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सात फेरों में अग्नि ही क्यों बनती है साक्षी? जानिए इसके पीछे का गहरा आध्यात्मिक रहस्य

Published: Sun, 23 Aug 2026 12:00 PM (IST)

हिंदू विवाह में अग्नि के फेरों का महत्व जिसमें अग्नि को पवित्र और देवताओं का स्वरूप माना गया है। यह ...और पढ़ें

हिंदू धर्म में शादी के दौरान अग्नि के 7 फेरे ही क्यों?

हिंदू धर्म में शादी के दौरान अग्नि के 7 फेरे ही क्यों?

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शादी करना सोलह संस्कारों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। इस संस्कार के नियमों के अंतर्गत जब वर-वधू शादी के मंडप में जाते हैं, तब पंडित ईश्वर को साक्षी मानकर दोनों का विवाह संपन्न कराते हैं।

लेकिन विवाह का संस्कार तब तक पूरा नहीं माना जाता है, जब तक वर-वधू अग्नि के समक्ष 7 फेरे लेकर सात वचन निभाने का वादा न करें। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि, आखिर विवाह के दौरान अग्नि के ही चारों और फेरे क्यों लिए जाते हैं? अग्नि की जगह किसी और चीज को साक्षी मानकर क्यों नहीं फेरे लिए जाते हैं?

हिंदू धर्म में विवाह में अग्नि का महत्व

हिंदू वेदों और पुराणों में अग्नि को पवित्र माना जाता है। यह पांच प्रमुख तत्वों में से एक है। कई धार्मिक ग्रंथों में अग्नि को भगवान विष्णु का ही रूप बताया गया है। कहा जाता है कि, अग्नि में सभी देवी-देवताओं का वास होता है, इसलिए किसी भी पूजा अनुष्ठान में अग्नि हवन करने से हवन में डाली गई सामग्रियों का अंश सभी देवी-देवताओं तक पहुंच जाता है।

दुनिया में प्रत्येक चीज का निर्माण पंच महाभूत यानी पांच तत्वों से मिलकर बना है।

  • अग्नि - आग
  • जल - पानी
  • पृथ्वी - पृथ्वी
  • वायु - हवा
  • आकाश - अंतरिक्ष

जब वर-वधू का विवाह संपन्न कराया जाता है, तो सभी पंच तत्व मंडप में मौजूद होते हैं। जलती हुई आग अग्नि का प्रतीक, जल, मिट्टी से बना हवन कुंड पृथ्वी का प्रतीक, बोले गए मंत्र हवा का प्रतीक और आकाश ये पांच तत्व शादी में अहम भूमिका निभाते हैं।

अग्नि के चारों ओर फेरे लगाने और सात वचन लेना इस बात की ओर इशारा करता है कि, वर-वधू ने सभी देवताओं को साक्षी मानकर एक-दूसरे को अपना जीवनसाथी स्वीकार किया है।

अग्नि के चारों ओर फेरे लेने का असल कारण?

अग्नि पुराण, ऋग्वेद, मनुस्मृति, पद्मपुराण और अन्य कई पवित्र धार्मिक ग्रंथों और पुराणों के मुताबिक, अग्नि को अशुद्धियों और नकारात्मकता को दूर करके पवित्र करने वाला माना जाता है। ऐसे में जब वर-वधू अग्नि के फेरे लेते हैं तो सभी तरह की अशुद्धियों को दूर करके शुद्ध भाव से एक दूसरे को स्वीकार किया जाता है।

इसका एक कारण यह भी है कि, वर-वधू ने अग्नि में मौजूद देवताओं की मौजदूगी में एक-दूसरे को जीवनसाथी स्वीकार किया है। अगर वह अपने वैवाहिक जीवन के धर्म का पालन नहीं करते हैं, तो अग्नि उन्हें सजा देगी।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।