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    सौरमंडल में ‘रौद्र’ संवत्सर का आगाज, बृहस्पति राजा और मंगल बने मंत्री

    Updated: Thu, 19 Mar 2026 11:45 AM (IST)

    नव संवत्सर 2083 'रौद्र' का शुभारंभ हो गया है, जिसमें देवगुरु बृहस्पति को राजा और मंगल को मंत्री चुना गया है। ज्योतिषाचार्य डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल क ...और पढ़ें

    इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

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    जागरण संवाददाता, हरिद्वार। ज्योतिषीय परिप्रेक्ष्य में नव संवत्सर 2083 का शुभारंभ विशेष संकेतों के साथ हो रहा है। सौरमंडल में हुए प्रतीकात्मक ‘नवग्रह चुनाव’ में देवगुरु बृहस्पति को राजा और सेनापति मंगल को मंत्री चुना गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस ‘रौद्र’ संवत्सर का प्रभाव पृथ्वी पर सामाजिक, राजनीतिक और प्राकृतिक घटनाओं के रूप में पड़ सकता है।

    सौरमंडल में वार्षिक ‘चुनाव प्रक्रिया’

    प्रख्यात ज्योतिषाचार्य डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल ‘दैवज्ञ’ के अनुसार 23 फरवरी से सौरमंडल में वार्षिक ‘चुनाव प्रक्रिया’ प्रारंभ हुई, जिसमें बुध को चुनाव अधिकारी की भूमिका दी गई। शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न इस प्रक्रिया में देवगुरु बृहस्पति को वर्ष का राजा तथा मंगल को मंत्री पद प्राप्त हुआ। इसके साथ ही नव संवत्सर 2083 ‘रौद्र’ नाम से प्रारंभ हो रहा है। नवगठित ‘मंत्रिमंडल’ में चंद्रमा को गृहमंत्री, शुक्र को वित्त मंत्री और शनि को कृषि एवं खाद्य मंत्री का दायित्व सौंपा गया है। इस ज्योतिषीय गणना के अनुसार वर्ष भर धार्मिक, आध्यात्मिक और शैक्षणिक गतिविधियां भी बढ़ेगी हैं।

    बृहस्पति के प्रभाव से धर्म के प्रति आस्था बढ़ेगी और समाज में सांस्कृतिक चेतना मजबूत होगी। हालांकि, मंगल के मंत्री पद पर होने से वैश्विक स्तर पर तनाव, युद्ध, अग्निकांड, भूकंप, बाढ़ जैसी प्राकृतिक व मानवीय आपदाओं की आशंका भी जताई गई है। तेल, गैस और खनिज संसाधनों की कमी जैसे संकेत भी सामने आते हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव और सुरक्षा चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

    ज्योतिषाचार्य डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल ‘दैवज्ञ’ के अनुसार इस वर्ष अधिक मास के कारण समय-चक्र में विशेष परिवर्तन देखने को मिलेगा, वहीं तीन ग्रहण भी लगेंगे, हालांकि ये भारत में दृश्य नहीं होंगे। विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के मुहूर्त अपेक्षाकृत कम रहेंगे। समग्र रूप से यह वर्ष आध्यात्मिक उन्नति, शिक्षा और सामाजिक संतुलन के लिए सकारात्मक माना जा रहा है, जबकि दूसरी ओर प्राकृतिक आपदाओं और वैश्विक अस्थिरता के संकेत भी मौजूद हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से ‘रौद्र’ संवत्सर परिवर्तन, चुनौतियों और चेतावनी का वर्ष साबित हो सकता है।

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