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18 या 19 सितंबर, कब है राधा अष्टमी? जानें उदया तिथि, भोग और पूजन की संपूर्ण विधि

Published: Tue, 08 Sep 2026 04:45 PM (IST)

हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी मनाई जाती है। साल 2026 में यह ...और पढ़ें

राधा रानी जन्म उत्सव (Picture Credits- AI Images)

राधा रानी जन्म उत्सव (Picture Credits- AI Images)

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को 'राधा अष्टमी' का त्योहार मनाया जाता है। यह दिन राधा रानी को समर्पित है, इसलिए इस दिन भक्त विधि-विधान के साथ राधा रानी की पूजा अर्चना करते हैं। माना जाता है कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को ही राधा रानी का जन्म हुआ था।

माना जाता है कि सिर्फ राधा रानी के नाम का जाप करने से ही भगवान कृष्ण की भी कृपा भी प्राप्त होती है। आइए जानते हैं साल 2026 में राधा अष्टमी कब मनाई जाएगी?

राधा अष्टमी कब है? (When is Radha Ashtami 2026)

हिंदू पंचांग के मुताबिक, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि इस साल 18 सितंबर, शुक्रवार को पड़ रही है। वहीं अगले दिन यानी 19 सितंबर 2026, शनिवार के दिन अष्टमी तिथि समाप्त हो जाएगी। ऐसे में उदया तिथि के हिसाब से राधा अष्टमी का त्योहार इस साल 19 सितंबर 2026, शनिवार के दिन मनाई जाएगी।

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि शुरुआत 18 सितंबर दोपहर 1:2 मिनट पर
भाद्रपद शुक्ल अष्टमी तिथि समाप्त 19 सितंबर दोपहर 3:28 मिनट पर
उदया तिथि के हिसाब राधा अष्टमी 19 सितंबर 2026, शनिवार

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राधा अष्टमी शुभ मुहूर्त (Radha Ashtami Auspicious Time)

राधा अष्टमी के मौके पर 4 शुभ मुहूर्त बन रहे हैं।

शुभ चौघड़िया मुहूर्त  सुबह 7 बजकर 39 मिनट से 9 बजकर 11 मिनट तक
लाभ चौघड़िया मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 46 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक
अमृत चौघड़िया दोपहर 3 बजकर 18 मिनट से 4 बजकर 50 मिनट तक
लाभ चौघड़िया शाम को 6 बजकर 22 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट तक

राधा अष्टमी पूजा विधि (Radha Ashtami Puja Rituals 2026)

राधा अष्टमी के मौके पर सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहने और फिर ध्यान कर सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए।

इसके बाद राधा रानी का नाम लेकर व्रत का संकल्प करना चाहिए। इसके बाद राधा रानी की पूजा-पाठ करें।

राधा रानी की पूजा करने के लिए घर के मंदिर में एक चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। इसके बाद उस पर राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या फोटो को स्थापित करें।

गंगाजल का छिड़काव कर पूजा स्थल को पवित्र करें। इसके बाद चंदन, फूल, सिंदूर, सुंगध, रोली,धूप-दीप आदि पूजा से जुड़ी समाग्री अर्पित करनी चाहिए।

इसके बाद राधा रानी को मीठी खीर और अरबी की सब्जी का भोग लगाना चाहिए। राधा रानी के किसी भी मंत्र का जाप अपनी क्षमता अनुसार करने से लाभ मिलता है।

राधा रानी की पूजा हमेशा दोपहर में करनी चाहिए। व्रत में एक समय ही अन्न ग्रहण करें और अगले दिन ब्रह्माणों को भोजन कराकर दान-दक्षिणा दें। इसके साथ ही सुहागिन महिलाओं को श्रृंगार का समान दें।

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