पंजाब की राजनीति के लिए कितना अहम है डेरा बल्लां? PM मोदी-राहुल गांधी व केजरीवाल सहित कई नेता टेक चुके माथा
डेरा बल्लां सीधे राजनीति से दूर रहता है, फिर भी बड़े नेता संत निरंजन दास से आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। दोआबा में रविदासिया समाज की मजबूत मौजूदगी इसके ...और पढ़ें

डेरे में पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी व विपक्ष के नेता राहुल गांधी।
HighLights
डेरा बल्लां पंजाब की राजनीति का अहम केंद्र।
बिना चुनावी अपील के भी बड़े नेताओं का आगमन।
दलित वोट बैंक और रविदासिया समाज का प्रभाव।
आशीष तिवारी, जालंधर। जालंधर स्थित डेरा सचखंड बल्लां आज दोआबा की राजनीति का ऐसा महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है, जहां पहुंचना बड़े राजनीतिक दलों के लिए आस्था के साथ-साथ सियासी संदेश भी माना जाता है। डेरा सचखंड बल्लां ने कभी खुले तौर पर किसी राजनीतिक दल या उम्मीदवार के समर्थन की अपील नहीं की।
डेरा प्रबंधन की ओर से कोई भी राजनीतिक संदेश देने से भी परहेज किया जाता है। इसके बावजूद पंजाब की राजनीति में इसका प्रभाव लगातार दिखाई देता है। खासकर दोआबा क्षेत्र के जालंधर, होशियारपुर, नवांशहर और कपूरथला जिलों की करीब 23 विधानसभा सीटों पर डेरा से जुड़ी बड़ी संगत राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
पंजाब में दलित आबादी करीब 32 प्रतिशत है। इनमें गुरु रविदास नामलेवा संगत का भी बड़ा सामाजिक आधार (करीब एक तिहाई हिस्सा) माना जाता है। पंजाब विधानसभा की 117 सीटों में से 34 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। ऐसे में दलित मतदाताओं की राजनीतिक अहमियत किसी से छिपी नहीं है।
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पीएम मोदी ने पैर छू लिया अशीर्वाद
एक फरवरी 2026 को श्री गुरु रविदास जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का डेरा बल्लां पहुंचना राजनीतिक गलियारों में खास चर्चा का विषय बना। प्रधानमंत्री ने संत निरंजन दास से मुलाकात की और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इसके बाद संत निरंजन दास जी के कार्यों को सम्मान मिला और उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया।
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17 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी फिर जालंधर पहुंचे। उन्होंने श्री गुरु रविदास महाराज के नाम पर ट्रेन को हरी झंडी दिखाई और इस दौरान डेरा बल्लां के गद्दीनशीन संत निरंजन दास से भी मुलाकात की।
एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं
डेरा बल्लां की अहमियत किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं रही। जनवरी 2017 में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी डेरा पहुंचे और संत निरंजन दास से मुलाकात की। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने डेरा पहुंचकर संत निरंजन दास से मुलाकात की और रात भी रुके।
31 दिसंबर 2021 को शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल भी डेरा पहुंचीं। अगले दिन आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने डेरा प्रमुख से मुलाकात की। बाद में 25 मार्च 2023 को केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान ने डेरा परिसर में श्री गुरु रविदास बाणी अध्ययन केंद्र की आधारशिला रखी।
इनते अलावा कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू, अरुणा चौधरी, मोहिंदर सिंह केपी समेत कई नेता समय-समय पर यहां पहुंचते रहे हैं। जुलाई 2026 में पंजाब भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद केवल सिंह ढिल्लों ने भी डेरा पहुंचकर संत निरंजन दास से आशीर्वाद लिया।
रविदासिया समाज की मजबूत उपस्थिति
डेरा बल्लां की सबसे बड़ी ताकत यही है कि वह कभी सीधे राजनीति में नहीं उतरता। न कोई चुनावी घोषणा, न किसी पार्टी का समर्थन, फिर भी बड़े से बड़े नेता यहां आकर संत निरंजन दास का आशीर्वाद लेना महत्वपूर्ण समझते हैं। डेरा से जुड़ी संगत का सामाजिक आधार ही इसकी ताकत है। दोआबा में रविदासिया समाज की मजबूत उपस्थिति और पंजाब के व्यापक दलित वोट बैंक के कारण हर राजनीतिक डेरे तक अपनी पहुंच बनाना चाहता है।