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प्रेमानंद जी महाराज ने बताया राधा अष्टमी व्रत का सही नियम, इस तरह मिलेगी किशोरी जी की कृपा

Published: Mon, 07 Sep 2026 02:14 PM (IST)Updated: Sat, 19 Sep 2026 08:37 AM (IST)

प्रेमानंद जी महाराज ने राधा अष्टमी व्रत के सही नियमों का वर्णन किया है, जिसके अनुसार 19 सितंबर को राधा ...और पढ़ें

राधा अष्टमी व्रत की सरल विधि

राधा अष्टमी व्रत की सरल विधि  

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 19 सितंबर को देशभर में राधा अष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर श्री राधा रानी का जन्म हुआ था। इसलिए हर साल इस तिथि को राधा अष्टमी मनाई जाती है। इस शुभ अवसर पर राधा रानी की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही किशोरी जी का शृंगार किया जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, राधा अष्टमी के दिन किशोरी जी की पूजा करने से जीवन में सभी सुखों की प्राप्ति होती है और लाड़ली जू की कृपा प्राप्त होती है। ऐसा माना जाता है कि राधा अष्टमी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब इसे विधिपूर्वक किया जाए। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको विस्तार से बताते हैं कि वृंदावन के संत श्री प्रेमानंद जी महाराज (Premanand Ji Maharaj) के अनुसार राधा अष्टमी का व्रत कैसे करना चाहिए।

Radha Ashtami 2026 (1)

कैसे करें राधा अष्टमी व्रत?

प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि राधा अष्टमी व्रत केवल प्रेम प्राप्ति का व्रत है। इसमें सबसे खास बात यह है कि प्रातःकालीन बेला में कुछ नहीं खाना चाहिए, क्योंकि इस समय राधा रानी प्रकट होती हैं। इसके बाद विधिपूर्वक राधा रानी का अभिषेक और श्रृंगार करके पूजा-अर्चना करें। फिर उनका चरणामृत लें। उन्होंने आगे बताया कि इसके बाद कोई विशेष नियम धारण करने की जरूरत नहीं है। केवल श्रीजी का ध्यान करें और लाड़ली जू का कीर्तन करें। प्रेमानंद जी कहते हैं कि राधा अष्टमी के दिन कई तरह के पकवान बनाकर उनका सेवन करना व्रत नहीं कहलाता।

किस दिन किया जाएगा राधा अष्टमी व्रत (Radha Ashtami 2026 Date and Time)

वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 18 सितंबर को दोपहर 01:00 बजे हुई है। वहीं, इस तिथि का समापन 19 सितंबर को दोपहर 03 बजकर 26 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, आज यानी 19 सितंबर को राधा अष्टमी का व्रत किया जा रहा है।

दान का महत्व

राधा अष्टमी के दिन दान करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन दान करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और धन लाभ के योग बनते हैं। इस दिन सुबह स्नान करने के बाद सच्चे मन से किशोरी जी की पूजा-अर्चना करें। इसके बाद मंदिर में या गरीब लोगों को अन्न, धन आदि चीजों का दान करें। ऐसा माना जाता है कि इन चीजों का दान करने से धन लाभ के योग बनते हैं और राधा रानी की कृपा बरसती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।