विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

क्या बच्चों को भुगतना पड़ता है माता-पिता के कर्मों का फल? गरुड़ पुराण में छिपा उत्तर

Published: Tue, 08 Sep 2026 02:02 PM (IST)

गरुड़ पुराण के अनुसार, व्यक्ति के कर्मों का फल उसे खुद मिलता है, पर माता-पिता के कर्म बच्चों को प्रभावित ...और पढ़ें

बच्चों पर माता-पिता के कर्मों का असर (Picture Credits- AI Images)

बच्चों पर माता-पिता के कर्मों का असर (Picture Credits- AI Images)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गरुड़ पुराण हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथों में से एक है, जो कर्म, जीवन, मृत्यु और उसके बाद की अवस्थाओं को गहराई से समझाने की कोशिश करता है। गरुड़ पुराण के अनुसार व्यक्ति अपने जीवन में जैसे कर्म करता है, उसे वैसा ही फल मिलता है।

अर्थात कर्म का सीधा प्रभाव उसी व्यक्ति पर पड़ता है जिसने कर्म किया है। लेकिन कुछ खास परिस्थितियों में व्यक्ति के कर्म का प्रभाव उससे जुड़े लोगों के जीवन में असर दिखा सकता है। हमने कभी न कभी यह बात सुनीं होगी कि, माता-पिता के कर्म बच्चों पर भी असर दिखा सकते हैं। आइए गरुड़ पुराण से समझते हैं इसके पीछे का सच।

कोई भी कर्म निष्फल नहीं होता

व्यक्ति द्वारा किया गया कोई भी कर्म निष्फल नहीं होता है। यदि उसका फल कर्ता को नहीं मिलता है, तो पुत्र, पौत्र या आगे की संतानों तक उसका फल मिल सकता है। लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं कि बच्चे को ठीक वही कर्मफल मिलेगा जो माता-पिता को मिला।

बच्चों पर माता-पिता के कर्मों का असर

बच्चों पर माता-पिता के कर्म का असर कैसे पड़ता है?

गरुड़ पुराण के मुताबिक, अगर माता-पिता ने किसी को धोखा दिया तो उनके बच्चों को भी समाज में विश्वास की कमी जैसे परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। यानि माता-पिता के कर्मों का असर बच्चों पर सामाजिक, मानसिक या जीवन की अलग-अलग परिस्थितियों पर पड़ सकता है।

क्या धर्म-कर्म से जुड़े कार्यों का फल दूसरों को मिलता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार, श्राद्ध, यज्ञ, दान, प्रार्थना और संकल्प जैसे धार्मिक कर्मों का फल यानी पुण्य दूसरों को भी मिल सकता है। खासकर तब जब वह काम दूसरों के कल्याण के लिए किया गया हो और उन्हें समर्पित हो।

इसी तरह माता-पिता के अच्छे-बुरे कार्य का असर उनकी संतानों और परिवार पर पड़ सकता है। हर व्यक्ति अपने कर्मों के लिए खुद जिम्मेदार है। इसलिए अच्छे कर्म सिर्फ अपने लिए ही नहीं, बल्कि परिवार और सदस्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पैदा कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें- गरुड़ पुराण में पुनर्जन्म का रहस्य: मृत्यु के बाद आत्मा कितने समय बाद लेती है नया जन्म?

यह भी पढ़ें- गरुड़ पुराण की चेतावनी: इन 5 तरह के लोगों से दोस्ती करने पर हर मोड़ पर मिलता है धोखा

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।