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वैकुंठ से कैसे अलग है भगवान श्रीकृष्ण का 'गोलोक'? गीता में श्रीकृष्ण ने बताईं अद्भुत बातें

Published: Tue, 25 Aug 2026 12:32 PM (IST)

आपने सोचा है कि भगवान श्रीकृष्ण का निवास स्थान 'गोलोक' कैसा दिखता है? आइए जानते हैं कि इसका रहस्य और वैकुंठ धाम से इसका क्या अंतर है।

वैकुंठ धाम और गोलोक में फर्क (AI-Generated Image)

वैकुंठ धाम और गोलोक में फर्क (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्मग्रंथों और पुराणों में आपने कई लोकों के बारे में जरूर सुना होगा, जैसे- पाताल लोक, नाग लोक या फिर ब्रह्म लोक। लेकिन, इन सबमें सबसे सुंदर वर्णन अगर किसी का मिलता है, तो वह है 'गोलोक धाम'। कहा जाता है कि जैसे कन्हैया सबको अपनी ओर खींच लेते हैं, ठीक वैसे ही उनका यह लोक भी अपनी सुंदरता से किसी को भी मोहित कर सकता है।

क्या है गोलोक धाम?

सीधे शब्दों में कहें तो गोलोक, भगवान श्रीकृष्ण और श्री राधा रानी का वह निवास स्थान है जहां वे हमेशा रहते हैं। यहां हर दिन गोपियों के साथ रासलीला, खेल-कूद और उत्सव चलते रहते हैं।

ग्रंथ क्या कहते हैं?

गर्ग संहिता और ब्रह्म संहिता में इस धाम के बारे में बहुत गहराई से बताया गया है। इसे वृंदावन, साकेत, सनातन आकाश या परम स्थान भी कहा जाता है। दुनिया की मोह-माया से एकदम दूर, यह सिर्फ प्रेम और भक्ति की जगह है। जिस तरह भगवान श्रीकृष्ण सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण से ऊपर हैं, वैसे ही उनका यह धाम भी इन तीनों गुणों से परे है।

श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 15 का 6ठां श्लोक है जिसमें श्री कृष्ण कहते हैं-

न तद्भासयते सूर्यो न शशाङ्को न पावकः।
यदग्त्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम॥

इसका अर्थ है- मेरे परमधाम को रोशन करने के लिए सूरज, चांद या आग की जरूरत नहीं है। जो इंसान एक बार वहां पहुंच जाता है, वह इस जन्म-मरण की दुनिया में कभी लौटकर नहीं आता, बल्कि हमेशा के लिए मेरा हो जाता है।

कैसा दिखता है श्रीकृष्ण का गोलोक?

ब्रह्मवैवर्त पुराण की मानें तो गोलोक, वैकुंठ लोक से भी 50 करोड़ योजन ऊपर है और ब्रह्मांड के पार परम ज्योति में स्थित है। इसके बाईं ओर शिव लोक है।

वैकुंठ और गोलोक में क्या अंतर है?

कुछ लोग दोनों को एक ही समझते हैं लेकिन, 'वैकुंठ' का मतलब है कि 'जहां कोई कुंठा यानी दुख या चिंता न हो'। वैकुंठ तक पहुंचने के लिए सात दिव्य दरवाजे पार करने पड़ते हैं। यह क्षीरसागर (दूध के समुद्र) की गहराई में स्थित है, जहां सृष्टि को चलाने वाले भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी वास करते हैं। वहीं, गोलोक ब्रह्मांड से भी ऊपर वह दिव्य जगह है, जहां भगवान श्रीकृष्ण अपनी राधारानी के साथ प्रेम और आनंद में लीन रहते हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न       माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।