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    5 साल सेवा पूरी करने वाले आउटसोर्स कर्मियों को राहत, सीधे कॉन्ट्रैक्ट पर आने का मिलेगा मौका, पंजाब सरकार का बड़ा फैसला

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 05:03 PM (IST)

    पंजाब सरकार ने 'पंजाब स्टेट आउटसोर्स्ड पर्सनेल बिल, 2026' पारित किया है, जिससे पात्र आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधे विभागों के साथ वार्षिक अनुबंध पर रखा ...और पढ़ें

    विधानसभा में बोलते हुए सीएम भगवंत मान। फोटो जागरण

    विधानसभा में बोलते हुए सीएम भगवंत मान। फोटो जागरण

    HighLights

    1. पात्र आउटसोर्स कर्मियों को सीधे वार्षिक अनुबंध पर रखा जाएगा।

    2. ग्रुप-सी और डी कर्मियों के लिए 3 से 5 साल की सेवा अनिवार्य।

    3. स्थायी नियुक्ति का अधिकार नहीं, आरक्षण नीति लागू रहेगी।

    रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी राहत देने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए ‘पंजाब स्टेट आउटसोर्स्ड पर्सनेल (ट्रांजिशन टू कांट्रैक्चुअल एंगेजमेंट) बिल, 2026’ विधानसभा में पास कर दिया गया।

    इसके तहत पात्र आउटसोर्स कर्मियों को निर्धारित अवधि की लगातार सेवा पूरी करने के बाद आउटसोर्सिंग एजेंसी या ठेकेदार के माध्यम से काम करने के बजाय संबंधित विभाग या संस्था के साथ सीधे साल-दर-साल कांट्रैक्ट पर जोड़ा जाएगा। सामान्य श्रेणी के कर्मियों के लिए पांच वर्ष की लगातार सेवा और खतरनाक श्रेणी के कर्मियों के लिए तीन वर्ष की सेवा पूरी करना जरूरी होगा।

    विधेयक के अनुसार इसका लाभ ग्रुप-सी और ग्रुप-डी श्रेणी में काम करने वाले ऐसे कर्मियों को मिलेगा, जो कट-ऑफ डेट पर लगातार सेवा में हों और निर्धारित सभी शर्तें पूरी करते हों। सरकार विधेयक लागू होने के 30 दिन के भीतर अधिसूचना जारी कर कट-ऑफ डेट तय करेगी, जो पूरे पंजाब में सभी विभागों और संस्थाओं के लिए समान होगी।

    240 दिन की उपस्थिति और सात घंटे की ड्यूटी जरूरी

    लगातार सेवा के लिए प्रत्येक कैलेंडर वर्ष में कम से कम 240 दिन वास्तविक उपस्थिति और प्रतिदिन कम से कम सात घंटे की ड्यूटी जरूरी होगी। आउटसोर्सिंग एजेंसी बदलने के बावजूद यदि कर्मचारी उसी या लगभग समान कार्य पर बिना वास्तविक रुकावट के तैनात रहा है तो सेवा को लगातार माना जाएगा।

    प्रशासनिक कारणों से हुई नाममात्र की सेवा बाधा, स्वीकृत अवकाश, मातृत्व अवकाश तथा सरकार द्वारा अधिसूचित प्राकृतिक आपदा या महामारी के कारण हुई रुकावट को सेवा में ब्रेक नहीं माना जाएगा।

    पात्र कर्मचारी का काम आवश्यक सार्वजनिक सेवा से जुड़ा होना चाहिए। उसे पूर्णकालिक और गैर-मौसमी कार्य में लगाया गया हो तथा भुगतान राज्य की संचित निधि या पंजाब सरकार के स्वामित्व, नियंत्रण या पर्याप्त वित्त पोषण वाली संस्था के फंड से होता हो। केंद्रीय प्रायोजित योजना, केंद्रीय क्षेत्र योजना, बाहरी सहायता प्राप्त परियोजना या अन्य बाहरी वित्त पोषण वाले पद इसके दायरे से बाहर होंगे।

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    तकनीकी योग्यता नहीं तो अलग श्रेणी में अवसर

    कर्मचारी के पास संबंधित कैडर की न्यूनतम शैक्षणिक, तकनीकी योग्यता और अनुभव होना चाहिए। तकनीकी योग्यता हासिल करने के लिए विभाग अधिकतम एक वर्ष तक प्रशिक्षण की सुविधा दे सकता है। जिन कर्मियों के पास निर्धारित योग्यता नहीं है, लेकिन वे बाकी शर्तें पूरी करते हैं और आवश्यक सेवा में काम कर रहे हैं, उन्हें पद के विरुद्ध नहीं बल्कि कुशल, अर्धकुशल या अकुशल श्रमिक की अलग श्रेणी में सीधे कांट्रैक्ट पर लेने पर विचार किया जा सकता है।

    विधेयक में तकनीकी, परिचालन, सार्वजनिक सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को भी पात्रता के दायरे में रखा गया है। बिजली संबंधी शिकायत निवारण, सीवर और सफाई कार्य, अग्निशमन तथा आपातकालीन सेवाओं में लगे कर्मियों को खतरनाक श्रेणी में शामिल किया गया है। इनके लिए तीन वर्ष की लगातार सेवा के बाद सीधे कांट्रैक्ट पर आने का प्रावधान है।

    स्थायी नौकरी का अधिकार नहीं होगा

    सीधे कांट्रैक्ट पर आने के बावजूद कर्मचारी को स्थायी नियुक्ति या नियमितीकरण का कोई निहित अधिकार नहीं मिलेगा। इससे नया कैडर भी नहीं बनेगा। नियुक्ति साल-दर-साल कांट्रैक्ट के आधार पर होगी और सरकार की आरक्षण नीति लागू रहेगी।

    58 वर्ष की आयु वाले पात्र नहीं

    हॉनरेरी या पार्ट टाइम कर्मचारी, केंद्रीय या राज्य परियोजना की अवधि से जुड़े कर्मचारी, निश्चित अवधि के अकादमिक कर्मचारी, किसी पदाधिकारी के कार्यकाल तक के पद पर लगे कर्मचारी और 58 वर्ष की आयु पूरी कर चुके कर्मी इस कानून के दायरे में नहीं होंगे।

    पूरी गतिविधि आउटसोर्स कर दिए जाने वाले कार्यों में लगे कर्मचारी भी पात्र नहीं होंगे। पहले से सरकार की 18 मार्च 2011, 7 अक्टूबर 2022 और 16 मई 2023 की नीतियों के तहत मिली सेवा सुरक्षा या नियमितीकरण पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

    आवेदन के लिए दस्तावेज जरूरी

    पात्र कर्मियों को प्रमाणित उपस्थिति रिकार्ड, अपने बैंक खाते में वेतन जमा होने के प्रमाण और पुलिस क्लीयरेंस देना होगा। पुलिस से 30 दिन में जवाब नहीं मिलने पर क्लीयरेंस मंजूर माना जाएगा, हालांकि बाद में इसे वापस लिया जा सकेगा। आउटसोर्सिंग एजेंसी ने रिकार्ड उपलब्ध नहीं कराया हो तो पीएफ, ईएसआइ, वेतन पर्ची, बैंक ट्रांसफर या शपथपत्र आधारित वैकल्पिक दस्तावेज स्वीकार किए जा सकेंगे।

    विभाग कैडर स्तर पर पात्रता समिति बनाएंगे। व्यक्तिगत आवेदनों के लिए स्क्रीनिंग और अपीलीय समितियां होंगी। विधेयक के अनुसार विभागों को प्रक्रिया शुरू होने के बाद निर्धारित समयसीमा में पात्रता तय करनी होगी।