अभिमन्यु की मृत्यु के बाद श्रीकृष्ण ने अर्जुन से क्या कहा था? महाभारत में मिलता है ये भावुक प्रसंग
महाभारत में अभिमन्यु की मृत्यु के बाद अर्जुन के गहरे शोक को श्रीकृष्ण ने सांत्वना दी। कृष्ण ने अर्जुन को ...और पढ़ें

अभिमन्यु की मृत्यु पर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कैसे संभाला महाभारत का मार्मिक प्रसंग (Picture Credit: AI Generated)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महाभारत में न जाने कितनी ऐसी कहानियों का जिक्र मिलता है जिसे आज भी लोग गहराई से सुनना चाहते हैं। ऐसे ही एक योद्धा अभिमन्यु की कहानी भी है जिसने उस समय से लेकर आज तक मन में कई सवाल छोड़े हैं।
महाभारत का युद्ध एक ऐसा समय जिसने अपनों को ही एक-दूसरे के खून का प्यासा बना दिया था। कुरुक्षेत्र के मैदान का वो सबसे भावुक दृश्य अभिमन्यु की मृत्यु का था। एक सोलह साल का निहत्था बच्चा जो सिर्फ चक्रव्यूह के भीतर प्रवेश करना जानता था, लेकिन उसे भेदकर वापस नहीं आ सका।
वास्तव में युद्ध का तेरहवां दिन सबसे ज्यादा भावुक था जब एक छोटे से बालक की जान गई। अभिमन्यु की मृत्यु ने पिता अर्जुन ही नहीं बल्कि सभी पांडवों को झकझोर कर रख दिया था और सभी ये जानना चाहते थे कि आखिर क्यों उसकी निर्मम हत्या कर दी गई।
आज भी हम सभी के मन में अभिमन्यु की मृत्यु को लेकर कई सवाल आते हैं। जैसे जब अर्जुन को अपने पुत्र की मृत्यु का समाचार मिला तो क्या हुआ? श्री कृष्ण ने उस बालक को बचाया क्यों नहीं? उसकी मृत्यु के बाद कृष्ण ने अर्जुन से क्या कहा होगा? आइए आपको बताते हैं इन सवालों के जवाब।
अभिमन्यु की मृत्यु के बाद कैसा था दृश्य?
कुरुक्षेत्र के मैदान में रात के अंधेरे के बीच अर्जुन अपने ही पुत्र की मृत्यु के बाद टूट चुका था। गांडीव धनुष जो दुश्मनों के सीने में खौफ पैदा करता था वह जमीन पर बेजान धूल में पड़ा था और दुनिया का सबसे सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर घुटनों के बल बैठा था।
उसकी आंखों से आंसुओं की एक ना रुकने वाली धारा बह रही थी और अर्जुन कांपते हुए होंठों से एक ही नाम पुकार रहे थे अभिमन्यु। ऐसे में श्री कृष्ण अर्जुन के शिविर में प्रवेश करते हैं और धीरे से आगे बढ़ते हैं। श्री कृष्ण की आवाज सुनकर अर्जुन आंखें ऊपर करके उन्हें देखते हैं और उसकी आंखों में केवल आंसू नहीं बल्कि अपनों से मिले धोखे की एक आग भी थी।
अर्जुन की आंखों में अनगिनत सवाल थे और वासुदेव कहते हैं 'आज जो हुआ है वह कौरवों की जीत या तुम्हारी हार नहीं है। यह तो महाकाल के उस विशाल चक्र का एक मोड़ था जिसे रोकना स्वयं मेरे लिए भी इस पूरी सृष्टि के अटल नियमों को तोड़ने के समान था।'
अभिमन्यु की मृत्यु के बाद कृष्ण ने अर्जुन से कही ये बात
अभिमन्यु की मृत्यु के बाद अर्जुन के विलाप और श्रीकृष्ण द्वारा उन्हें सांत्वना देने का यह भावुक प्रसंग महर्षि वेद व्यास द्वारा रचित महाभारत के द्रोण पर्व के 'अभिमन्यु-वध पर्व' में मिलता है।
अर्जुन से श्री कृष्ण कहते हैं कि- हर घटना का एक कारण है और हर बात का एक मूल्य। जयद्रथ द्वारा द्रोपदी हरण पहले से ही निश्चित था। कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि 'जो जन्म लेता है, उसकी मृत्यु सुनिश्चित है और जो मृत्यु को प्राप्त होता है, उसका पुनर्जन्म भी निश्चित है। इसलिए धर्म के मार्ग पर चलते हुए शोक में डूबने के बजाय अपने कर्तव्य का पालन करना ही क्षत्रिय का धर्म है।'
कृष्ण की बात सुनकर अर्जुन ने खुद को एक क्षत्रिय की तरह फिर से तैयार किया और युद्ध भूमि में फिर से निकल पड़े आगे धर्म की लड़ाई के लिए।
वास्तव में अभिमन्यु की मृत्यु का पल सबसे भावुक था जब एक सोलह साल के छोटे से बच्चे की युद्ध भूमि में मृत्यु हो गई, लेकिन युद्ध तब भी नहीं थमा और पांडवों ने अपने आगे के लक्ष्य के साथ अगले दिन युद्ध भूमि में कदम रखा।
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