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    पंजाब में निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर ब्रेक, 5% से ज्यादा बढ़ोतरी पर मंजूरी जरूरी; उल्लंघन पर मान्यता रद

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 03:49 PM (IST)

    पंजाब विधानसभा ने निजी स्कूलों की फीस पर नियंत्रण वाला संशोधन विधेयक पारित किया। 5% से ज्यादा बढ़ोतरी पर मंजूरी जरूरी होगी। नियम तोड़ने पर जुर्माना व ...और पढ़ें

    विधानसभा में बोलते हुए सीएम भगवंत मान।

    विधानसभा में बोलते हुए सीएम भगवंत मान।

    HighLights

    1. निजी स्कूलों की फीस वृद्धि अब 5% तक सीमित।

    2. अधिक फीस वसूली पर अभिभावकों को राशि वापस होगी।

    3. नियम तोड़ने पर स्कूलों की मान्यता रद्द हो सकती है।

    रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब में निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल अब मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। पंजाब विधानसभा में पेश पंजाब विनियमन शुल्क गैर-सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान (संशोधन) विधेयक-2026 को सर्व समिति से पास कर दिया गया।

    अब फीस बढ़ोतरी की अधिकतम सीमा तय करने के साथ-साथ अधिक फीस वसूली पर अभिभावकों को राशि लौटाने और नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। विधेयक के अनुसार सामान्य स्थिति में कोई स्कूल एक शैक्षणिक वर्ष में पिछली फीस के मुकाबले पांच प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी नहीं कर सकेगा।

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    फीस की परिभाषा का दायरा बढ़ाया

    विधेयक में फीस की परिभाषा को व्यापक किया गया है। ट्यूशन फीस, विकास शुल्क, वार्षिक शुल्क, गतिविधि शुल्क, स्मार्ट क्लास या तकनीकी शुल्क, परिवहन शुल्क, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, परीक्षा शुल्क, अन्य फंड और अनिवार्य आर्थिक योगदान समेत स्कूल या उससे जुड़ी संस्था द्वारा विद्यार्थी अथवा अभिभावक से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से वसूली जाने वाली रकम को फीस माना जाएगा। केवल वास्तविक रूप से वापस की जाने वाली सुरक्षा राशि को इससे बाहर रखा गया है।

    90 दिन पहले सार्वजनिक करनी होगी फीस

    स्कूल को फीस बढ़ाने से पहले संशोधित फीस ढांचा स्कूल परिसर में प्रमुख स्थान पर और अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर कम से कम 90 दिन पहले प्रदर्शित करना होगा। अभिभावकों को ईमेल, इलेक्ट्रॉनिक संदेश, वाट्सएप संदेश, परिपत्र या अभिभावक-शिक्षक बैठक सहित प्रभावी माध्यम से इसकी जानकारी देना भी अनिवार्य होगा।

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    5% से अधिक बढ़ोतरी पर फोरेंसिक ऑडिट

    यदि किसी स्कूल को पांच प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ानी है तो उसे शैक्षणिक सत्र शुरू होने से कम से कम 180 दिन पहले जिला नियामक संस्था के पास प्रस्ताव देना होगा। नियामक संस्था की लिखित मंजूरी के बिना ऐसी बढ़ोतरी लागू नहीं की जा सकेगी।

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    प्रस्ताव की जरूरत और औचित्य जांचने के लिए संस्था स्कूल या उससे जुड़ी ट्रस्ट, सोसायटी अथवा कंपनी का फोरेंसिक आडिट करा सकेगी। आवेदन पर सभी जरूरी दस्तावेज मिलने के बाद 90 दिन के भीतर फैसला करना होगा। निर्णय लंबित रहने तक पुरानी फीस ही लागू रहेगी।

    तीन साल की होगी समीक्षा

    विधेयक में 36 महीने की अवधि में कुल फीस बढ़ोतरी की सीमा भी तय की गई है। यदि इस अवधि में फीस सबसे शुरुआती शैक्षणिक वर्ष की फीस से 15 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है तो निर्धारित सीमा से अधिक वसूली गई रकम प्रत्येक प्रभावित विद्यार्थी या उसके अभिभावक को विधेयक के लागू होने की अधिसूचना से 90 दिन के भीतर वापस करनी होगी। एक या दो वर्ष पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए क्रमश: पांच और 10 प्रतिशत की सीमा के आधार पर वापसी तय होगी।

    वर्दी व किताबों की खरीद में मनमानी खत्म

    स्कूल किसी विद्यार्थी या अभिभावक को अपनी पसंद के विक्रेता से वर्दी खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा। निर्धारित रंग, डिजाइन और माप के अनुरूप वर्दी अभिभावक किसी भी विक्रेता से खरीद सकेंगे। इसी तरह किताब, कार्यपुस्तिका या अध्ययन सामग्री के लिए स्कूल को कम से कम तीन प्रकाशकों या विक्रेताओं की सूची सार्वजनिक करनी होगी। किसी एक दुकान या प्रकाशक से खरीदने के लिए दबाव नहीं बनाया जा सकेगा।

    उल्लंघन पर बढ़ेगा जुर्माना

    नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने की राशि बढ़ाई गई है। फीस वापसी के आदेश का 30 दिन में पालन नहीं करने पर 10 हजार रुपये प्रतिदिन अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकेगा। जुर्माना और वापसी की राशि जमा नहीं करने पर स्कूल की मान्यता या संबद्धता वापस लेने की कार्रवाई भी हो सकती है। हालांकि मान्यता या संबद्धता वापस लेने से पहले स्कूल को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर देना होगा।

    विधेयक में नियामक संस्था को नियमों के उल्लंघन पर स्वत: संज्ञान लेकर फोरेंसिक आडिट कराने और संबंधित रिकार्ड मांगने की शक्ति दी गई है। इसके अलावा नियामक संस्था के आदेश के खिलाफ 45 दिन के भीतर स्कूल या प्रभावित पक्ष शिक्षा विभाग के सचिव के समक्ष अपील कर सकेगा।

    अपीलीय प्राधिकारी को यथासंभव 90 दिन में फैसला करना होगा। नियामक संस्था को अपने आदेश की 45 दिन के भीतर समीक्षा करने की शक्ति भी दी गई है। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि निजी स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी से अभिभावकों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। सरकार ने फीस निर्धारण में पारदर्शिता, अभिभावकों के हितों की सुरक्षा और शिकायतों के प्रभावी निपटारे के लिए कानून को मजबूत करने का कदम उठाया है।

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