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कहीं दूध हो जाता है नीला, तो कहीं साल में बस एक दिन खुलते हैं पट; भारत के 5 अद्भुत नाग मंदिर

Published: Thu, 13 Aug 2026 02:34 PM (IST)

भारत में नागों की पूजा की सदियों पुरानी परंपरा है, जहां सांपों को नाग देवता के रूप में पूजा जाता ...और पढ़ें

नागों को समर्पित देश के प्रसिद्ध मंदिर

नागों को समर्पित देश के प्रसिद्ध मंदिर

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में नागों की पूजा करने की सदियों पुरानी परंपरा रही है। यहां सांपों को जीव के रूप में नहीं बल्कि नाग देवता के रूप में पूजा जाता है। भारत देश में नागों को समर्पित कई ऐसे मंदिर हैं, जो पूरी तरह से नागों को समर्पित हैं। नागपंचमी या शिवरात्रि जैसे शुभ अवसर पर यहां का नजारा देखने लायक होता है।

इन मंदिरों से जुड़ी परंपराएं और मान्यताएं इन्हें देशभर के अन्य मंदिरों से अलग और खास बनाती है। इस साल नाग पंचमी का त्योहार 17 अगस्त 2026, सोमवार के दिन मनाया जाएगा। आइए जानते हैं भारत के 5 प्रसिद्ध नाग मंदिरों के बारे में।

नागचंद्रेश्वर मंदिर, उज्जैन

मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर, जो उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर के तीसरी तल पर स्थित है। यह मंदिर साल में मात्र एक बार नागपंचमी के मौके पर ही खुलता है। माना जाता है कि, नागराज तक्षक खुद इस मंदिर में रहते हैं।

नागचंद्रेश्वर मंदिर में 11वीं शताब्दी की एक भव्य प्रतिमा है जिसमें फन फैलाए नाग पर भगवान शिव और माता पार्वती विराजमान हैं। कहा जाता है कि, यह प्रतिमा नेपाल से लाई गई थी। इसके अलावा यह विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां भगवान विष्णु की जगह शिव जी सांप पर विराजमान हैं।

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मन्नारशाला नागराज मंदिर, केरल

केरल के अलाप्पुझा जिले में स्थित है मन्नारशाला मंदिर जो अपने नाग पूजा के लिए जाना जाता है। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के मुताबिक यहां नागराज की खासतौर पर पूजा की जाती है।

माना जाता है कि, संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले जोड़े इस मंदिर में पूजा करने से उन्हें फल मिलता है। मन्नारशाला मंदिर में मुख्य रूप महिला पुजारी की भूमिका बेहद खास रहती है।

नागराज मंदिर, नागरकोइल

तमिलनाडु के नागरकोइल शहर में बसा है नागराज का मंदिर जो नाग देवता को समर्पित है। विशेष बात यह है कि, इस शहर का नाम भी इस प्राचीन मंदिर के नाम पर ही पड़ा है।

मंदिर के गर्भगृह में स्थित नागराज देवता की पूजा रेत से बने स्वरू में की जाती है। इसके अलावा यहां भक्तों को प्रसाद के तौर पर गीली रेत दी जाती है, जिसे बेहद पवित्र माना जाता है। इस मंदिर में दर्शन करने से कालसर्प दोष की समस्या दूर होती है।

नागवासुकी मंदिर, प्रयागराज

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के गंगा नदी के किनारे बसा है नागवासुकी का मंदिर जहां मुख्य रूप से नाग देवता की पूजा की जाती है। नाग पंचमी के मौके पर मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की जाती है। इसके अलावा माना जाता है कि नागवासुकी देवता के दर्शन मात्र से काल सर्प दोष के भय से मुक्ति मिलती है।

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थिरुनागेश्वरम नागनाथस्वामी मंदिर

तमिलनाडु में स्थित थिरुनागेश्वरम नागनाथस्वामी मंदिर खासतौर से नाग पूजा और नवग्रह उपासना के लिए जाना जाता है। यह भगवान शिव की पूजा नागनाथस्वामी के रूप में की जाती है।

इसके अलावा मंदिर में राहु की भी पूजा की जाती है। इस दौरान राहु अभिषेकम जैसे धार्मिक अनुष्ठानों का भी आयोजन किया जाता है। भक्तों का मानना है कि, राहु की प्रतिमा पर चढ़ाया गया दूध नीला दिखाई देता है, लेकिन नीचे गिरने के बाद सफेद हो जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।