जानिए कौन थीं दैत्यों की माता दिति? जिनके गर्भ के देवराज इंद्र ने किए थे 49 टुकड़े
दिति, दक्ष प्रजापति की पुत्री और महर्षि कश्यप की पत्नी थीं, जिन्होंने शक्तिशाली पुत्रों की प्राप्ति के लिए तपस्या की। देवराज इंद्र ने उनके गर्भ को खंडित कर दिया, जिससे 49 मरुतों का जन्म हुआ, जो बाद में देवता बने और इंद्र के सहायक हुए।

दैत्यों की माता दिति कौन की संतानों का रहस्य

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू पौराणिक कथाओं में अक्सर दैत्य और देवताओं का जिक्र देखने को मिलता है। दिति जो दैत्यों की माता थी उनका जन्म बेहद गौरवशाली वंश में हुआ था। उनके पिता दक्ष प्रजापति थे और उनके पति का नाम महर्षि कश्यप था।
जहां दिति दैत्यों की माता कहलाई, वहीं उनकी बहन अदिति देवताओं की माता थीं। हमेशा से दैत्य और देवताओं में कट्टर की दुश्मनी थीं। दोनों हमेशा एक-दूसरे से युद्ध करते थे।
दिति ने शक्तिशाली पुत्र प्राप्ति के लिए की तपस्या
एक बार ऐसा मौका आया जब वे सभी एक साथ एकत्रित हुए। समुद्र मंथन के दौरान उन्होंने समुद्र की गहराइयों से छिपे हुए अमृत को प्राप्त करने के लिए मिलकर मंथन शुरू किया। लेकिन इस अभियान में दिति के सभी दैत्य पुत्रों का अंत हो गया।
शोक से व्याकुल दिति ने अपने पति से याचना की कि, उन्हे ऐसे शूरवीर पुत्र मिले जो अपने भाइयों की मौत का बदला ले सके। उन्होंने ऐसे वीर की कामना की जो देवराज इंद्र का वध कर सकें।
तब महर्षि कश्यप ने उन्हें वरदान देते हुए कहा कि, अगर वे सौ सालों तक शुद्ध मन से भगवान की पूजा-अर्चना और उपासना करें तो उनकी मनोकामना पूरी होगी। दिति ने शक्तिशाली पुत्रों की प्राप्ति के लिए इस कठिन यात्रा का आरंभ किया। उनकी सच्ची निष्ठा और पवित्रता फलित हुई और शीघ्र ही वे गर्भवती भी हो गई। जब देवराज इंद्र को यह खबर मिली तो वे काफी चिंतित हो गए।

दिति को हुआ मरुत नाम का पुत्र
एक रात खुद की रक्षा के लिए देवराज इंद्र सेवक का रूप धरकर दिति के पास पहुंचे और गर्भावस्था में उनकी सेवा करने लगे। एक रात जब दिति सो गई तो उन्होंने अपने वज्र से उनका गर्भ चीर दिया और अंदर भ्रूण के 7 टूकड़े कर दिए।
जब भ्रूण रोने लगे तो इंद्रदेव ने कहा, मत रो। उन्होंने सातों टुकड़ों में से प्रत्येक के फिर से 7-7 टुकड़े किए और तब तक काटते गए जब तक 49 टुकड़े नहीं हो गए। इस तरह दिति ने 'मरुत' को जन्म दिया, जो देवता बने और इंद्रदेव के कामों में उनकी मदद करते रहे।
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