आज घर-घर मनाई जाएगी 'श्रीकृष्ण की छठी', शाम को इस शुभ मुहूर्त पर करें पूजा
जन्माष्टमी के छह दिन बाद भगवान श्रीकृष्ण की छठी मनाई जाती है, जिसमें बाल गोपाल का विशेष श्रृंगार कर सात्विक ...और पढ़ें

श्रीकृष्ण छठी 2026 । (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
जन्माष्टमी के छह दिन बाद मनाई जाती है श्रीकृष्ण की छठी।
बाल गोपाल का विशेष श्रृंगार कर सात्विक भोग लगाएं।
सुख-समृद्धि और सकारात्मकता के लिए करें छठी पूजा।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जन्माष्टमी के बाद हर घर में भगवान श्रीकृष्ण की छठी बड़ी श्रद्धा से मनाई जाती है। जैसे एक नवजात बच्चे के जन्म के छठे दिन छठी का त्योहार मनाया जाता है, वैसे ही बाल कृष्ण के जन्म के छठे दिन भी इस उत्सव को मनाने की परंपरा है। इस दिन भक्त अपने लड्डू गोपाल का बहुत ही सुंदर और आकर्षक श्रृंगार करते हैं। उन्हें नए-नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और मोर मुकुट सजाया जाता है। साथ ही बाल गोपाल को प्रसन्न करने के लिए कई तरह के सात्विक व्यंजन जैसे कढ़ी-चावल, हलवा, पूड़ी और मक्खन-मिश्री का भोग लगाया जाता है।
माना जाता है कि इस दिन पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं इस साल श्रीकृष्ण छठी (Krishna Chhathi 2026 Time Puja Vidhi) की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और इसकी सही विधि क्या है।
कब है श्रीकृष्ण की छठी?
वर्ष 2026 में लड्डू गोपाल की छठी 9 सितंबर 2026, बुधवार को मनाई जा रही है। यह जन्माष्टमी के छह दिन बाद पड़ रही है। इस दिन घर के मंदिर में बाल गोपाल का विशेष पूजन किया जाता है। भक्त उन्हें नए वस्त्र पहनाते हैं, उनका श्रृंगार करते हैं और झूला झुलाते हैं।
क्यों मनाई जाती है श्रीकृष्ण की छठी?
हिंदू धर्म में बच्चे के जन्म के छठे दिन छठी मनाने की परंपरा रही है। इस दिन नवजात शिशु की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाती है। इसी परंपरा के अनुसार जन्माष्टमी के छह दिन बाद भगवान श्रीकृष्ण की छठी मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन लड्डूगोपाल की पूजा करने से घर में सुख-शांति और सकारात्मकता बनी रहती है। भक्त इस अवसर पर उन्हें अपने परिवार के छोटे बच्चे की तरह प्रेम और स्नेह से सजाते हैं।
श्रीकृष्ण की छठी का शुभ मुहूर्त
लड्डू गोपाल की छठी की पूजा शाम 4 बजे के बाद की जा सकती है। विशेष रूप से प्रदोष काल या गौधूलि बेला में बाल गोपाल की पूजा करना शुभ माना जाता है। हालांकि, लोग अपनी सुविधा के अनुसार सुबह भी भगवान श्रीकृष्ण की छठी का उत्सव मना सकते हैं।
छठी पूजा के लिए क्या-क्या सामग्री चाहिए?
छठी की पूजा के लिए बहुत अधिक सामग्री की जरूरत नहीं होती। श्रद्धा और भक्ति से पूजा करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। पूजा के लिए आप ये चीजें रख सकते हैं:
- पंचामृत के लिए दूध, दही, घी, शहद और शक्कर
- गंगाजल और शुद्ध जल
- लड्डू गोपाल के लिए नए पीले वस्त्र
- मुकुट, बांसुरी और मोरपंख
- तुलसी दल
- काजल
- पीली सरसों और थोड़ा नमक
- कढ़ी-चावल
- माखन-मिश्री
- धनिया की पंजीरी
- मखाने की खीर
- फल और पंचमेवा
कैसे करें श्रीकृष्ण की छठी की पूजा?
- छठी के दिन सुबह घर और पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें। शाम के समय लड्डू गोपाल को सबसे पहले शुद्ध जल से स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें पंचामृत स्नान कराएं और फिर दोबारा साफ जल से स्नान कराएं।
- अब बाल गोपाल को साफ कपड़े से पोंछकर नए पीले वस्त्र पहनाएं। उनका मुकुट, मोरपंख और बांसुरी से सुंदर श्रृंगार करें। इसके बाद उन्हें झूले में विराजमान करें।
- पूजा के दौरान भगवान को चंदन, अक्षत, फूल और तुलसी दल अर्पित करें। इसके बाद माखन-मिश्री, कढ़ी-चावल, धनिया पंजीरी, खीर, फल और पंचमेवा का भोग लगाएं। भोग में तुलसी दल रखना शुभ माना जाता है।
- अंत में श्रीकृष्ण की आरती करें और भजन-कीर्तन करें। परिवार के सभी सदस्य बाल गोपाल का आशीर्वाद लें और प्रसाद ग्रहण करें।
छठी पर लड्डू गोपाल को क्या भोग लगाएं?
श्रीकृष्ण की छठी पर कढ़ी-चावल का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए इस दिन सात्विक तरीके से कढ़ी-चावल बनाकर बाल गोपाल को भोग लगाया जाता है। कढ़ी में प्याज और लहसुन का इस्तेमाल न करें।
इसके अलावा भगवान श्रीकृष्ण को प्रिय माखन-मिश्री भी भोग में जरूर शामिल करें। धनिया की पंजीरी, मखाने की खीर, पेड़ा या अन्य सात्विक मिठाई भी अर्पित की जा सकती है। अपनी श्रद्धा के अनुसार ताजे फल और पंचमेवा भी भोग में रखें।
छठी पर करें बाल गोपाल का विशेष श्रृंगार
इस दिन लड्डू गोपाल को नए पीले या अपनी पसंद के सुंदर वस्त्र पहनाएं। मुकुट पर मोरपंख लगाएं और हाथ में बांसुरी सजाएं। चाहें तो उन्हें झूले पर बैठाकर झूला झुलाएं। घर के सभी सदस्य मिलकर कृष्ण भजन गाएं और आरती करें।
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