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    क्यों सब कुछ पाकर भी लोग रहते हैं दुखी? चाणक्य नीति ने बताई वो 3 चीजें, जहां संतोष ही सबसे बड़ा धन है

    Updated: Sat, 23 May 2026 07:45 PM (IST)

    आचार्य चाणक्य की नीति मनुष्य को जीवन में संतुष्टि और असंतुष्टि के सही संतुलन का मार्ग दिखाती है। ...और पढ़ें

    सुखमय जीवन के लिए इन 3 चीजों में करें संतोष (Picture Credit- AI Generated)

    सुखमय जीवन के लिए इन 3 चीजों में करें संतोष (Picture Credit- AI Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य को जीवन में सुख और शांति पाने के लिए अपनी इच्छाओं को सीमित करना जरूरी है। चाणक्य नीति के अनुसार, जिस व्यक्ति ने जीवन में इन चीजों में संतोष कर लिया, वह सुखी जीवन जीता है। चलिए जानते हैं इस बारे में।

    इन चीजों में रखें संतोष

    संतोषषस्त्रिषु कर्तव्य: स्वदारे भोजने धने।
    त्रिषु चैव न कर्तव्यो अध्ययने जपदानयो:।।

    1. भोजन में संतोष - चाणक्य नीति का यह श्लोक कहता है कि जितना भी भोजन आपको मिले और जैसा भी सात्विक भोजन उपलब्ध हो, उसी में संतुष्ट रहना चाहिए। स्वाद और लालच के पीछे भागकर जरुरत से ज्यादा खाना हमेशा शारीरिक कष्ट का कारण बनता है। ऐसे में भोजन का अनादर या उसकी बुराई कभी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इसका असर आपके भाग्य और सेहत दोनों पर ही पड़ता है।

    2. धन में संतोष - अपनी मेहनत और ईमानदारी से जितना धन आपने कमाया है हमेशा उसी में खुश रहना सीखें। दूसरों के धन को देखकर लालच करना या ज्यादा कमाने की दौड़ में व्यक्ति की मानसिक शांति नष्ट हो जाती है। आचार्य चाणक्य का कहना है कि अपनी क्षमता से ज्यादा खर्च करने से व्यक्ति कर्ज में डूब जाता है। इसलिए इस बात का हमेशा ध्यान रखें।

    3. जीवनसाथी में संतोष - जो लोग अपने जीवनसाथी (पति या पत्नी) के रूप-रंग या स्वभाव में ही संतुष्ट रहते हैं और उनका सम्मान करते हैं, उनका वैवाहिक जीवन हमेशा शांतिपूर्ण तरीके से बीतता है। वहीं जो लोग अपने पार्टनर से संतुष्ट नहीं रहते और दूसरों की ओर आकर्षित होते हैं, उसका जीवन हमेशा दुख-दर्द से भरा रहता है।

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    Chanakya Niti Ai (6)

    (Picture Credit- AI Generated)

    इन 3 चीजों में न करें संतोष

    आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में कुछ ऐसी भी चीजों का जिक्र किया गया है कि जीवन में किन चीजों से कभी संतुष्ट नहीं होना चाहिए, तभी आप सफलता की ओर अग्रसर हो सकते हैं। इसमें शामिल है - विद्या यानी ज्ञान पाने की इच्छा, जप यानी ईश्वर की भक्ति और दान। इन तीन चीजों को लेकर मनुष्य को कभी संतोष नहीं करना चाहिए और हमेशा इन्हें बढ़ाने का प्रयास करते रहना चाहिए।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।