सांप से भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है दुर्जन व्यक्ति? जानिए आचार्य चाणक्य ने क्या कहा है
आचार्य चाणक्य ने दुर्जन व्यक्ति और सांप की तुलना करते हुए क्या कहा है? जानिए चाणक्य नीति के इन महत्वपूर्ण श्लोकों का सरल अर्थ। ...और पढ़ें

चाणक्य नीति के महत्वपूर्ण श्लोक (AI-Generated Image)
HighLights
चाणक्य ने दुर्जन व्यक्ति को सांप से अधिक खतरनाक बताया है
सज्जन लोग कठिन परिस्थितियों में भी अपने संस्कार नहीं छोड़ते
अच्छे और बुरे लोगों की पहचान जीवन में बहुत जरूरी है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आचार्य चाणक्य को भारत के महानतम नीति-निर्माताओं और विद्वानों में गिना जाता है। उनकी नीतियां केवल राजकाज तक सीमित नहीं थीं, बल्कि सामान्य जीवन को बेहतर बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण मार्गदर्शन देती हैं।
चाणक्य नीति में ऐसे कई श्लोक मिलते हैं जो मनुष्य को अच्छे और बुरे लोगों की पहचान करना सिखाते हैं। इन्हीं में से एक नीति दुर्जन व्यक्ति और सांप की तुलना से जुड़ी है। इन तीन श्लोकों के माध्यम से जानिए कि उन्होंने दुर्जन व्यक्ति की तुलना सांप से क्यों की।
एतदर्थकुलीनानांनृपाःकुर्वतिसंग्रहम्।
आदिमध्यावसानेषुनत्य जन्तिचतेनृपम्।।
चाणक्य कहते हैं कि सज्जन और कुलीन लोगों का सम्मान हर जगह होता है। ऐसे लोग अपने व्यवहार, चरित्र और संस्कारों के कारण समाज में विशेष स्थान प्राप्त करते हैं। यही कारण है कि राजा भी योग्य और चरित्रवान लोगों को अपने साथ रखने का प्रयास करते थे। अच्छे लोगों की संगति व्यक्ति के जीवन को सही दिशा देने का काम करती है।
प्रलयेभिन्नमर्यादाभवन्तिकिलसागराः।
सागराभेदमिच्छन्तिप्रलयेऽपिनसाधवः।।
एक अन्य श्लोक में चाणक्य बताते हैं कि प्रलय के समय समुद्र भी अपनी मर्यादा तोड़ सकता है, लेकिन सज्जन व्यक्ति कठिन से कठिन परिस्थिति में भी अपने सिद्धांतों और मूल्यों का त्याग नहीं करता। यह शिक्षा बताती है कि वास्तविक महानता व्यक्ति के चरित्र में होती है, जो हालात बदलने पर भी नहीं बदलती।
दुर्जनस्वचसर्पस्यवरंस नदुर्जनः।
सर्योदशतिकालेतुदुर्जनस्तुपदेपदे।।
चाणक्य की सबसे प्रसिद्ध सीखों में से एक है कि दुर्जन व्यक्ति की तुलना में सांप बेहतर माना जा सकता है। इसका कारण बताते हुए वे कहते हैं कि सांप केवल विशेष परिस्थिति में ही डंसता है, लेकिन दुर्जन व्यक्ति हर कदम पर नुकसान पहुंचाने का अवसर खोजता रहता है। ऐसे लोग अपने स्वार्थ के लिए दूसरों को धोखा देने या परेशानी में डालने से भी नहीं हिचकते।
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गलत लोगों का साथ खड़ा करता है परेशानियां
इसलिए चाणक्य सलाह देते हैं कि जीवन में मित्र, सहयोगी और परिचित चुनते समय सावधानी बरतनी चाहिए। किसी व्यक्ति का बाहरी व्यवहार देखकर उस पर तुरंत विश्वास नहीं करना चाहिए, बल्कि उसके आचरण और स्वभाव को समझना जरूरी है। सही संगति व्यक्ति को सफलता और सम्मान दिलाती है, जबकि गलत लोगों का साथ जीवन में कई समस्याएं खड़ी कर सकता है।
चाणक्य की ये बातें आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी सदियों पहले थीं। उनका संदेश स्पष्ट है कि अच्छे चरित्र वाले लोगों का साथ जीवन को बेहतर बनाता है, जबकि दुर्जनों से दूरी बनाए रखना ही सबसे बड़ी बुद्धिमानी है।
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