दक्षिण का काशी: 11वें ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम का इतिहास और पौराणिक महत्व
तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में स्थित रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से 11वां है, जिसे दक्षिण भारत का काशी ...और पढ़ें

भारत का 11वां ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। तमिलनाडु के रामानाथपुरम जिले के रामेश्वरम में स्थित है रामेश्वरम मंदिर जो 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से से 11वें नंबर पर आता है। यह ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम द्वीप पर बसा है। उत्तर भारत के काशी की जो धार्मिक मान्यता है, वही दक्षिण में रामेश्वरम की है। इसे दक्षिण भारत का काशी भी कहा जाता है।
रामेश्वरम जिसे रामनाथस्वामी मंदिर भी कहा जाता है। अपनी भव्य संचना, विशाल मीनारों, जटिल मूर्तिकला और गलियारों के लिए जाना जाता है। मंदिर में पूजे जाने वाले देवता लिंग के रूप में विराजमान हैं।
यहां नंदी की बेहद विशाल मूर्ति भी है, जो करीब 17.5 फीट ऊंची है। इस मंदिर में भगवान शिव के अलावा देवी विशालाक्षी, पर्वतवर्धिनी, भगवान विनायक, भगवान सुब्रह्मण्य, उत्सव प्रतिमा, सायनागृह और पेरुमल शामिल हैं।
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रामेश्वरम मंदिर (Picture Credits- AI Image)
शिव और विष्णु भक्तों के लिए बेहद खास
रामेश्वरम का मंदिर भगवान राम द्वारा स्थापित और भगवान शिव की पूजा को समर्पित ज्योतिर्लिंग है। यह पवित्र स्थान भगवान विष्णु और शिव भक्तों के लिए बेहद खास माना जाता है। इसके अलावा हिंदू धर्म के 4 प्रमुख स्थलों में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग भी शामिल है।
वर्तमान मंदिर की संरचना का निर्माण 17वीं शताब्दी में भारत के राजाओं द्वारा कराया गया था, जिसमें श्रीलंका के राजाओं का भी अहम योगदान था। बताया जाता है कि, भारत के सभी हिंदू मंदिरों की तुलना में रामेश्वरम का गलियारा काफी लंबा है। मंदिर के कुछ हिस्से तो हजारों साल पुराने बताए जाते हैं, लेकिन रामेश्वरम के पौराणिक संबंध रामायण काल से हैं।
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रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग से जुड़ी कथा
इस मंदिर से जुड़ी कथाओं और भारतीय महाकाव्य रामायण के अनुसार, रावण पर जीत हासिल करने के बाद भगवान राम प्रायश्चित के लिए भगवान शिव की पूजा करना चाहते थे। उन्होंने हनुमान जी को काशी से शिवलिंग लाने का अनुरोध किया।
जब हनुमान जी ने शिवलिंग लाने में देरी की तो, देवी सीता ने रेत से शिवलिंग बनाया ताकि राम भगवान शिव की पूजा कर सकें। ऐसा कहा जाता है कि, वही शिवलिंग जिसे रामलिंगम के नाम से जाना जाता है, अब रामनाथस्वामी में पूजा जाता है। हनुमान जी द्वारा काशी से लाए गए शिवलिंग को विश्वलिंगम कहा जाता है।
मंदिर के भीतर 22 तीर्थम (पवित्र जल निकाय) हैं जहां भक्त अपने पापों का प्रायश्चित करने के लिए नहाते हैं।
Source- tamilnadutourism
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