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    नवसंवत्सर पर बांकेबिहारी को कंद माखन और नींव की कोपल का भोग, भक्तों को मिलेगा अनोखा प्रसाद

    Updated: Mon, 16 Mar 2026 11:54 AM (GMT+05:30)

    नवसंवत्सर पर ठाकुर बांकेबिहारीजी को कंद, माखन, मीठी नींव की कोपल और ऋतुफल अर्पित किए जाएंगे। पुरोहित वर्षफल सुनाएंगे। इस दिन स्वामी हरिदास के पिता गुर ...और पढ़ें

    सांकेतिक तस्वीर।

    सांकेतिक तस्वीर।

    HighLights

    1. ठाकुर बांकेबिहारी को कंद, माखन, नींव की कोपल अर्पित

    2. स्वामी आशुधीर महाराज का 535वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा

    3. नीम की कोपलें स्वास्थ्यवर्धक, भक्तों को प्रसाद मिलेगा

    संवाद सहयोगी, वृंदावन। नवसंवत्सर पर ठाकुर बांकेबिहारीजी को कंद (पीली मिश्री), माखन व मीठे नींव की कोमल कोपल, ऋतुफल के साथ शुद्ध दूध व मेवा से बने दिव्य पदार्थ भोग में अर्पित किए जाएंगे। इसी दिन मंदिर के पुरोहित ठाकुरजी को नवसंवत्सर पर पूरे सनातनी वर्ष का वर्षफल भी सुनाएंगे। मंदिर में नवसंवत्सर पर स्वामी हरिदास के पिता गुरुदेव आशुधीर महाराज का 535 वां जन्मोत्सव परंपरागत तरीके से मनाएंगे।

    मंदिर में आधुशीर महाराज का मनाया जाएगा 525 वां जन्मोत्सव

    ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर सेवायत आचार्य प्रह्लादवल्लभ गोस्वामी ने बताया, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन सनातनी नववर्ष की शुरुआत होगी। इस दिन स्वामी आशुधीर महाराज के जन्मोत्सव पर अनेक धार्मिक अनुष्ठान होंगे। मंदिर के कुलपुरोहित नवीन सनातन वर्ष 2083 का फलादेश सुनाकर राशियों का गुणदोष बांचेंगे। कहा आशुधीर महाराज का नवसंवत्सर पर जन्म हुआ था।

    अनेक स्थानों पर आयोजन होंगे

    इस दिन बांकेबिहारी मंदिर एवं प्राचीन श्रीहरिदासपीठ मंदिर समेत श्रीहरिदासीय संप्रदाय से जुड़े अनेक स्थानों पर आयोजन होंगे। आचार्य ने कहा ईस्वी सन 1491 में संयुक्त भारतवर्ष के तत्कालीन पंजाब प्रांत स्थित मुल्तान जिला के उच्च गांव नामक गांव में नवसंवत्सर के दिन गजाधर महाराज एवं उनकी धर्मपत्नी मंसादेवी के सुपुत्र रूप में जन्मे आशुधीर महाराज का लालन पालन मुल्तान शहर के लाहौरी दरवाजा इलाके के पंजाबी सराय स्थित आवास में हुआ था।

    इसलिए अर्पित की जाती है नींव की कोपल

    सेवायत आचार्य प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी कहा नवसंवत्सर (नववर्ष) पर मीठे नीम की पत्तियों (कढ़ी पत्ता) का सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। यह पेट को स्वस्थ रखने, कीटाणुओं को नष्ट करने और मौसम बदलने के दौरान शरीर का विषहरण करने के लिए खाया जाता है। यह औषधीय गुणों से भरपूर है, जो तमाम बीमारियों से रक्षा करता है। मीठे नीम का सेवन शरीर में कीटाणुओं को नष्ट करने और पेट के स्वास्थ्य को सुधारने में भी मदद करता है।

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    इसका प्रसाद भक्तों को बांटा जाएगा

    इसी के साथ औषधीय गुणों से भरपूर नीम के पत्ते और उनका अर्क पुरुषों और महिलाओं के लिए प्राकृतिक स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करते हैं। बदलते मौसम में होने वाली बीमारियों से बचने के लिए नीम का सेवन अवश्य किया जाता है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करता है। इसलिए नवसंवत्सर पर ठाकुरजी को नींव की कोपल भोग में अर्पित की जाती है। इसका प्रसाद भक्तों को बांटा जाएगा।