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Janmashtami 2026: व्रत में सात्विक भोजन क्यों है जरूरी? समझें उपवास के सही नियम और परहेज

Published: Thu, 03 Sep 2026 09:38 AM (IST)

हिंदू धर्म में व्रत के दौरान फलाहार और सात्विक भोजन का क्या महत्व है? जानिए उपवास में क्या खाना चाहिए, ...और पढ़ें

सात्विक भोजन का क्या महत्व है? (AI-Generated image)

सात्विक भोजन का क्या महत्व है? (AI-Generated image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में व्रत का मतलब सिर्फ भूखा रहना या खाना छोड़ना नहीं है। इसे शरीर, मन और विचारों को संयम में रखने का एक बेहद खास तरीका माना गया है। लेकिन, व्रत में सात्विक भोजन क्यों किया जाता है इसके बारे में कम लोग जानते होंगे। चलिए इस आर्टिकल में हम सात्विक भोजन का महत्व समझेंगे।

सात्विक भोजन ही क्यों?

एक कहावत है कि "जैसा खाए अन्न, वैसा होए मन।" सात्विक खाना बहुत ही शुद्ध, सादा और पचने में हल्का होता है। व्रत का मुख्य उद्देश्य भगवान की भक्ति, पूजा-पाठ और मंत्र जप में मन लगाना होता है। अगर हम ज्यादा तला-भुना, मसालेदार या भारी खाना खा लेंगे, तो शरीर में आलस आएगा और ध्यान भटकेगा। सात्विक आहार हमारी इंद्रियों को शांत रखता है और मन की चंचलता को कम करके एकाग्रता बढ़ाता है।

व्रत में क्या-क्या खा सकते हैं?

  • सेब, केला, अनार, पपीता और नारियल जैसे ताजे फलों का सबसे ज्यादा महत्व है। इसके साथ, एनर्जी के लिए मखाना और सूखे मेवे बेहतर ऑप्शन हैं।
  • दूध, दही और छाछ का सेवन किया जाता है।
  • साधारण अनाज की जगह कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, राजगीरा, आलू और शकरकंद से बने व्यंजन खाए जाते हैं।

व्रत में सेंधा नमक ही क्यों?

व्रत के दौरान सब्जियों और चाट में साधारण सफेद नमक का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया जाता। इसकी जगह सेंधा नमक (Rock salt) खाया जाता है क्योंकि इसे प्राकृतिक और सबसे शुद्ध नमक माना जाता है, जो उपवास के नियमों के सही माना गया है।

किन चीजों से करें परहेज?

  • व्रत में गेहूं, चावल, दालें, चना और मटर जैसे रोजमर्रा के अनाज वर्जित होते हैं।
  • प्याज और लहसुन को 'तामसिक' माना जाता है, इसलिए इनसे पूरी तरह परहेज किया जाता है।
  • बहुत ज्यादा तेल-मसाले वाला खाना, अंडा, मांस और शराब भी व्रत की शुद्धता खत्म कर देते हैं।

हर व्रत की अपनी अलग परंपरा

व्रत के दौरान इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि हर व्रत के नियम एक जैसे नहीं होते हैं। नवरात्र, एकादशी और जन्माष्टमी के फलाहार में थोड़ा-बहुत अंतर हो सकता है। इसके अलावा, कुछ ऐसे व्रत भी हैं जो निर्जला रखे जाते हैं तो कुछ में दिन में एक बार फलाहार किया जाता है। व्रत में सात्विक भोजन सादगी, शुद्धता और ईश्वर के प्रति पूरा समर्पण रखने का प्रतीक माना जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।