जन्माष्टमी से पहले दुल्हन की तरह सजा श्रीकृष्ण जन्मस्थान, रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगाया मंदिर
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से पहले मथुरा का श्री कृष्ण जन्मस्थान रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगा उठा है, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु उमड़ ...और पढ़ें
HighLights
श्री कृष्ण जन्मस्थान रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगा उठा।
जन्माष्टमी से पहले मथुरा में भक्तों का सैलाब उमड़ा।
पूरा ब्रजमंडल राधे-राधे के उद्घोष से गूंज रहा है।
जागरण संवाददाता, मथुरा। नटवर नागर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर ब्रज में खुशियां छाई हैं। कान्हा के स्वागत के लिए उनकी अपनी नगरी भी चमक रही है। सड़क से लेकर चौराहों तक रंग-बिरंगी झालरों से सजे हैं। दुल्हन की तरह सजे शहर में श्रद्धालुओं का भी आगमन शुरू हो गया है।
सबकी इच्छा बस अपने कान्हा के दर्शन की है।जब कंस की कारा में कन्हाई का जन्म हुआ तब घनघोर वर्षा हुई। अब फिर कान्हा के जन्म की लीला से पहले बदरा बरस रहे हैं। बुधवार दोपहर करीब डेढ़ घंटे तेज वर्षा के बाद गुरुवार सुबह से वर्षा हो रही है।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान रंग-बिरंगी रोशनी से झिलमिला रहा है, तो जन्मस्थान जाने वाले रास्तों पर भी सजावट ऐसी है कि मनमुग्ध हो जाए। भूतेश्वर तिराहा, गोवर्धन चौराहा, स्टेट बैंक चौराहा भी रंग-बिरंगों कपड़ों से सजे हैं। गुरुवार सुबह से ही जन्मस्थान पर श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंचने लगी है।
#WATCH मथुरा, उत्तर प्रदेश। जन्माष्टमी से पहले श्री कृष्ण जन्मस्थान रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगा उठा। pic.twitter.com/yNixzxGtci
— ANI_HindiNews (@AHindinews) September 2, 2026
12 बजे मनाया जाएगा जन्मोत्सव
भले ही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी चार सितंबर को है। रात 12 बजे श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर आराध्य का अभिषेक होगा, लेकिन उससे पहले ही विभिन्न प्रांतों से हजारों श्रद्धालु जन्मस्थान पहुंचने लगे हैं।
कोई ब्रजभूमि में कदम रखते ही आल्हादित है, कोई उस जन्मस्थान की देहरी छूकर खुद को सौभाग्यशाली मान रहा है, जहां द्वापर में कान्हा ने जन्म लिया था। जैसे-जैसे दिन चढ़ रहा है, श्रद्धालुओँ की भीड़ बढ़ रही है।

कान्हा की नगरी में भक्तों ने डाला डेरा
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का साक्षी बनने के लिए कान्हा की पावन नगरी में देश-विदेश से श्रद्धालुओं का जनज्वार उमड़ने लगा है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान के साथ-साथ जिले के प्रमुख मंदिर भक्तों की भीड़ से खचाखच भरे हैं। शहर के सभी होटल, धर्मशालाएं और आश्रम कई दिन पहले ही पूरी तरह भर चुके हैं।

ठहरने की जगह न मिलने पर श्रद्धालु यमुना के घाटों, सड़कों के किनारे और मंदिरों के खुले प्रांगणों में ही डेरा डालकर अपने आराध्य के जन्म की प्रतीक्षा कर रहे हैं। पूरा ब्रजमंडल राधे-राधे के उद्घोष से गुंजायमान है।
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