खड़े होकर पूजा करना सही या गलत? जानिए क्या कहते हैं शास्त्र
शास्त्रों के अनुसार, पूजा हमेशा आसन पर बैठकर करनी चाहिए ताकि मन एकाग्र रहे और सकारात्मक ऊर्जा पृथ्वी में न ...और पढ़ें

खड़े होकर पूजा क्यों नहीं करनी चाहिए? (Picture Credits- AI Images)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सच्चे मन से साधना करने से व्यक्ति को जीवन में बड़े सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं। कई लोग अनजाने में पूजा के दौरान कुछ गलतियां कर बैठते हैं, जिसकी वजह उन्हें पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है।
कई लोग खड़े होकर पूजा करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि खड़े होकर पूजा-अर्चना करना सही है या गलत? आइए इस आर्टिकल में आपको विस्तार से बताते हैं इसके बारे में।
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खड़े होकर पूजा करना सही या गलत?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रोजाना विधिपूर्वक पूजा करने से व्यक्ति का मन एकाग्र और शांत होता है। शास्त्रों के अनुसार, पूजा सदैव आसन पर बैठकर ही करनी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि खड़े होकर पूजा करने से शरीर और मन में अस्थिरता बनी रहती है। इसी वजह से प्रभु की आराधना में मन एकाग्र नहीं हो पाता है और भटकता रहता है। इसलिए कहा जाता है कि प्रभु की साधना सदैव बैठकर ही करनी चाहिए। खड़े होकर पूजा करने से शरीर में उत्पन्न होने वाली सकारात्मक ऊर्जा सीधे पृथ्वी में समा जाती है, जिससे पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि किसी भी देवी-देवता की आरती हमेशा अपने स्थान पर खड़े होकर ही की जाती है। बैठकर आरती करने से बचना चाहिए। इसके अलावा, पूजा के अंत में भगवान की मूर्ति की परिक्रमा खड़े होकर और सच्चे मन से करनी चाहिए। ऐसा करने से भक्त को पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
पूजा के महत्वपूर्ण नियम
सही दिशा- पूजा करते समय ध्यान रखें कि आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। इन दिशाओं को पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
आसन का प्रयोग- पूजा हमेशा आसन पर बैठकर ही करनी चाहिए। बिना आसन के पूजा करना शुभ नहीं माना जाता है। इसके साथ ही, पूजा के अंत में आसन के नीचे की भूमि को प्रणाम जरूर करें।
सिर ढंकना- पूजा और आरती करते समय साफ कपड़े से अपना सिर ढंकना चाहिए। इसे प्रभु के प्रति सम्मान और विनम्रता का प्रतीक माना जाता है।
जमीन पर न रखें पवित्र चीजें- इस बात का विशेष ध्यान रखें कि शालिग्राम, शिवलिंग, शंख, जनेऊ और देवी-देवताओं की मूर्तियों को सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिए। इससे देवी-देवताओं का अपमान होता है, इसलिए इन्हें हमेशा किसी साफ आसन, कपड़े या पात्र में ही रखें।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
