पंजाब में पेड़ काटना अब आसान नहीं, एक पेड़ के बदले लगाने होंगे 10 पौधे; बिना मंजूरी कटाई पर 50 हजार जुर्माना
पंजाब विधानसभा ने वृक्ष संरक्षण विधेयक पारित किया। शहरी क्षेत्रों में पेड़ काटने के लिए अनुमति जरूरी होगी। एक पेड़ के बदले 10 और विरासत वृक्ष के बदले ...और पढ़ें

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HighLights
शहरी क्षेत्रों में पेड़ काटने को अनुमति अनिवार्य।
एक पेड़ के बदले 10 पौधे लगाने होंगे।
उल्लंघन पर 50 हजार रुपये तक जुर्माना।
रोहित कुमार चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा ने सोमवार को पंजाब वृक्ष संरक्षण विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। नए कानून के लागू होने के बाद शहरी क्षेत्रों में पेड़ काटने, हटाने या उन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति लेना जरूरी होगा। कानून का उद्देश्य प्रदेश में हरित क्षेत्र बनाए रखना, पर्यावरणीय संतुलन कायम करना और मिट्टी का संरक्षण करना है।
विधेयक के अनुसार किसी भी व्यक्ति, संस्था, एजेंसी या सरकारी एजेंसी को शहरी क्षेत्र में खड़े पेड़ काटने की अनुमति नहीं होगी। पूरी तरह सूखे या गिरे हुए पेड़ को भी बिना निर्धारित अनुमति के काटने या हटाने पर रोक रहेगी। पेड़ को सीमेंट-कंक्रीट, सजावटी लाइट, फ्लेक्स, जाल, तार, कील, प्लास्टिक केबल, जहरीले पदार्थ या अन्य तरीके से नुकसान पहुंचाना भी प्रतिबंधित होगा।
महीने में मिलेगी पेड़ काटने की अनुमति
पेड़ काटने के लिए संबंधित ट्री प्रोटेक्शन अधिकारी के पास निर्धारित फार्म में आवेदन करना होगा। सामान्य मामलों में अधिकारी को 30 दिन के भीतर निर्णय देना होगा। सूखे, गिरे हुए अथवा किसी व्यक्ति या संपत्ति के लिए खतरा बने पेड़ के मामले में अधिकतम सात दिन में निर्णय लेना होगा। सात दिन की अवधि में निर्णय नहीं होने पर अनुमति स्वत: प्रदान मानी जाएगी। अधिकारी के फैसले के खिलाफ 30 दिन में अपील की जा सकेगी।
विरासत वृक्ष के बदले 25 पौधे
विधेयक में पेड़ काटने की अनुमति पाने वाले व्यक्ति पर प्रतिपूरक पौधारोपण की जिम्मेदारी तय की गई है। एक पेड़ काटने के बदले 10 पेड़ लगाकर उनकी देखभाल करनी होगी।
100 वर्ष से अधिक पुराने और ऐतिहासिक, सांस्कृतिक या धार्मिक महत्व वाले विरासत वृक्ष के मामले में 25 पेड़ लगाने होंगे। जमीन की कमी होने पर अधिकारी कम संख्या में पौधे लगाने, दूसरी जगह पौधारोपण करने या निर्धारित राशि विशेष खाते में जमा कराने की अनुमति दे सकता है।
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उल्लंघन पर 50 हजार रुपये तक जुर्माना
पौधारोपण की शर्त पूरी नहीं करने पर पहली बार प्रति पेड़ 10 हजार रुपये, दूसरी बार 35 हजार रुपये और लगातार उल्लंघन पर 50 हजार रुपये प्रति पेड़ तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। बिना अनुमति पेड़ काटने या हटाने पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के साथ प्रति पेड़ 10 हजार रुपये तक जुर्माना होगा।
पेड़ को नुकसान पहुंचाने पर प्रति पेड़ दो हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति से प्राप्त राशि संबंधित शहरी निकायों में हरित गतिविधियों पर खर्च होगी।
विरासत वृक्ष को काटने के लिए नियम कड़े
विरासत वृक्ष को सामान्य परिस्थितियों में काटने या हटाने की अनुमति नहीं होगी। बेहद गंभीर परिस्थितियों में ही राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से इसे हटाया जा सकेगा। बाढ़, तूफान या अन्य प्राकृतिक अथवा मानवजनित आपदा जैसी आपात परिस्थितियों में जनजीवन या संपत्ति की सुरक्षा के लिए पेड़ हटाने की अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन इसकी सूचना 24 घंटे के भीतर ट्री प्रोटेक्शन अधिकारी को देनी होगी।
विधेयक के साथ 2024 की गैर-वन सरकारी और सार्वजनिक भूमि के लिए वृक्ष संरक्षण नीति को समाप्त कर दिया गया है। इसके तहत वन क्षेत्र, वन्यजीव संरक्षित क्षेत्र, छावनी, अर्धसैनिक और रक्षा क्षेत्रों समेत कई क्षेत्रों को कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। बांस, यूकेलिप्टस, पॉपलर, सुबबूल और बर्मा नीम जैसी कुछ प्रजातियों को भी छूट दी गई है।