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बाबा वैद्यनाथ धाम: 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक, जहां एक साथ विराजते हैं शिव और शक्ति

Published: Mon, 17 Aug 2026 07:00 AM (IST)

झारखंड के देवघर में स्थित बाबा वैद्यनाथ धाम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जो एक प्राचीन ...और पढ़ें

देश का नौवां ज्योतिर्लिंग बाबा वैद्यनाथ धाम

देश का नौवां ज्योतिर्लिंग बाबा वैद्यनाथ धाम

HighLights

  1. बाबा वैद्यनाथ धाम 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक, शक्ति पीठ भी।

  2. मंदिर का मूल निर्माण 8वीं शताब्दी में, 16वीं में जीर्णोद्धार।

  3. रावण कथा से जुड़ा, नागर-द्रविड़ शैली, श्रावणी मेला प्रसिद्ध।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। झारखंड के देवघर में स्थित बाबा वैद्यनाथ धाम भगवान शिव के सबसे प्राचीन और पवित्र मंदिरों में से एक है। भारत भर से लोग यहां प्रार्थना करने के लिए आते हैं। यह भगवान शिव की पूजा रोगनाशक रूप में की जाती है, जिसे वजह से लोग उन्हें वैद्यनाथ या बाबा वैद्यनाथ कहते हैं।

यह पवित्र स्थान भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यही वजह है कि, शिव भक्तों के लिए यह जगह बेहद खास है। ऐतिहासिक अभिलेखों से मालूम होता है कि, इस मंदिर का मूल निर्माण 8वीं शताब्दी में नागवंशी वंश के पूर्वज पूरन मन द्वारा किया गया था।

सदियों से मंदिर का कई बार जीर्णोद्धार हो चुका है। वर्तमान समय की संरचना 16वीं शताब्दी में राजा मान सिंह द्वारा बनवायी गई थी, जो नागर और द्रविड़ शैलियों का मिला-जुला रूप है।

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बाबा वैद्यनाथ धाम का स्वरूप

बाबा वैद्यनाथ मंदिर परिसर एक विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है और अपने विशाल शिखर, जटिल नक्काशी और श्रावणी मेला कुंड के रूप में पहचाने जाने वाला पवित्र तालाब के लिए प्रसिद्ध है।

वही मुख्य मंदिर पूर्व दिशा की ओर है, जो एक सादे पत्थर की बनी संरचना है। इस मंदिर का शिखर 72 फीट ऊंचा है। शिखर को 3 ऊपर की ओर बढ़ते हुए सोने के बर्तनों से सजाया गया है, जिन्हें गिद्धौर के राजा पूरन सिंह ने दान किया था।

इस परिसर में मां पार्वती, गणेश, ब्रह्मा, कालभैरव, हनुमान, सरस्वती, सूर्य, राम-लक्ष्मण- जानकी, गंगा, काली, अन्नपूर्णा और लक्ष्मी-नारायण समेत अलग-अलग देवताओं को समर्पित 21 मंदिर हैं। लाल पवित्र धागों से शिव मंदिर से जुड़ा मां पार्वती का मंदिर, हिंदू पाज में इस स्थल का विशेष महत्व है।

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बाबा वैद्यनाथ से जुड़ी कथा

बाबा वैद्यनाथ मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथाएं काफी प्रचलित है। एक प्रमुख किंवदंती के अनुसार, भगवान शिव का परम भक्त रावण ने शक्तिशाली ज्योतिर्लिंग को कैलाश पर्वत से लंका लाने की कोशिश की।

अपनी यात्रा के दौरान भगवान विष्णु जिन्हें बैजू गड़रिया का रूप धरकर लिंग का एक हिस्सा देवघर में गिरा दिया। यहीं पर बाबा वैद्यनाथ मंदिर है। लोगों को मानना है कि, लिंग का यह टुकड़ा मंदिर का मुख्य हिस्सा बन गया।

एक और पौराणिक कथा के मुताबिक, भगवान शिव ने रावण को ठीक करने के लिए एक चिकित्सक का रूप लिया, जो अपनी भक्ति के दौरान घायल हो गया था। शिव की उपचार शक्तियों से प्रभावित होकर रावण ने देवघर में लिंग के रूप में रहने का अनुरोध किया।

वैद्यनाथ धाम में शक्ति पीठ

बाबा वैद्यनाथ मंदिर इसलिए भी खास है क्योंकि यह एक ज्योतिर्लिंग और एक शक्ति पीठ दोनों विराजमान हैं। शक्ति पीठ देवी शक्ति को समर्पित पवित्र स्थल है, जो देवी सती के अंगों से जुड़ा है। किंवदंती के मुताबिक, सती का दिल देवघर में गिरा था, जिससे यह एक शक्तिपीठ बन गया। इस मंदिर में एक साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा होती है।

हर साल इस मंदिर में श्रावण मास के दौरान श्रद्धालु बाबा वैद्यनाथ को जल चढ़ाते हैं। इसके लिए श्रद्धालु सबसे पहले बिहार के सुलतान गंज से गंगा नदी से पवित्र जल भरते हैं और करीब 108 किलो मीटर की यात्रा तय करके बाबा वैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं। इसके अलावा कहा जाता है कि, वासुकी नाथ के दर्शन किए बिना यह यात्रा सफल नहीं मानी जाती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।