विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

क्‍या आप भी सिर ढककर करते हैं पूजा? आज से ही कर दें बंद वरना नहीं मिलेगा फल

Published: Wed, 05 Aug 2026 06:27 PM (IST)

हिंदू धर्म, शास्त्रों और कूर्म पुराण में वर्णित मान्यताओं के अनुसार पूजा, आचमन और ध्यान के दौरान सिर ढकने से ...और पढ़ें

पूजा करते समय सिर ढकने की धार्मिक मान्यताएं । (Picture Credit- AI Generated)

पूजा करते समय सिर ढकने की धार्मिक मान्यताएं । (Picture Credit- AI Generated)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पूजा-पाठ, जप, ध्यान और यज्ञ जैसे धार्मिक कार्यों के लिए अनेक नियम बताए गए हैं।कई बार तो लोग नियमों और मान्‍ताओं को लेकर भ्रमित भी हो जाते हैं। इन्‍हीं में से एक है सिर ढककर पूजा करना। लोगों में इस बात को लेकर भ्रम है कि पूजा करते वक्‍त सिर को ढकना चाहिए या नहीं। कई बार आपने देखा होगा कि पूजा करते वक्‍त या हवन में बैठे हुए पुरुष सिर पर गमछा, तौलिया या रूमाल डाल लेते हैं। जबकि कूर्म पुराण के 13वें अध्याय के 10वें श्‍लोक में साफ बताया गया है कि पूजा करते वक्‍त या कोई ग्रंथ पढ़ते वक्‍त सिर नहीं ढकना चाहिए। चलिए जानते हैं कि आखिर क्‍यों पूजा-पाठ के वक्‍त सिर नहीं ढकना चाहिए, क्‍या केवल पुरुषों को ही सिर ढकने से मनाही है या फिर महिलाओं का सिर ढकना भी वर्जित है।

सिर ढककर पूजा करने का शास्त्रीय दृष्टिकोण

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा के दौरान शरीर और मन दोनों की शुद्धता का विशेष महत्व बताया गया है। सिर ढककर आचमन करना उचित नहीं माना गया है। यदि आप सिर ढककर यह काम करते हैं, तो इसे धार्मिक रूप से शुद्ध नहीं माना जाएगा।

इसी प्रकार ध्यान करते समय भी सिर को किसी कपड़े से ढककर बैठना निषेध बताया गया है। मान्यता है कि ध्यान के दौरान साधक का मन, शरीर और आस-पास के वातावरण में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं होनी चाहिए। सिर पर वस्‍त्र रखने से दिमाग में कहीं न कहीं उसका भी ख्‍याल रहता है, जो ध्‍यान को भंग करता है।

पूजा के वक्‍त क्‍या महिलाओं को सिर ढकना चाहिए ?

नहीं, धार्मिक शास्‍त्रों के अनुसार महिलाओं को भी भगवान की पूजा या ध्‍यान करते वक्‍त सिर ढकने की आवश्‍यकता नहीं है। हां, भगवान के प्रति सम्‍मान दिखाते वक्‍त आरती और प्रसाद लेते वक्‍त जरूर ढक लेना चाहिए। यह काम महिलाओं के साथ-साथ पुरुष भी कर सकते हैं।

हां, यदि महिलाएं सिर ढक भी लेती हैं, तो यह निषेध नहीं है क्‍योंकि महिलाओं के बाल लंबे होते हैं और पुरुषों की अपेक्षा अधिक झड़ते हैं, ऐसे में पूजा या किसी धार्मिक अनुष्‍ठान के वक्‍त शुद्धता बनाए रखने के लिए वे सिर को ढककर रखना चाहें, तो ऐसा किया जा सकता है।

अतः पूजा-पाठ का मुख्य उद्देश्य ईश्वर के प्रति श्रद्धा, भक्ति और प्रेम दर्शाना है। सिर ढककर ध्यान के वक्त जो ईश्वर की तरफ से ऊर्जा आती है, उसे ग्रहण नहीं किया जा पाता है, इसलिए केवल प्रसाद ग्रहण करते वक्त आरती लेते वक्त ही सिर को ढकना चाहिए, ताकि शुद्धता बनी रहे।

यह भी पढ़ें- दोपहर में पूजा करना शुभ या अशुभ? जानिए क्या कहते हैं नियम और कौन सा समय है सबसे बेस्ट

यह भी पढ़ें- क्या पूजा करते समय आपकी आंखों से भी आते हैं आंसू? जानिए ये किस बात का है बड़ा संकेत

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।