प्रेमानंद जी महाराज ने बताया राधा अष्टमी व्रत का सबसे सही नियम, मिलेगी श्रीजी की कृपा
प्रेमानंद जी महाराज ने राधा अष्टमी व्रत के सही नियमों का वर्णन किया है, जिसमें प्रातःकाल भोजन न करने और श्रीजी के ध्यान व कीर्तन पर जोर दिया गया है।

राधा अष्टमी व्रत की सरल विधि

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर श्री राधा रानी का जन्म हुआ था। इसलिए हर साल इस तिथि को राधा अष्टमी (Radha Ashtami 2026) के रूप में मनाया जाता है। सनातन धर्म में राधा अष्टमी का विशेष महत्व है। इस अवसर पर राधा रानी की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही किशोरी जी का श्रृंगार किया जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन राधा रानी की साधना करने से साधक को जीवन में सभी सुखों की प्राप्ति होती है और लाड़ली जू की कृपा प्राप्त होती है। ऐसा माना जाता है कि राधा अष्टमी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब इसे विधिपूर्वक किया जाए। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको विस्तार से बताते हैं कि वृंदावन के संत श्री प्रेमानंद जी महाराज (Premanand Ji Maharaj) के अनुसार राधा अष्टमी का व्रत कैसे करना चाहिए।
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कैसे करें राधा अष्टमी व्रत?
प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि राधा अष्टमी व्रत केवल प्रेम प्राप्ति का व्रत है। इसमें सबसे खास बात यह है कि प्रातःकालीन बेला में कुछ नहीं खाना चाहिए, क्योंकि इस समय राधा रानी प्रकट होती हैं। इसके बाद विधिपूर्वक राधा रानी का अभिषेक और श्रृंगार करके पूजा-अर्चना करें। फिर उनका चरणामृत लें। उन्होंने आगे बताया कि इसके बाद कोई विशेष नियम धारण करने की जरूरत नहीं है। केवल श्रीजी का ध्यान करें और लाड़ली जू का कीर्तन करें। प्रेमानंद जी कहते हैं कि राधा अष्टमी के दिन कई तरह के पकवान बनाकर उनका सेवन करना व्रत नहीं कहलाता।
किस दिन किया जाएगा राधा अष्टमी व्रत (Radha Ashtami 2026 Date and Time)
वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 18 सितंबर को दोपहर 01:00 बजे होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 19 सितंबर को दोपहर 03 बजकर 26 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, 19 सितंबर को राधा अष्टमी का व्रत किया जाएगा।
दान का महत्व
राधा अष्टमी के दिन दान करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन दान करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और धन लाभ के योग बनते हैं। इस दिन सुबह स्नान करने के बाद सच्चे मन से किशोरी जी की पूजा-अर्चना करें। इसके बाद मंदिर में या गरीब लोगों को अन्न, धन आदि चीजों का दान करें। ऐसा माना जाता है कि इन चीजों का दान करने से धन लाभ के योग बनते हैं और राधा रानी की कृपा बरसती है।
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