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बंगाली शादी में मछली की रस्म का क्या मतलब है? पढ़ें कैसे यह रस्म लाती है घर में सुख और समृद्धि

Published: Tue, 18 Aug 2026 07:21 PM (IST)

बंगाली शादियों में दुल्हन को जिंदा मछली पकड़ाने की एक अनोखी रस्म आजकल सोशल मीडिया पर वायरल है। यह रस्म ...और पढ़ें

बंगाली विवाह की शुभ रस्म।  (Picture Credit- AI Generated)

बंगाली विवाह की शुभ रस्म।  (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। बंगाली शादियों में कई ऐसी परंपराएं हैं, जो देखने में अनोखी लग सकती हैं, लेकिन उनके पीछे विशेष पारंपरिक मान्यताएं जुड़ी होती हैं। ऐसी ही एक रस्म आजकल सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हो रही है, जिसमें दुल्हन के हाथ में जिंदा मछली पकड़ाई या दिखाई जा रही है।

बंगाल और बिहार के कुछ क्षेत्रों में शादी के बाद इस रस्‍म को अदा किया जाता है और इसे बेहद शुभ माना जाता है। इस रस्‍म में खासतौर पर छोटी मछली का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे आसानी से पकड़ा जा सके। इस रस्म को सौभाग्य, समृद्धि और खुशहाल गृहस्थ जीवन के लिए निभाया जाता है।

शकुन शास्त्र में भी मछली को बहुत शुभ बताया गया है। खासतौर पर बंगालियों में विवाह और गृह प्रवेश की रस्म में दुल्हन को एक कटोरे या गहरे बर्तन में जीवित मछली दी जाती है, जिसे पकड़ना या छूना बहुत शुभ होता है। चलिए इस रस्‍म से जुड़ी मान्‍यताओं के बारे में जानते हैं।

मछली को माना जाता है शुभ

बंगाली संस्कृति में मछली का विशेष महत्व है। यहां कई शुभ अवसरों और त्योहारों में मछली को मंगल का प्रतीक माना जाता है। शादी जैसे महत्वपूर्ण मौके पर मछली का इस्तेमाल परिवार की खुशहाली और समृद्धि की कामना से जुड़ा होता है।

मान्यता है कि मछली जीवन में भोजन, धन-धान्य और बरकत लाती है। इसलिए दुल्हन को विवाह के समय मछली से जुड़ी यह रस्म निभाकर नए जीवन की शुरुआत करनी होती है।

नई दुल्हन की कुशलता का प्रतीक

जिंदा मछली फिसलन भरी होती है और उसे आसानी से पकड़ पाना मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से इस रस्म को दुल्हन की समझदारी और कुशलता से भी जोड़ा जाता है। यदि दुल्‍हन मछली को काबू में करके पकड़ लेती है, तो माना जाता है कि गृहस्‍थ जीवन की डोर भी वह इतनी ही मजबूती से पकड़ पाएगी।

एक अन्‍य मान्यता के अनुसार, मछली को संभालकर पकड़ना इस बात का प्रतीक है कि दुल्हन आने वाले जीवन की मुश्किल परिस्थितियों को भी समझदारी और धैर्य के साथ संभाल सकेगी। यह रस्म उसके नए परिवार के साथ तालमेल बैठाने और गृहस्थी को अच्छी तरह चलाने का एक तरह से सकारात्‍मक और नकारात्‍मक संकेत देती है।

गृहलक्ष्मी के रूप में दुल्हन

भारतीय परंपराओं में विवाह के बाद दुल्हन को परिवार की गृहलक्ष्मी माना जाता है। बंगाली समाज में भी दुल्हन के गृह प्रवेश को बहुत अधिक महत्‍वपूर्ण रस्‍म माना गया है। यदि दुल्‍हन हाथ में मछली पकड़कर गृह प्रवेश करती है, तो इसे परिवार के लिए शुभ माना जाता है।

अतः मछली से जुड़ी यह रस्म इसी भावना को दर्शाती है कि नई दुल्हन के आने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है