चैत्र नवरात्रि 2026: मां जगदंबा की पालकी और 13 महीनों का 'रौद्र संवत्सर', जानें क्या है खास?
चैत्र नवरात्र 19 मार्च 2026 से शुरू होंगे, जिसके साथ रौद्र संवत्सर का भी शुभारंभ होगा। इस वर्ष मां जगदंबा पालकी पर सवार होकर आएंगी। राजा बृहस्पति और म ...और पढ़ें

चैत्र नवरात्रि
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चैत्र नवरात्र के साथ ही शुरू होगा नव संवत्सर, आज होगा कलश स्थापना
जागरण संवाददाता, बरेली। उत्साह और उमंग से भरे चैत्र नवरात्र गुरुवार से शुरू होंगे। चैत्र मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा गुरुवार सुबह 6:52 बजे शुरू होगी। इसी के साथ नूतन संवत्सर का शुभारंभ होगा। इस दिन गुड़ी पड़वा के साथ हिंदू नववर्ष मनाया जाएगा। इस बार नवरात्र 19 मार्च से 27 मार्च तक रहेंगे यानी पूरे नौ दिन के होंगे।
नवरात्र गुरुवार को शुरू होने के कारण इस बार मां जगदंबा पालकी पर सवार होकर आएंगी और प्रस्थान माता का हाथी पर होगा।ज्योतिषाचार्य पंडित मुकेश मिश्रा के अनुसार वर्ष 2026 में शुरू होने वाले नए संवत्सर को 'रौद्र संवत्सर' कहा जा रहा है। इस वर्ष के राजा बृहस्पति और मंत्री मंगल होंगे।
वैदिक ज्योतिष में हर साल का प्रभाव इन ग्रहों की स्थिति के आधार पर देखा जाता है। बृहस्पति को ज्ञान, धर्म और समृद्धि का प्रतीक माना गया है, जबकि मंगल साहस और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में इस साल धर्म, पराक्रम और सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक देखने को मिल सकता है।
संवत्सर का आध्यात्मिक महत्व
नव संवत्सर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होने वाला भारतीय संस्कृति का पवित्र पर्व है। यह ब्रह्माजी द्वारा सृष्टि की रचना, राजा विक्रमादित्य के गौरवशाली शासन और ऋतु परिवर्तन (बसंत के अंत, ग्रीष्म की शुरुआत) का प्रतीक है। यह दिन प्रकृति के पुनर्जागरण, नई ऊर्जा, ऊर्जावान संकल्पों और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का संदेश देता है।
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इस वर्ष पड़ेंगे तीन ग्रहण लेकिन भारत में नहीं दिखेंगे
इस बार समस्त भूमंडल पर दो सूर्य ग्रहण तथा एक चंद्र ग्रहण होगा। इस वर्ष होने वाले सभी ग्रहण केवल विदेश में दृश्यमान होंगे। भारत में इस वर्ष कोई भी ग्रहण दृश्य नहीं होगा जिसका कोई प्रभाव यहां पर नहीं पड़ेगा।
70 विवाह के मुहूर्त, 13 महीनों का रहेगा यह वर्ष
इस रौद्र संवत्सर में 70 दिनों तक शहनाइयों की गूंज सुनाई देगी। अप्रैल में 7, मई में 7, जून में 10 जुलाई में 10, नवंबर में 4, दिसंबर में 7, जनवरी में 10 फरवरी में 8 मार्च में 6 शुभ विवाह मुहूर्त रहेंगे। वहीं, इस वर्ष ज्येष्ठ मास का अधिक मास होगा। जिसके चलते यह वर्ष 13 महीनों का रहेगा।
घटस्थापना शुभ मुहूर्त
कलश स्थापना 19 मार्च गरुवार को की जाएगी। इसके लिए सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 06:52 बजे से 07:43 बजे तक है। यदि कोई सुबह पूजा न कर पाएं, तो दूसरा शुभ मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा।
कलश स्थापना की विधि
कलश को सभी देवी-देवताओं और पवित्र तीर्थों का प्रतीक माना जाता है। इसके लिए मिट्टी या तांबे का कलश लेकर उसमें साफ पानी या गंगाजल भरें। फिर कलश के गले में मौली या कलावा बांधें और उसके सामने रोली या कुमकुम से स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। इसके बाद कलश के ऊपर आम या अशोक के पांच पत्ते रखें।
नारियल को लाल कपड़े या चुनरी में लपेटकर कलावा बांधें और उसे पत्तों के बीच इस तरह रखें कि नारियल का मुख ऊपर की ओर रहे। इसके बाद इस कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित कर दें। माता शैल पुत्री का आह्वान दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।