द्वारका का नागेश्वर ज्योतिर्लिंग: पढ़ें भगवान शिव के 10वें स्वयंभू धाम का इतिहास और रहस्य
गुजरात के सौराष्ट्र तट पर स्थित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 स्वयंभू ज्योतिर्लिंगों में से दसवां है। यह मंदिर ...और पढ़ें
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देश का 10वां नागेश्वर ज्योतिर्लिंग (द्वारका, गुजरात)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गुजरात के सौराष्ट्र तट पर द्वारका शहर और बेत द्वारका द्वीप के बीच में बसा है भगवान शिव का मंदिर, जहां भूमिगत गर्भगृह में दुनिया के 12 स्वयंभू ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग है।
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग 10वें नंबर पर आता है। नागेश्वर को दारुकवन के नाम से भी जाना जाता था, जो भारत के एक वन का प्राचीन नाम है। इस रहस्यमय ज्योतिर्लिंग और मंदिर से जुड़ी कथा के बारे में पढ़ें।
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नागेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, बौने ऋषियों के समूह 'बालखिल्य' ने दारुकवन में काफी समय तक भगवान शिव की पूजा की। उनकी भक्ति और धैर्य की परीक्षा लेने के लिए भगवान शिव उनके सामने नग्न अवस्था में प्रकट हुए, जिनके शरीर पर सिर्फ नाग (सांप) थे।
ऋषियों की पत्नियां उस संत से काफी आकर्षित हुईं और अपने पतियों को छोड़कर उनके पीछे चल पड़ीं। इससे ऋषि व्याकुल होने के साथ काफी क्रोधित हो उठे। उन्होंने अपना धैर्य खो दिया और तपस्वी को श्राप दिया कि उनका लिंग गिर जाए।
शिवलिंग पृथ्वी पर गिर गया और पूरी दुनिया कांप उठी। भगवान ब्रह्मा और विष्णु उनके पास आए और उनसे पृथ्वी को विनाश से बचाने के लिए अपना लिंग वापस लेने का अनुरोध किया। शिव ने उन्हें सांत्वना दी और अपना लिंग वापस ले लिया।
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इस कथा का वर्णन वामन पुराण के 6ठें और 45वें अध्याय में देखने को मिलता है। इसके बाद भगवान शिव ने सदा-सदा के लिए दारुकावन में ज्योतिर्लिंग के रूप में अपनी दिव्य उपस्थिति का वचन दिया।
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में भगवान शिव की 80 फीट की मूर्ति अपने आप में बेहद खास है। जटिल वास्तुकला और मनमोहक मूर्तियों के साथ यह मंदिर अपने आप में आध्यात्मिक सुकून का एहसास कराता है। शिव पुराण के मुताबिक, इस पवित्र शिवलिंग पर प्रार्थना करने से विष, सांप के काटने और सांसारिक प्रलोभनों से रक्षा होती है।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी अन्य प्रचलित कथा
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर अपने आप में आकर्षक कथाओं से भरा है। एक कथा के मुताबिक, दारुका नाम का एक निर्दयी राक्षस जो भगवान शिव के प्रति गहरी आस्था रखता था। जब सुप्रिया नाम के एक भक्त ने दारुका को भगवान शिव की पूजा का उचित तरीका सिखाने से मना कर दिया, तो राक्षस ने सुप्रिया को प्रताड़ित किया।
हालांकि सुप्रिया की अटूट आस्था और ऊं नम:शिवाय के जाप ने भगवान शिव को प्रभावित किया, जिन्होंने खुद आकर दारुका का वध किया। नागेश्वर नाम से प्रसिद्ध भगवान ने इसी जगह पर रहने का मन बनाया और सभी की रक्षा का आशीर्वाद दिया।
Source- incredibleindia
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