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    सफलता के करीब पहुंचकर भी क्यों हो जाता है इंसान नाकाम, इस बारे में क्या कहते हैं आचार्य चाणक्य?

    Updated: Wed, 20 May 2026 04:16 PM (IST)

    आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में बताया है कि जीवन में कई गई कौन-सी गलतियां आपको नुकसान में डाल सकती हैं। ...और पढ़ें

    चाणक्य के अनुसार, जीवन में इन गलतियों से बचें।

    चाणक्य के अनुसार, जीवन में इन गलतियों से बचें।

    HighLights

    1. अपनी कुछ बातों को हमेशा गोपनीय रखें

    2. अत्यधिक सीधा या भोला होना ठीक नहीं

    3. किसी भी कार्य को निष्पक्ष भाव से पूरा करें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कभी-कभी भूल में की गई कुछ गलतियां व्यक्ति के नुकसान का कारण बन जाती हैं। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में उन गलतियों का वर्णन किया है, जो व्यक्ति के नुकसान का कारण बन सकती हैं। चलिए जानते हैं इस बारे में।

    भूलकर भी न करें ये गलती

    अर्थनाशं मनस्तापं गृहिण्याश्चरितानि च।
    नीचं वाक्यं चापमानं मतिमान्न प्रकाशयेत्॥

    चाणक्य नीति का यह श्लोक बताता है कि अपने जीवन के कुछ पहलुओं को गोपनीय रखने में ही समझदारी है। इस श्लोक में कहा गया है कि बुद्धिमान व्यक्ति को अपनी इन पांच बातों का जिक्र किसी के सामने नहीं करना चाहिए, चाहे फिर वह व्यक्ति आपके कितना ही करीब क्यों न हो। वह 5 बातें इस प्रकार हैं -
    धन का नाश, मन का दुख , घर की बातें, किसी दूसरो द्वारा किया गया अपमान, अपनी कमजोरियां

    chanakya AI

    (Picture Credit- AI Generated)

    न करें ज्यादा भोले होने की गलती

    "नात्यन्तं सरलैर्भाव्यं गत्वा पश्य वनस्थलीम् ।
    छिद्यन्ते सरलास्तत्र कुब्जास्तिष्ठन्ति पादपाः॥"

    इस श्लोक में कहा गया है कि किसी व्यक्ति बहुत ज्यादा सीधा या भोला नहीं होना चाहिए। चाणक्य कहते हैं कि जंगल में सीधे पेड़ों को सबसे पहले काटा जाता है और टेढ़े-मेढ़े पेड़ बचे रह जाते हैं। ठीक उसी तरह सबसे पहले सीधे लोगों को ही अपना निशाना बनाया जाता है। इसलिए जीवन में थोड़ी चालाकी भी जरूरी है।

    ये गलती पड़ सकती है भारी

    यो ध्रुवाणि परित्यज्य अध्रुवं परिषेवते ।
    ध्रुवाणि तस्य नश्यन्ति चाध्रुवं नष्टमेव हि ॥

    इस श्लोक में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि, जो लोग किसी नाशवंत चीज (नष्ट हो जाने वाली वस्तु) के मोह मे आकर कभी नाश नहीं होने वाली चीज को भी छोड़ देते हैं, तो उसके हाथ अंत में कुछ नहीं आता। क्योंकि अविनाशी वस्तु भी उनके हाथ से चली जाती है और नाशवान को भी वह खो देते हैं। अंत में वह खाली हाथ ही रह जाते हैं।

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    Chanakya Niti ai (4)

    (Picture Credit- AI Generated)

    इस तरह करें कोई भी काम

    न स्नेहात् कृत्वा विघ्नं न द्वेषात् न च लोभतः।
    न मोहत् कार्यमत्यन्तं कार्यं कार्यवदाचरेत्॥

    चाणक्य नीति का यह श्लोक कहता है कि कर्म को हमेशा निष्पक्षता होकर ही करना चाहिए है। इस श्लोक में कहा गया है कि किसी भी कार्य को न तो अत्यधिक स्नेह में आकर, न द्वेष, न लोभ और न ही मोह में आकर रोकना या बाधित करना चाहिए। उस कार्य को हमेशा उसके उचित तरीके से ही पूरा करना चाहिए, तभी सही मायने में वह काम सफल माना जाएगा।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।