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    चाणक्य नीति: सामने आ जाएगा हर किसी का असली चेहरा, सही इंसान की परख के लिए अपनाएं 4 तरीके

    Updated: Tue, 26 May 2026 05:54 PM (IST)

    आचार्य चाणक्य के अनुसार, किसी व्यक्ति की पहचान उसके शब्दों से नहीं, बल्कि उसके गुणों करनी चाहिए, तभी आप उसका असली चेहरा पहचान पाएंगे। ...और पढ़ें

    व्यक्ति को परखने के 4 अचूक तरीके (Picture Credit- AI Generated)

    व्यक्ति को परखने के 4 अचूक तरीके (Picture Credit- AI Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आचार्य चाणक्य एक महान कूटनीतिज्ञ थे। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में बताया है कि आप किस तरह किसी भी इंसान की परख कर सकते हैं। अगर आप चाणक्य के बताए गए तरीके से किसी व्यक्ति को परखते हैं, तो आप आपको जीवन में कभी धोखा नहीं खाते। चलिए जानते हैं इस बारे में।

    यथा चतुर्भिः कनकं परीक्ष्यते निघर्षणं छेदनतापताडनैः।
    तथा चतुर्भिः पुरुषं परीक्ष्यते त्यागेन शीलेन गुणेन कर्मणा॥

    चाणक्य नीति के इस श्लोक में बताया गया है कि किस तरह आप मनुष्य के वास्तविक चरित्र को परख सकते हैं। आचार्य चाणक्य के अनुसार, जिस तरह सोने को चार प्रकार से परखा जाता है - घिसकर, काटकर, तपाकर और पीटकर, ठीक उसी तरह एक अच्छे इंसान की पहचान के लिए भी 4 कसौटियां त्याग, शील (आचरण), गुण और कर्म हैं। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं -

    • त्याग - जो व्यक्ति दूसरों के सुख के लिए अपने सुख या स्वार्थ का त्याग कर सके, वही सच्चा और भरोसेमंद इंसान है।
    • शील - जिसका चरित्र उत्तम हो और मन में दूसरों के प्रति गलत भावना न हो, उस व्यक्ति पर भी विश्वास किया जा सकता है।
    • गुण - व्यक्ति का ज्ञान, समझ और उसकी सहनशीलता उसके वास्तविक गुण होते हैं जो संकट के समय ही झलकते हैं।
    • कर्म - इंसान की नीयत उसके कार्यों से स्पष्ट होती है। जो लोग अधार्मिक तरीकों से धन कमाते हैं या गलत कर्म करते हैं, उनसे हमेशा दूरी बनाकर रखनी चाहिए।
    Chanakya ai (2)
    (Picture Credit- AI Generated)

    क्या है संगति का महत्व?

    दर्शनध्यानसंस्पर्शेर्मत्सी कूर्मी च पक्षिणी।
    शिशुं पालयते नित्यं तथा सज्जनसंगतिः ।।

    चाणक्य नीति का यह श्लोक सत्संगति (सज्जन पुरुषों की संगति) के अद्भुत और कल्याणकारी प्रभाव को दर्शाता है। इस श्लोक का अर्थ है कि जैसे मछली केवल अपने बच्चों को देखकर, कछुआ ध्यान (मानसिक विचार) द्वारा, और मादा पक्षी स्पर्श करके अपने बच्चों का सदा लालन-पालन करती हैं, ठीक उसी तरह सज्जन व्यक्ति की संगति मनुष्य का मार्गदर्शन और पोषण करती है।

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    साधारण शब्दो में कहें, तो यह श्लोक बताता है कि जैसे मां अपने बच्चों का पालन-पोषण करती है, वैसे ही श्रेष्ठ लोगों की संगति में रहने से मनुष्य के गुणों का स्वतः ही विकास होने लगता है। सत्संगति मनुष्य को बुराइयों से बचाकर सही मार्ग पर ले जाती है। ऐसे में अगर आप जीवन में सफलता चाहते हैं, तो इस बात का खासतौर से ध्यान रखें कि आपकी संगति क्या है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।