अक्षय तृतीया ही नहीं, साल के इन 'अबूझ मुहूर्तों' पर बिना पंचांग देखे कर सकते हैं शुभ कार्य
क्या आप जानते हैं कि साल में कुछ ऐसे विशेष दिन भी आते हैं, जब आपको पंडित जी से मुहूर्त निकलवाने या पंचांग देखने की कोई जरूरत नहीं होती? ...और पढ़ें

इन तिथियों पर बिना पंचांग देखे करें शुभ कार्य (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
साल का सबसे बड़ा अबूझ मुहूर्त है अक्षय तृतीया
वसंत पंचमी, फुलेरा दूज, दशहरा भी हैं अबूझ मुहूर्त
देवउठनी एकादशी है विवाह के लिए सबसे पवित्र दिन
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। अक्षय तृतीया या आखा तीज को साल का सबसे बड़ा अबूझ मुहूर्त माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्यों, दान और स्नान का फल 'अक्षय' (यानी कभी खत्म नहीं होता) रहता है। विवाह, आभूषणों की खरीदारी और गृह प्रवेश के लिए यह दिन सर्वोत्तम है।
इसके अलावा भी ज्योतिष और धर्म शास्त्रों में कुछ विशेष तिथियों को 'अबूझ मुहूर्त' या 'सिद्ध मुहूर्त' कहा गया है। इन दिनों पर ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति अपने आप में इतनी पवित्र होती है कि आप पूरे दिन में किसी भी समय बेझिझक कोई भी शुभ कार्य कर सकते हैं।
1. वसंत पंचमी
माघ महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाली पंचमी तिथि पर वसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है। यह दिन पूर्ण रूप से ज्ञान और कला की देवी सरस्वती को समर्पित है। किसी भी नए काम की शुरुआत, विद्यारंभ और विवाह के लिए इस दिन को अत्यंत शुभ और दोषमुक्त अबूझ मुहूर्त माना जाता है।
2. फुलेरा दूज
फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर फुलेरा दूज मनाई जाती है। इसी दिन से मथुरा-वृंदावन में होली के उत्सव की शुरुआत होती है। ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार, यह दिन हर तरह के दोषों से मुक्त होता है। इसलिए जिन लोगों की शादी के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं निकल पाता, वह इस दिन बिना सोचे विवाह कर सकते हैं।
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3. विजयादशमी या दशहरा
आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर दशहरा मनाया जाता है। यह दिन भगवान श्रीराम की रावण पर और माता दुर्गा की महिषासुर पर विजय का प्रतीक है। इसे 'सिद्ध मुहूर्त' कहा जाता है। इस दिन पर आप वाहन की खरीदारी, नया व्यापार या अन्य मांगलिक कार्य कर सकते हैं, जिसके परिणाम हमेशा शुभ होते हैं। वहीं कुछ लोग राम नवमी को भी एक अबूझ मुहूर्त मानते हैं।
4. देवउठनी एकादशी
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव प्रबोधिनी या देवउठनी एकादशी भी कहते हैं। चातुर्मास के दौरान 4 महीने तक मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है और इसी दिन पर इन कार्यों पर लगी रोक हटती है। माना जाता है कि इसी तिथि पर भगवान विष्णु योग निद्रा से जागते हैं, जिसके बाद विवाह आदि कार्य फिर से शुरू होते हैं। शादियों के लिए यह साल का सबसे पवित्र और बड़ा अबूझ मुहूर्त होता है।
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