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    CM मान विवाद पर 5 जुलाई की बैठक से पहले संगठनों में मतभेद, निमंत्रण व बहिष्कार पर उठे सवाल; कइयों ने बनाई दूरी

    Updated: Sat, 04 Jul 2026 12:23 PM (IST)

    पांच जुलाई को होने वाले पंथिक सम्मेलन से पहले कई पंथिक संगठनों ने बहिष्कार का एलान किया, जबकि कुछ ने निमंत्रण नहीं मिलने का दावा किया। सम्मेलन के उद्द ...और पढ़ें

    अमृतसर में 6 दिन पहले बुलाई गई पंथक बैठक की फाइल फोटो।

    अमृतसर में 6 दिन पहले बुलाई गई पंथक बैठक की फाइल फोटो।

    HighLights

    1. 5 जुलाई के पंथिक सम्मेलन से पहले मतभेद।

    2. कई सिख संगठनों ने सम्मेलन का बहिष्कार किया।

    3. निमंत्रण न मिलने और राजनीतिकरण के आरोप।

    जागरण संवाददाता, अमृतसर। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से पांच जुलाई को गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हॉल में प्रस्तावित पंथिक सम्मेलन से पहले ही पंथिक हलकों में मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। सम्मेलन का उद्देश्य पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के संबंध में अकाल तख्त के निर्देश के प्रति सिख समाज को जागरूक करना बताया गया है, लेकिन कार्यक्रम से पहले ही कई संगठनों ने इससे दूरी बनाने का फैसला किया है।

    कुछ संगठनों का कहना है कि उन्हें सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण ही नहीं भेजा गया। सिख फेडरेशन भिंडरांवाला के भाई रंजीत सिंह ने मीडियो को जानकारी देते हुए बताया कि शुक्रवार को समान विचारधारा वाले पंथिक संगठनों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में शामिल प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से प्रस्तावित सम्मेलन का बहिष्कार करने का निर्णय लिया।

    उनका आरोप है कि शिरोमणि अकाली दल से जुड़े सदस्यों के प्रभाव वाली शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी इस सम्मेलन का इस्तेमाल शिरोमणि अकाली दल की राजनीतिक प्रासंगिकता को फिर से स्थापित करने के लिए कर रही है।

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    सम्मेलन में भागीदारी की अपील की गई

    यह विवाद उस प्रस्ताव के बाद सामने आया है, जिसे हाल ही में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सामान्य सदन ने पारित किया था। प्रस्ताव में मुख्यमंत्री भगवंत मान को अकाल तख्त द्वारा "गुरु-द्रोही" और "खालसा पंथ विरोधी" घोषित किए जाने के निर्देश का समर्थन किया गया था। इसके साथ ही सिख समुदाय को इस फैसले के प्रति जागरूक करने के लिए पांच जुलाई को पंथिक सम्मेलन आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया था।

    सम्मेलन की घोषणा करते समय अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने कहा था कि सभी सिख संप्रदायों और पंथिक संगठनों को सम्मेलन में शामिल होने के लिए निमंत्रण भेजा जाएगा और उनसे बड़ी संख्या में भाग लेने की अपील की जाएगी।

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    कई संगठनों को नहीं मिला निमंत्रण

    हालांकि, शिरोमणि अकाली दल (पुनर्गठित) के मुख्य प्रवक्ता जगजीत सिंह कोहली ने दावा किया कि उनकी पार्टी को अब तक कोई निमंत्रण नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि जब सार्वजनिक रूप से सभी सिख संगठनों को आमंत्रित करने की बात कही गई थी, तब उनकी पार्टी को बाहर रखना कई सवाल खड़े करता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान से विवादित वीडियो को लेकर स्पष्टीकरण मांगना अकाल तख्त का अधिकार है, लेकिन सिख विधायकों और मंत्रियों को भी तलब किए जाने से यह मामला धार्मिक दायरे से निकलकर व्यापक राजनीतिक स्वरूप लेता दिखाई दे रहा है।

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    पुराने फैसले पर भी उठे सवाल

    जगजीत सिंह कोहली ने यह सवाल भी उठाया कि 2 दिसंबर, 2024 को शिरोमणि अकाली दल के तत्कालीन नेतृत्व के खिलाफ अकाल तख्त द्वारा जारी आदेश के बाद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने इसी तरह का जनजागरण अभियान क्यों नहीं चलाया। उस आदेश में 2007 से 2017 के कार्यकाल के दौरान धार्मिक और राजनीतिक दुराचार का दोषी ठहराते हुए संबंधित नेताओं को धार्मिक सजा दी गई थी और पार्टी के पुनर्गठन का निर्देश भी दिया गया था।

    पंथिक सम्मेलन से पहले सामने आए इन मतभेदों ने सिख संगठनों के बीच नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजरें पांच जुलाई को होने वाले सम्मेलन पर टिकी हैं कि इसमें किन-किन संगठनों की भागीदारी होती है और इस कार्यक्रम का पंथिक तथा राजनीतिक स्तर पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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