता है।

आत्मा की शांति से जुड़ी मान्यता

गरुड़ पुराण में मृत्यु, आत्मा की यात्रा और अंतिम संस्कार से जुड़े विषयों से जुड़ी कई सारी बातें बताई गई हैं। माना जाता है कि मृत्यु के बाद आत्मा कुछ समय तक अपने परिवार और घर के आसपास रहती है। ऐसे में घर में अपने जाने के शोक की जगह परिवार के सदस्‍यों में उत्‍साह जैसा माहौल देखकर आत्‍मा को बहुत कष्‍ट पहुंचता है।

सात्विक और हल्का भोजन

मृत्यु के बाद परिवार के लोग मानसिक रूप से परेशान और भावनात्मक रूप से कमजोर हो जाते हैं। इसलिए इस दौरान हल्का और सादा भोजन वो किसी और के घर से आया हुआ ही वे ग्रहण कर पाते हैं।

सूतक और अशौच की परंपरा

मृत्यु के बाद घर की शुद्धि होने तक रसोई और खान-पान को लेकर भी गरुड़ पुराण में विशेष नियम बताए गए हैं। इसे अशौच या सूतक कहा जाता है। 3 दिन बाद जब घर की शुद्धी हो जताी है, तब ही घर की रसोई में खाना पक पाता है। लेकिन खाना उबला हुआ और बिना तेल, घी और मसाले का ही बनना चाहिए।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।